झारखंड: आंगनबाड़ी कर्मचारियों को सरकार का अल्टीमेटम, धरना खत्म नहीं किया तो नौकरी से निकाल देंगे
राज्य सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है. इसमें कहा गया है कि अगर एक हफ्ते के अंदर आंगनबाड़ी कर्मचारी अपना धरना खत्म नहीं करते हैं तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा.

रांची: झारखंड में कुल 38432 आंगनबाड़ी केंद्र हैं. इनमें कर्मचारियों की कुल संख्या 76864 यानी 80 हजार से थोड़ा कम है. पिछले 16 अगस्त ये कर्मी अपनी कुछ मांगों को लेकर झारखंड की राजधानी रांची में मुख्यमंत्री आवास से कुछ कदमों की दूरी पर धरना दे रहे हैं. लेकिन 18 सितंबर 2019 को एक सरकारी आदेश जारी किया गया जिसमें कहा गया कि अगर एक हफ्ते के अंदर धरना खत्म कर ये कर्मी वापस नहीं लौटे तो इन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा.
झारखंड में आंगनबाड़ी कर्मियों को केंद्र और राज्य सरकार को मिलाकर कुल 5900 रुपये मानदेय के तौर पर मिलता है. वहीं अगर आंगनबाड़ी सहायिकाओं को 2950 रुपये मानदेय के तौर पर मिलते हैं. आंगनबाड़ी कर्मियों की मानें तो सरकार बनने से पहले रघुवर सरकार ने वादा किया था कि इन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा देकर मानदेय बढ़ाने के बारे में सोचा जाएगा. लेकिन सरकार के 5 साल बीत जाने के बाद राज्य में एकबार फिर से नई सरकार के लिए चुनाव होने वाले हैं बावजूद इसके अभी तक मानदेय बढ़ाने की मांग नहीं पूरी की गई है. इसी बात को लेकर पिछले 16 अगस्त से धरना और सात दिन से भूख हड़ताल पर ये आंगनबाड़ी कर्मी बैठे हैं.

ऐसा नहीं है कि सरकार की तरफ से इनकी किसी भी मांग को माना नहीं गया है. जैसे उम्र की सीमा 60 से बढ़ाकर 62 कर दी गई है. साथ ही इंश्योरेंस देने के लिए भी सरकार ने बात की है लेकिन सबसे मुख्य मांग मानदेय बढ़ोतरी को लेकर है जिसे नजरअंदाज किया जा रहा है.
दरअसल आंगनबाड़ी का मुद्दा कोई नया नहीं है लेकिन सरकार के इस आदेश से जिसमें एक हफ्ते के अंदर काम पर लौटे नहीं तो नौकरी से निकाल दिया जाएगा, इस वजह से विवाद खड़ा हो रहा है. क्योंकि चुनाव से ठीक पहले 80 हजार के करीब आंगनबाड़ी कर्मियों को नाराज करना शायद सरकार के लिए गलत साबित हो.
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Source: IOCL






















