'आगरा में भी ऐसा वाकिया हुआ, मुसलमान पूछकर कत्ल कर दिया', पहलगाम हमले पर जामा मस्जिद के इमाम अहमद बुखारी का दावा
इमाम सैयद अहमद बुखारी ने कहा कि मजहबी शिनाख्त के आधार पर जिस तरह बेगुनाहों की हत्या की गई, उसकी हर मुसलमान को निंदा करनी चाहिए.

जामा मस्जिद के इमाम सैयद अहमद बुखारी ने दावा किया है कि हिंदुस्तान के कई शहरों में ऐसे वाकिए हुए जहां धर्म पूछकर मुसलमानों का कत्ल कर दिया गया. उन्होंने शुक्रवार (2 अप्रैल, 2025) को पहलगाम हमले की निंदा करते हुए यह बात कही है. इमाम ने कहा कि पहलगाम में मजहबी शिनाख्त जानने के लिए लोगों को नंगा किया गया और ये पता चलने पर कि वो हिंदू हैं, ऐसे मासूम और निहत्थे लोगों को निशाना बनाकर अलग किया गया.
सैयद अहमद बुखारी ने कहा कि ये दीन ए इस्लाम की न तालीम, न तारीख और ना तहजीब है. उन्होंने कहा कि अगर हम भूतकाल पर गौर करें तो ट्रेन में हमारे साथ भी इस तरह का वाकया हुआ है. हिंदुस्तान के शहरों पर अगर हम निगाह डालें तो वहां भी इस तरह के वाकियात हुए. उन्होंने कहा, 'मैं अगर कल की बात करूं तो आगरा में भी इस तरह का वाकिया हुआ, जहां लोगों से मुसलमान हो पूछकर उनका कत्ल किया गया. अगर ये सिलसिला यूं ही चल पड़ा तो कहां जाकर रुकेगा, नहीं कहा जा सकता.'
'पाकिस्तान की वजह से बदनाम हो रहे भारत के मुसलमान', बोले इमाम
इमाम ने जुमे की नमाज के बाद तकरीर में कहा कि पहलगाम में मजहबी शिनाख्त के आधार पर जिस तरह बेगुनाहों की हत्या की गई, उसकी हर मुसलमान को निंदा करनी चाहिए. इस्लाम निर्दोष की जान लेने की इजाजत नहीं देता है. उन्होंने कहा कि हमले के बाद सरकार ने जो भी कदम उठाए हैं हम उसका समर्थन करते हैं. पाकिस्तान को सख्त सबक सिखाने का समय आ गया है. पाकिस्तान दहशतगर्दों को भारत भेजता है, जिसकी वजह से भारतीय मुसलमान बदनाम होते हैं.
'हर हिंदू और मुसलमान देश के हालातों से परेशान है', बोले अहमद बुखारी
इमाम अहमद बुखारी ने कहा कि दहशतगर्दी किसी मसले का हल नहीं है. हिंदू-मुसलमान, हिंदू-मुसलमान, सालों हो गए ये सुनते हुए. ये वक्त इसका नहीं बल्कि मुल्क की आबरू और इज्जत ए नफ्स के लिए एक मजबूत चट्टान की तरह खड़े रहने का है. देश का मुसलमान मुल्क की सलामती के लिए हमेशा आगे रहा है और रहेगा.
इमाम अहमद बुखारी ने कहा कि हिंदुस्तान में आज जो हो रहा है, इस वक्त हर शहरी, वो हिंदू हो या मुसलमान, इन हालात से बेहद परेशान है. उन्होंने कहा कि कभी-कभी सोचता हूं कि इंसान और इंसानियत किस तरफ जा रही है.
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