‘सब कुछ विस्तार से...’, SIR-परिसीमन पर PM मोदी को कल अपनी चिंताएं बताएंगे खरगे
अपने पत्र में खड़गे ने कहा कि 13 अगस्त को मानसून सत्र के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित (adjourned sine die) होने के बाद 64 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक किसी भी सदन का सत्रावसान नहीं किया गया है.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार (20 अक्टूबर 2026) को कहा कि वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर अपनी चिंताएं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने रखेंगे. उन्होंने कहा कि वह आज नहीं, बल्कि 21 अक्टूबर को विस्तार से इस बारे में बताएंगे.
खरगे ने कहा कि “मैं आज राजनीति के बारे में बात नहीं करना चाहता. मैंने प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से एक पत्र लिखा है, और उनके पास मेरी तरफ से दो पत्र पहुंच चुके हैं.” उन्होंने कहा कि “मैं कल उन्हें सब कुछ विस्तार से बताऊंगा. इसमें मतदाता सूचियों के SIR से होने वाले नुकसान, उनके द्वारा की जा रही परिसीमन प्रक्रिया के परिणाम, और महिलाओं के लिए आरक्षण का मुद्दा शामिल है. वे इसे लागू क्यों नहीं कर रहे हैं? मैं कल उन्हें इन सारी बातों के बारे में बताऊंगा.”
खरगे की यह टिप्पणी तब आई, जब पत्रकारों ने उनसे केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के पत्र पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी. रिजिजू ने उन्हें यह पत्र, उनके 16 अक्टूबर के उस पत्र के जवाब में लिखा था, जिसमें उन्होंने संसद में प्रस्तावित ‘परिसीमन संवैधानिक संशोधन’ पर चर्चा से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट किए गए अपने पत्र में, रिजिजू ने कहा कि सरकार ने मार्च और अप्रैल में लिखित संदेशों के जरिए, तथा खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ बातचीत के जरिए, प्रस्तावित कानून पर कांग्रेस से बार-बार सहयोग मांगा था.
मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि बार-बार आग्रह करने के बावजूद कांग्रेस ने चर्चा के लिए तारीखें नहीं दीं, जिसके कारण सरकार को द्रमुक (DMK), समाजवादी पार्टी (SP), वाईएसआरसीपी (YRSCP), राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (NCP), शिवसेना (UBT), एआईएमआईएम (AIMIM) और बीजद (BJD) समेत अन्य दलों से सलाह-मशविरा करना पड़ा. उन्होंने कांग्रेस से रचनात्मक सहयोग करने और महत्वपूर्ण कानूनों की राह में अड़चन न डालने का आग्रह किया.
इससे पहले खड़गे ने मोदी को पत्र लिखकर मानसून सत्र को सत्रावसान (proroguing) करने में हुई "अभूतपूर्व" देरी की ओर ध्यान दिलाया था. उन्होंने परिसीमन (delimitation) के नए प्रस्तावों पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की भी मांग की. साथ ही, उन्होंने संसद में एक "दूरगामी संवैधानिक संशोधन विधेयक" को जल्दबाजी में पारित कराने की कोशिशों के खिलाफ भी आगाह किया.
सरकार के पिछले विधायी प्रयासों का जिक्र करते हुए खड़गे ने कहा कि 14 अप्रैल की देर शाम विधेयक सार्वजनिक किए गए थे, और उसके तुरंत बाद 16 अप्रैल को एक विशेष सत्र बुलाया गया. परिसीमन से जुड़ा संवैधानिक संशोधन विधेयक 17 अप्रैल को लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका.






















