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राम मन्दिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने की प्रक्रिया शुरू, तकनीकी पहलुओं के अध्ययन के लिए बनाई गई अफसरों की टीम

सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट का गठन और उसका रजिस्ट्रेशन संस्कृति मंत्रालय के जिम्मे किया जा सकता है. ट्रस्ट के रजिस्ट्रेशन दिल्ली या लखनऊ में कराया जा सकता है. सं

नई दिल्ली: राम मन्दिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. अफसरों की एक टीम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अध्ययन करने के लिए बनाई गई है. जल्द ट्रस्ट का गठन कर राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. गृह मंत्रालयों के सूत्रों के मुताबिक अफसरों की एक टीम सुप्रीम कोर्ट के आदेश की तकनीकी पहलुओं के अध्ययन के लिए बनाई गई. इस टीम ने अपना काम करना शुरू कर दिया है. अटॉर्नी जनरल और कानून मंत्रालय से इसके लिए राय मांगी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर निर्माण के लिए अगले 3 महीनों के भीतर ट्रस्ट बनाने के निर्देश केंद्र सरकार को दिए हैं. ट्रस्ट बनाने के लिए सबसे पहले, ट्रस्ट के सदस्य के नाम तय करने होते हैं, फिर उसके बाद ट्रस्ट का कार्यक्षेत्र तय करना होता है और किस सदस्य की क्या जिम्मेदारी होगी यह भी तय करना होता है.

सूत्रों के मुताबिक अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए गुजरात के सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट की तर्ज पर ट्रस्ट बनाया जा सकता है. लेकिन गुजरात के सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट में 6 सदस्य जबकि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले ट्रस्ट में 6 से ज्यादा सदस्य हो सकते हैं. इसमें सरकारी अधिकारी भी ट्रस्ट का हिस्सा होंगे. एक अधिकारी प्रधानमंत्री कार्यालय से ट्रस्ट में नामित हो सकता है इसके अतिरिक्त राज्य सरकार से भी एक अधिकारी यानी उत्तर प्रदेश सरकार से एक अधिकारी ट्रस्ट का हिस्सा हो सकता है. इन सदस्यों के अलावा राम जन्मभूमि न्यास, निर्मोही अखाड़ा के सदस्य भी राम मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले ट्रस्ट के सदस्य सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, मंदिर के मुख्य पुजारी के अतिरिक्त, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संगठनों को भी इस ट्रस्ट के हिस्सा बनाया जा सकता है.

सूत्रों के मुताबिक राम जन्मभूमि आंदोलन बहुत वृहद स्तर और लंबे समय तक चला और इस आंदोलन को चलाने वाले कई संगठन, राम मंदिर आंदोलन के लिए काम करते रहे तो, ऐसे में ट्रस्ट में इन संगठनों के प्रतिनिधित्व देने पर ट्रस्ट और भी बड़ा हो सकता है. सूत्रों का मानना है कि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल, जैसे संगठन के सदस्य भी इस ट्रस्ट का हिस्सा हो सकते हैं. हालांकि ट्रस्ट में कौन-कौन होगा इस पर आखिरी मुहर प्रधानमंत्री कार्यालय से ही लगायेगा.

सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट का गठन और उसका रजिस्ट्रेशन संस्कृति मंत्रालय के जिम्मे किया जा सकता है. ट्रस्ट के रजिस्ट्रेशन दिल्ली या लखनऊ में कराया जा सकता है. संस्कृति मंत्रालय की देखरेख में ही ट्रस्ट, राम मंदिर निर्माण का कार्य आगे बढ़ा सकता है. अब सवाल उठता है कि राम मंदिर निर्माण के लिए पैसा कहां से आएगा ? विश्व हिंदू परिषद से जुड़े सूत्रों का कहना है कि राम मंदिर निर्माण के लिए सरकार से एक भी रुपया नहीं लिया जाएगा. राम मंदिर निर्माण हिंदू समाज के चंदे के द्वारा ही किया जाएगा विश्व हिंदू परिषद के सूत्रों का कहना है कि राम मंदिर निर्माण के लिए विश्व हिंदू परिषद के पास सामग्री के अतिरिक्त हिंदू समाज का कुछ चंदा भी है. इस चंदे की विश्व हिन्दू परिषद, राम मंदिर निर्माण के लिए गठित होने वाले ट्रस्ट को दे देंगी. हालांकि विश्व हिंदू परिषद ने उस रकम का खुलासा नहीं किया जो चंदे के रूप में उसके पास जमा है. सूत्रों का कहना है की 500 करोड़ का बजट तो राज्य सरकार यानी उत्तर प्रदेश सरकार का अयोध्या के पुनर्निर्माण का है ऐसे में मंदिर निर्माण के लिए कम से कम 100 करोड़ का बजट तो रखा ही जा सकता है.

सूत्रों के मुताबिक राम मंदिर निर्माण के लिए केवल 67 एकड़ अधिग्रहित जमीन पर ही निर्माण कार्य नहीं होगा बल्कि पूरी अयोध्या जी का पुनर्निर्माण और पुनर्विकास भी किया जायेगा. इसके लिए 100 या उससे अधिक वर्ष पुराने मंदिरों को छोड़कर बाकी संपत्तियों का पुनर्निर्माण और मार्गों का चौड़ीकरण किया जाएगा. अयोध्या जी में हनुमानगढ़ी को केंद्र मानकर 12 किलोमीटर के दायरे में अयोध्या जी का पुनर्निर्माण करने की सरकार की योजना है.

इस योजना के मुताबिक अयोध्या जी में मंदिर और प्रमुख तीर्थ स्थलों के 8 किलोमीटर के दायरे में किसी भी धर्मशाला या होटल बनाने की इजाजत नहीं होगी. इससे अयोध्या जी के मूल स्वरूप को बचाये रखा जा सकेगा. संघ परिवार के सूत्रों की माने 1 साल के भीतर मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा, यानी 2020 में राम मंदिर निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा.

विश्व हिंदू परिषद के सूत्रों के मुताबिक राम मंदिर निर्माण के लिए जरूरी पत्थरों को तराशने का काम लगातार चल रहा है 60 फ़ीसदी पत्थर तराशने का काम पूरा हो चुका है अब जब राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है तो पत्थर तराशने के काम को और भी तेज किया जा सकता है ऐसी सूरत में मंदिर निर्माण की शुरुआत की तिथि से अगले डेढ़ से 2 साल में भव्य मंदिर पूरी तरह से बन कर तैयार हो सकता है.

विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार के मुताबिक मंदिर निर्माण के लिए इकट्ठी की गई सामग्री मंदिर निर्माण में ही उपयोग में लाई जाएगी. संघ परिवार के सूत्रों के मुताबिक अगले साल यानी साल 2020 में, चार ऐसी तिथियां है जिन्हें मंदिर निर्माण शुरू करने के लिए शुभ तिथि के रूप में छाटा जा सकता है. ऐसी पहली शुभ तिथि फरवरी के तीसरे हफ्ते में है, जबकि दूसरी शुभ तिथि अप्रैल में रामनवमी के दिन है. लेकिन किस शुभ तिथि पर राम मंदिर निर्माण शुरू किया जाएगा सभी से सहमति के बाद तय किया जाएगा.

 
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