Parliament Monsoon Session: क्या है नियम 267 और 176 जिसपर सरकार और विपक्ष में घमासान? इन 4 वजह से संसद में नहीं बन पा रही बात
Manipur Violence: मणिपुर में सैकड़ों जिंदगियां खाक हो गई. हिंसा की आग में आशियाने स्वाहा हो गए. कुकी और मैतेई की हिंसा में सैकड़ों परिवार जल गए. उधर संसद में नियम 267 और नियम 176 पर संग्राम हो रहा है.

Parliament Monsoon Session 2023: मणिपुर में लोग अपनी बची हुई जिंदगी को समेटने में जुटे हैं तो दिल्ली में मणिपुर हिंसा पर संग्राम हो रहा है. संसद में मानसून सत्र के तीसरे दिन मणिपुर मुद्दे को लेकर जमकर हंगामा हुआ. विपक्षी पार्टियों के गठबंधन ने मणिपुर हिंसा पर संसद के दोनों सदनों में पीएम मोदी के बयान को लेकर प्रदर्शन किया.
मणिपुर पर तीन दिन से संसद में हंगामा हो रहा है. राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद संसद सिंह को पूरे मानसून सत्र के लिए सदन से सस्पेंड कर दिया गया. मणिपुर हिंसा पर सरकार सदन में अपना पक्ष रखने को तैयार है लेकिन मामला तकनीकी नुक्ते पर फंसा है.
क्या है नियम 267 और नियम 176?
सरकार बार-बार कह रही है कि वो बहस के लिए तैयार है लेकिन मामला बहस के नियम पर फंसा है. विपक्ष की मांग है कि नियम 267 के तहत चर्चा हो जिसके बाद वोटिंग का प्रावधान है. सरकार नियम 176 के तहत बहस चाहती है जिसके बाद वोटिंग नहीं होती है.
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने एक बयान में कहा, विपक्ष इसलिए सदन से चर्चा से भाग रही है क्योंकि उन्हें अपने राज्यों में हो रही महिलाओं के साथ घटनाओं पर बात सुनिश्चित करनी होगी. कांग्रेस पार्टी राजस्थान, छत्तीसगढ और बंगाल में महिला के साथ हुए घटना पर चर्चा नहीं करना चाहती है.
सरकार और विपक्ष में क्यों नहीं बन रही सहमति?
पेंच और भी हैं पहला विपक्ष सिर्फ मणिपुर पर चर्चा चाहता है जबकि सत्ता पक्ष पश्चिम बंगाल और राजस्थान पर भी चर्चा चाहता है. दूसरा विपक्ष चाहता है कि पीएम मणिपुर पर बयान दें, वहीं सरकार कह रही है कि गृह मंत्री अमित शाह बयान देंगे. तीसरा विपक्ष चाहता है कि संसद में बहस के लिए समय सीमा तय न हो वहीं सरकार सदन में 150 मिनट बहस के लिए तैयार है. चौथा विपक्ष बहस के बाद वोटिंग कराने की मांग कर रही है
वहीं सरकार बहस के बाद वोटिंग को तैयार नहीं है.
उधर मणिपुर में बीते 80 से ज्यादा दिनों से हिंसा जारी है. मणिपुर के कई इलाकों में अब भी छिटपुट हिंसा हो रही है. उस पर किसी का ध्यान नहीं है. देश के कई राज्यों में बाढ़ ने तबाही मचा रखी है. लोगों की सुध लेने वाला कोई नहीं है. संसद में बयान को लेकर हंगामा मचा है. कार्यवाही ठप है.
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Source: IOCL























