ब्लूव्हेल के बाद मोमो गेम बना जानलेवा, CBSE ने सर्कुलर जारी कर स्कूलों को चेताया
बच्चे भी मान रहे हैं कि उनके अभिभावक और उनके टीचर्स उनकी काफी मदद कर रहे हैं. यह समझाने में कि इस तरह के ऑनलाइन गेम्स जानलेवा साबित हो सकते हैं और इनसे किस तरह से दूर रह जाए.

नई दिल्ली: पहले ब्लू व्हेल गेम और अब मोमो गेम. यह दोनों ही ऐसे खेल हैं जो लोगों के लिए खासतौर पर बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं. हाल ही में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां पर यह पाया गया है कि मोमो गेम के चलते कई लोगों ने और खासतौर पर बच्चों ने खुद को नुकसान पहुंचाया है. मोमो गेम्स की वजह से लगातार बढ़ते हादसों को देखते हुए अब सीबीएसई ने भी एक सर्कुलर जारी किया है.
सीबीएसई ने सर्कुलर में क्या कहा है?
सीबीएसई के सर्कुलर में स्कूलों और अभिभावकों को बताया गया है कि वह अपने बच्चों को लेकर खास ध्यान रखें. सीबीएसई की तरफ से जारी सर्कुलर के बाद अब स्कूल प्रशासन भी अपनी तरफ से बच्चों को जागरूक करने और उन पर खास निगरानी रखने के लिए अलग-अलग कार्यक्रम चला रहे हैं. इसका मकसद यही है कि कैसे भी हो बच्चों को इस तरह के खतरनाक खेलों से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा सके.
बच्चे भी हो रहे हैं सचेत
वहीं, बच्चे भी मान रहे हैं कि उनके अभिभावक और उनके टीचर्स उनकी काफी मदद कर रहे हैं. यह समझाने में कि इस तरह के ऑनलाइन गेम्स जानलेवा साबित हो सकते हैं और इनसे किस तरह से दूर रह जाए.
क्या अकेलापन है एक बड़ी वजह?
हालांकि मनोवैज्ञानिकों की माने तो ब्लूव्हेल और मोमो गेम के फैलने और जानलेवा होने की एक बड़ी वजह है अकेलापन. अकेलापन जो सब के आसपास होने के बावजूद लोगों और और खास तौर पर बच्चों को अपनी ओर खींचता है और जब लोगों और बच्चों को इस खेल के जरिए कुछ नई नई चीजें करने का प्रलोभन दिया जाता है. जिससे वो लोग इसके प्रति आकर्षित होते जाते हैं, बिना इस बात की परवाह किए हुए कि ये खेल जानलेवा भी साबित हो सकता है.
मनोचिकित्सक के मुताबिक, यह खेल कुछ उसी तरह से है जिस तरह से कुछ दिनों पहले दिल्ली के बुराड़ी में घटना सामने आई थी वहां पर भी बस एक खेल और एक अंधविश्वास के चलते ही 11 लोगों ने अपनी जान दे दी थी. वहां पर भी किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनकी इस हरकत से उनकी जान चली जाएगी और इस गेम को खेलने वालों के साथ भी ऐसा ही होता है. हालांकि मनो चिकित्सकों की मानें तो इस अकेलेपन और इस तरह के ऑनलाइन जानलेवा खेल से बचाने की पहल उन लोगों को ही करनी होगी जो लोग आसपास मौजूद हैं यानी कि टीचर्स और अभिभावक.
इस तरह के ऑनलाइन गेम पर रोक लगाना आसान नहीं
यह बात इस वजह से भी और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि साइबर सिक्योरिटी से जुड़े जानकारों के मुताबिक इस तरह के खेलों पर सीधे तौर पर कोई प्रतिबंध नहीं लग पाता. क्योंकि जो लोग इन खेलों को बढ़ाते हैं वह एक के बाद एक सरवर चेंज करते रहते हैं जिसकी वजह से इन पर रोक लगाना आसान नहीं है.
वीडियो देखें-
यह भी पढ़ें- राफेल विवाद: पहले कहा था 'चोर', अब राहुल ने इशारों-इशारों में मोदी को कहा 'कमांडर इन थीफ' घोटालों में फंसने के बाद बीजेपी को पाकिस्तान याद आता है: कांग्रेस मुजफ्फरपुर के पूर्व मेयर को अपराधियों ने गोलियों से भूना, कुशवाहा बोले- हे भगवान! ये क्या हो रहा है हिमाचल के 10 जिले बारिश की चपेट में, दिल्ली-NCR में भी तेज बारिश का अनुमान Source: IOCL



























