Mughal Emperor Akbar: कौन थीं शहजादी आराम बानू बेगम? क्यों अकबर छिड़कते थे अपनी जान, जानें हरम की तितली से जुड़ी कहानी
Mughal Emperor Akbar: मुगल बादशाह अकबर की सबसे छोटी बेटी आराम बानू बेगम को लोग हरम की तितली कहते थे. जानिए क्यों पड़ा यह नाम और कैसा था उनका स्वभाव.

मुगल इतिहास में जहां सम्राट अकबर की नीतियों, युद्धों और प्रशासनिक सुधारों का विस्तार से जानकारी मिलती है, वहीं उनकी सबसे छोटी बेटी शहजादी आराम बानू बेगम का जिक्र बहुत कम मिलता है. बावजूद इसके, वह अपनी चंचलता और जीवंत स्वभाव की वजह से इतिहास में हरम की तितली नाम से जानी जाती हैं.
आराम बानू बेगम, अकबर और उनकी पत्नी बीबी दौलत शाद की बेटी थी. अपनी सुंदरता, मुखर स्वभाव और बातों से सभी को मोहित करने वाली यह शहजादी हरम में सभी की चहेती थी. अकबर भी उन्हें बेहद प्यार करते थे और अकसर लाडली बेगम कहकर बुलाते थे.
क्यों कहा जाता था हरम की तितली?
शहजादी आराम बानू को हरम की तितली कहने के पीछे उनका स्वभाव था. वह हरम में हमेशा चंचलता से इधर-उधर घूमती रहती, सबसे बातें करती और माहौल को खुशनुमा बनाए रखती. इतिहासकारों का मानना है कि वह स्पष्टवादी और मुखर थी. गलत बातों का विरोध करने से भी पीछे नहीं हटती थी. कई बार तो वह अपने पिता अकबर से भी वाद-विवाद कर बैठती, लेकिन अकबर का स्नेह उस पर सबसे अधिक था. जहांगीरनामा और अकबरनामा जैसे ग्रंथों में आराम बानू का जिक्र कम ही मिलता है, लेकिन जो भी उल्लेख है, उसमें यह साफ झलकता है कि अकबर अपनी इस बेटी को बेहद चाहते थे.
अकबर का हरम और उसमें आराम बानू की जगह
कहा जाता है कि अकबर के हरम में करीब 5 हज़ार महिलाएं रहती थीं. इनमें उनकी पत्नियां, दासियां, बच्चे और अन्य महिला परिजन शामिल थे. हरम का मकसद केवल महिलाओं के लिए सुरक्षित और नियंत्रित जगह उपलब्ध कराना था. बाहरी दुनिया से उनका कोई सीधा संपर्क नहीं होता था. बच्चों की परवरिश भी हरम के भीतर ही होती थी. ऐसे माहौल में आराम बानू जैसी जीवंत और मुखर शख्सियत का होना हरम की महिलाओं और बच्चों के लिए उत्साह और सुकून का कारण था. हरम की महिलाएं उन्हें बहुत चाहती थीं. उनकी बातचीत और हंसी-मजाक से हरम का वातावरण हल्का-फुल्का और आनंदमय हो जाता था. यही कारण था कि उन्हें प्यार से हरम की तितली कहा जाने लगा.
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