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Xप्लेन: NASA का भारत को मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का न्योता, जानिए क्या होंगे फायदे

यह निमंत्रण पिछले सप्ताह बेंगलुरु स्थित भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ISRO के मुख्यालय में आयोजित अमेरिका-भारत नागरिक अंतरिक्ष संयुक्त कार्य समूह (CSJWG) की नौवीं बैठक के दौरान दिया गया.

NASA ने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) के पास एक स्थायी मून बेस बनाने (Moon Base) की अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया है. इससे भारत और अमेरिका के बीच गहरे अंतरिक्ष सहयोग को एक नया आयाम मिला है.

यह निमंत्रण पिछले सप्ताह बेंगलुरु स्थित भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ISRO के मुख्यालय में आयोजित अमेरिका-भारत नागरिक अंतरिक्ष संयुक्त कार्य समूह (CSJWG) की नौवीं बैठक के दौरान दिया गया. CSJWG की स्थापना 2005 में भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग को बढ़ावा देने, साझा चुनौतियों का समाधान करने और संयुक्त अंतरिक्ष अभियानों के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए की गई थी.

NASA के अधिकारियों ने 11 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा, "विज्ञान के क्षेत्र में हमारे सफल सहयोग को आगे बढ़ाते हुए NASA, ISRO की मून बेस कार्यक्रम में भागीदारी का स्वागत करता है. हम चंद्रमा पर लौट रहे हैं और अपने साझेदारों को भी साथ लेकर जा रहे हैं."

भारत में अमेरिकी दूतावास के अनुसार, मून बेस कार्यक्रम के निमंत्रण के अलावा दोनों देशों ने आर्टेमिस समझौते के तहत वैज्ञानिक डेटा साझा करने (Open Scientific Data Sharing) पर सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है.

क्या है आर्टेमिस समझौता?

आर्टेमिस समझौते (Artemis Accords) अमेरिका के नेतृत्व में बनाया गया एक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक ढांचा (Diplomatic Framework) है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा और उससे आगे के अंतरिक्ष की सुरक्षित, शांतिपूर्ण और जिम्मेदार खोज के लिए साझा सिद्धांत तय करना है.

भारत वर्ष 2023 में इसका 27वां हस्ताक्षरकर्ता बना था. अब इस समझौते से 70 देश जुड़ चुके हैं.

भारत की भूमिका क्या होगी?

फिलहाल आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मून बेस प्रोग्राम में भारत की भूमिका क्या होगी. हालांकि, बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ अंतरिक्ष अधिकारी मौजूद थे.

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ISRO के अध्यक्ष और डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस के सचिव वी. नारायणन ने किया, जबकि उद्घाटन सत्र को भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने संबोधित किया.


Xप्लेन: NASA का भारत को मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का न्योता, जानिए क्या होंगे फायदे

बैठक की सह-अध्यक्षता भारतीय पक्ष से यू.आर. राव सैटेलाइट सेंटर के निदेशक एम. शंकरन ने की. अमेरिकी पक्ष से वेस्ले ब्रूक्स (अमेरिकी विदेश विभाग) और कैथलीन कारिका (NASA की एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर, इंटरनेशनल एंड इंटरएजेंसी रिलेशंस) ने सह-अध्यक्षता की.

भारत को इससे क्या फायदा होगा?

इससे भारत को कई फायदे हो सकते हैं. आइए जानते हैं-


1. एडवांस्ड स्पेस टेक्नोलॉजी तक पहुंच

NASA के साथ साझेदारी से ISRO को लूनर हैबिटैट, लाइफ सपोर्ट सिस्टम, रोबोटिक्स और डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों तक पहुंच मिलेगी. इससे भारत अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं को तेज़ी से विकसित कर सकेगा.

2. मानव अंतरिक्ष मिशनों को मिलेगा बढ़ावा

यह सहयोग गगनयान मिशन, भविष्य के मानव चंद्र मिशन और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन जैसी परियोजनाओं को मजबूत करेगा. साथ ही भारत को मानव अंतरिक्ष उड़ानों का व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा.

3. लागत होगी कम, विकास होगा तेज़

चंद्रमा पर स्थायी बेस बनाना बेहद महंगा और तकनीकी रूप से जटिल है. अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के जरिए भारत को इंफ्रास्ट्रक्चर, विशेषज्ञता और लागत साझा करने का अवसर मिलेगा, जिससे विकास की गति बढ़ेगी.

4. वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में मजबूत होगी भारत की स्थिति

इस प्रोग्राम में शामिल होने से भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल होगा जो भविष्य की चंद्र खोज और मानव अंतरिक्ष अभियानों की दिशा तय कर रहे हैं. इससे भारत का वैज्ञानिक, तकनीकी और कूटनीतिक प्रभाव भी बढ़ेगा.


Xप्लेन: NASA का भारत को मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का न्योता, जानिए क्या होंगे फायदे

5. वैज्ञानिक और आर्थिक लाभ

इस परियोजना से नई वैज्ञानिक खोजों, अत्याधुनिक तकनीकों, हाई-टेक रोजगार और भारतीय उद्योगों व स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं. भविष्य के लूनर मिशनों में भारतीय कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ सकती है.

NASA और ISRO के बारे में जान लीजिए

NASA और ISRO दोनों ही अपने-अपने देशों की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियां हैं. NASA (National Aeronautics and Space Administration) अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी है, जिसकी स्थापना 1958 में हुई थी, जबकि ISRO (Indian Space Research Organisation) भारत की अंतरिक्ष एजेंसी है, जिसकी स्थापना 1969 में हुई. NASA चंद्रमा, मंगल, मानव अंतरिक्ष उड़ान और अंतरिक्ष विज्ञान के बड़े मिशनों पर काम करता है, जबकि ISRO उपग्रह, लॉन्च व्हीकल, चंद्र और मंगल मिशन के साथ-साथ मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम पर काम कर रहा है. NASA का बजट और वैश्विक स्तर का कार्यक्रम काफी बड़ा है, वहीं ISRO कम लागत में सफल और तकनीकी रूप से प्रभावी अंतरिक्ष मिशनों के लिए जाना जाता है. दोनों एजेंसियां कई परियोजनाओं में एक-दूसरे के साथ सहयोग भी करती हैं.

संकल्प ठाकुर पिछले 10 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत न्यूज़ 24 से की, इसके बाद न्यूज़ नेशन में कार्य किया. वर्तमान में वह एबीपी हिंदी डिजिटल में डिप्टी प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं और पिछले सात वर्षों से संस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. उन्हें खेल, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और चुनावी राजनीति से जुड़ी खबरों की गहरी समझ है. इसके अलावा साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता का क्षेत्र है. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है.

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