ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष ने 11 विधायकों को अयोग्य ठहराने की BJD और कांग्रेस की याचिका खारिज की
विधानसभा अध्यक्ष ने 1987 के दल-बदल नियमों के नियम 7(2) के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए इस याचिका को प्रारंभिक चरण में ही खारिज कर दिया.

ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल (BJD) और कांग्रेस की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया जिनमें 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग करने के आरोपी उनके 11 विधायकों को अयोग्य घोषित करने का अनुरोध किया गया था.
बीजद की मुख्य सचेतक प्रमिला मलिक ने अपनी पार्टी के आठ विधायकों को अयोग्य ठहराने की अपील की थी जबकि कांग्रेस विधायक दल के नेता रामचंद्र कदम ने अपनी पार्टी के तीन विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की याचिका दायर की थी.
बीजद की याचिकाओं का हवाला देते हुए ओडिशा विधानसभा सचिवालय ने 19 जून की अधिसूचना में कहा, 'यह याचिका संक्षिप्त, अस्पष्ट, बिना ठोस आधार के और कानूनी आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती है इसलिए इसे गुण-दोष के आधार पर विचार के लिए स्वीकार नहीं किया जा सकता...'
इसमें कहा गया, 'यह याचिका गंभीर त्रुटियों से ग्रस्त है या इसे कानूनी प्रावधानों की स्पष्ट अनभिज्ञता के साथ प्रस्तुत किया गया है और यह विचार योग्य नहीं हैं.' जांच के बाद, अध्यक्ष ने पाया कि विधायकों के खिलाफ पेश साक्ष्य संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 2(1)(ए) के तहत स्वेच्छा से त्यागपत्र देने या दल-बदल को प्रमाणित नहीं करते हैं.
बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने पत्रकारों से कहा कि याचिकाएं पूरी नहीं थीं और उनमें साक्ष्यों की कमी थी. उन्होंने कहा, 'यह निर्णय कानून के अनुसार लिया गया है.' बीजद ने आठ विधायकों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी-इनमें बालिगुड़ा से चक्रमणि कन्हर, बांकी से देवी रंजन त्रिपाठी, पटकुरा से अरविंद महापात्रा, चंपुआ से सनातन महाकुड, बस्ता से सुभासिनी जेना, जयदेव से नब किशोर मलिक और कटक-चौद्वार से सौविक बिस्वाल शामिल हैं.
कांग्रेस ने भी अपने विधायकों-बाराबती-कटक से सोफिया फिरदौस, सनाखेमुंडी से रमेश जेना और मोहना से दशरथ गमांग की अयोग्यता की मांग करते हुए याचिका दायर की थी. बीजद ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि विधायकों ने संविधान की दसवीं अनुसूची में शामिल दल-बदल विरोधी प्रावधानों का उल्लंघन किया है क्योंकि उन्होंने पार्टी के आधिकारिक रुख के खिलाफ कार्य किया.
बीजद ने यह भी दावा किया कि इन विधायकों ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया और चुनावों के दौरान आधिकारिक निर्देशों की अवहेलना की तथा उनके कार्यों को पार्टी विरोधी गतिविधियां बताते हुए दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता योग्य बताया.
विधानसभा अध्यक्ष ने 1987 के दल-बदल नियमों के नियम 7(2) के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए इस याचिका को प्रारंभिक चरण में ही खारिज कर दिया. कथित क्रॉस-वोटिंग की घटना 16 मार्च को ओडिशा से राज्यसभा की चार सीटों के चुनाव के दौरान हुई थी.
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बीजद ने कांग्रेस और माकपा के साथ समझौते के तहत एक सीट के लिए प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. दत्तेश्वर होता को संयुक्त उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा था. विपक्षी गठबंधन की 147 सदस्यीय विधानसभा में स्पष्ट संख्यात्मक बढ़त (उस समय बीजद के 50 विधायक, साथ ही कांग्रेस का समर्थन) होने के बावजूद, डॉ. होता भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे से पराजित हो गए. यह हार कथित तौर पर विपक्षी दलों के 11 विधायकों द्वारा क्रॉस-वोटिंग के कारण हुई बताई जाती है.















