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गलवान घाटी जिसकी रक्षा करते हुए शहीद हो गए 20 भारतीय जवान, जानें इसका सामरिक महत्व

गलवान घाटी में करीब 50 साल बाद भारत और चीनी सेना के बीच खूनी संघर्ष हुआ. सामारिक रूप से अहम इस क्षेत्र पर भारत का अधिकार रहा है लेकिन चीन इस पर अपनी नजरें जमाए बैठा है.

नई दिल्लीः भारत और चीन की सेनाओं के बीच जिस गलवान घाटी में  50 साल बाद खूनी संघर्ष हुआ उसका बेहद सामरिक महत्व है. इसीलिए चीनी सेना इस इलाके पर अपना कब्जा जमाना चाहती है. क्योंकि ये घाटी अक्साई-चिन से सटी हुई है और पूर्वी लद्दाख से अक्साई चिन पहुंचने के लिए सबसे करीब का रास्ता है. लेकिन चीन के लिए पूर्वी लद्दाख पहुंचने के लिए ये एक चोर रास्ता भी है.

चीन अगर यहां कब्जा करता है तो वो युद्ध कि स्थिति में भारतीय सेना की डीबीओ सप्लाई लाइन काट सकता है. क्योंकि भारत ने जो 255 किलोमीटर लंबी दुरबुक-श्योक-डीबीओ रोड बनाई है वो गलवान घाटी के करीब से होकर गुजरती है. गलवान घाटी करीब 12-13 हजार फीट की उंचाई पर है. यहां के उंचे उंचे पहाड़ों पर अगर चीनी सैनिक आकर जम गए तो भारत के लिए करगिल युद्ध जैसी परिस्थिति पैदा हो सकती है. क्योंकि, यहां की ऊंची पहाड़ियों से फायरिंग और गोलाबारी कर चीनी सेना भारतीय सेना की सप्लाई लाइन को डीबीओ जाने के लिए रोक सकती है. इसीलिए चीनी सेना इस इलाकों को कब्जा करना चाहती है.

1962 के युद्ध के दौरान भारत और चीन के बीच पहली झड़प इसी सब-सेक्टर नॉर्थ में शुरू हुई थी. लेकिन ये इलाका भारत के अधिकार-क्षेत्र में रहा है. जबकि चीन इसे अक्साई-चिन का इलाका मानता है जिसे उसने '62 के युद्ध में हथिया लिया था.

मई महीने के शुरुआत से ही गलवान घाटी में बना हुआ था तनाव ताजा विवाद के दौरान मई महीने के शुरुआत से ही गलवान घाटी में तनाव बना हुआ था. टकराव की शुरुआत तब हुई जब भारतीय सेना ने गलवान नदी पर एक पुल बनाने की कोशिश की ताकि पेट्रोलिंग के दौरान नदी पार करने में आसानी हो.  लेकिन चीनी सेना ने इसका विरोध किया तो विवाद खड़ा हो गया. उस वक्त भी दोनों देशों के सैनिकों के बीच मामूली मारपीट हुई थी. किसी तरह से मामला शांत हो गया था लेकिन दोनों देशों के बीच यहां फेसऑफ शुरू हो गया. यानी दोनों तरफ के सैनिक आमने-सामने आ गए.

चीनी सेना ने गलवान घाटी में अपने 80 तंबू गाड़ लिए. जवाबी कार्रवाई करते हुए भारतीय सैनिकों ने भी अपना कैंप 500-600 मीटर की दूरी पर गाड़ लिया. गलवान घाटी में चार मुख्य पेट्रोलिंग-प्वाइंट थे जहां विवाद ज्यादा था. पीपी 14,15,17 और 19. यहां दोनों देशों के सैनिक टकराव की स्थिति में थे.

6 जून की मीटिंग में भारत और चीन के कोर कमांडर्स (लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के अधिकारी) इस बात के लिए राजी हो गए थे कि गलवान घाटी की पेट्रोलिंग पॉइंट (पीपी) नंबर 14, 15 और 17 पर दोनों देश के सैनिक डिसइंगेज हो जाएंगे. लेकिन इसके लिए दोनों देशों के फील्ड कमांडर्स को बैठक करनी होगी. इसके मद्देनजर सोमवार को पीपी 14 और 17 नंबर पर दोनों देशों के फील्ड कमांडर्स की फ्लैग-मीटिंग हुई. पीपी 14 पर भारतीय सेना का नेतृव किया बिहार रेजीमेंट की 16वीं बटालियन (16 बिहार) के कमांडिंग ऑफिसर, कर्नल बी संतोष बाबू ने. 17 नंबर पेट्रोलिंग पॉइंट पर भारत की तरफ से एक ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारी ने फ्लैग-मीटिंग में हिस्सा लिया. चीन की तरफ से एक सीनियर कर्नल ने हिस्सा लिया.

चीनी सैनिकों ने घात लगाकर भारतीय सैनिकों को घेरा जानकारी के मुताबिक, सोमवार को पीपी 14 पर एक लंबी बैठक चली. बैठक के बाद निर्णय लिया गया कि दोनों देशों के सैनिक कम से कम ढाई से तीन किलोमीटर पीछे चले जाएंगे. लेकिन रात के बाद भारतीय सेना की एक छोटी पेट्रोलिंग पार्टी आश्वस्त होने के लिए उस जगह गई जहां चीनी सेना के मौजूद होने की संभावना थी. क्योंकि मीटिंग में जिस चीज के लिए राजी हुए थे वो चीनी सेना मानती है या नहीं, ये देखने के लिए गई थी. जानकारी के मुताबिक, जैसे ही ये सैनिक उस ऊंची पहाड़ी पर पहुंचें जहां चीनी सैनिक होने की संभावना थी, चीनी सैनिकों ने घात लगाकर भारत की इस पेट्रोलिंग पार्टी को घेर लिया और मारपीट शुरू कर दी. माना जा रहा है कि शुरुआत में चीनी सैनिकों की तादाद भारतीयों से ज्यादा थी.

जैसे ही कर्नल संतोष बाबू और बाकी सैनिकों को इस झड़प की जानकारी मिली वे तुरंत झड़प वाली जगह पहुंच गए. क्योंकि दोनों देशों के बड़े सैन्य कमांडर पहले ही इस बात पर राजी हो चुके थे कि विवादित इलाकों में सैनिक बिना हथियारों के रहेंगे, इसलिए ना तो कर्नल संतोष और ना ही उनकी बाकी पलटन के पास कोई हथियार था. वहां पहुंचते ही चीनी सैनिकों ने धक्का-मुक्की करना शुरू कर दिया. विवाद इतना बढ़ा कि दोनों तरफ के सैनिकों ने लाठी-डंडे, रोड पर लगी कटीली तार और पत्थरों से एक दूसरे पर हमला बोल दिया. ऐसा लगता है चीनी सैनिक पूरी तैयारी के साथ वहां आए थे. उन्होंने एंटी-रॉउटे्स गियर पहन रखा था ताकि लाठी-डंडे का कोई खास असर ना हो.

दोनों तरफ के सैनिकों ने एक-दूसरे को पहाड़ से नीचे फेंका ये झड़प एक पहाड़ी पर हो रही थी इसलिए दोनों तरफ के सैनिकों ने एक दूसरे को पहाड़ से नीचे फेंकना शुरू कर दिया. पहाड़ से नीचे गलवान नदी बह रही थी. उस वक्त गलवान नदी का पानी बर्फ के समान था क्योंकि यहां पर इस मौसम में भी रात के वक्त तापमान शून्य से भी नीचे चला जाता है. बड़ी तादाद में दोनों तरफ के सैनिक नदी में आकर गिरे और बुरी तरह घायल हो गए. कुछ अपुष्ट खबरों के मुताबिक, जिस पहाड़ी पर झड़प हुई वो सैनिकों के भार से टूट कर नदी में आ गिरी जिसके कारण इतनी बड़ी संख्या में दोनों तरफ के सैनिक हताहत हुए.

भारतीय सेना ने भी अपने बयान में ‘हाई-ऑल्टिट्यूड’ इलाके और ‘सब-ज़ीरो’ तापमान यानि शून्य से भी नीचे तापमान का जिक्र किया है. सेना के आधिकारिक सूत्रों ने झड़प के दौरान किसी भी तरह से कोई फायरिंग से भी इंकार किया है. क्योंकि सैनिकों के पास किसी भी तरह का हथियार नहीं था.

लेकिन भारतीय सेना ने बुधवार को उन मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि चीनी सैनिकों ने भारतीय‌ सैनिकों के साथ बर्बरतापूर्ण कारवाई की ‌या उनके शरीर को क्षत-विक्षत करने की कोशिश की.

भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच फोन पर हुई बातचीत, तनाव कम करने के लिए हुए रजामंद 

नीरज राजपूत वॉर, डिफेंस और सिक्योरिटी से जुड़े मामले देखते हैं. पिछले 20 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं और प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया का अनुभव है. एबीपी न्यूज के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अनकट के 'फाइनल-असॉल्ट' कार्यक्रम के प्रेजेंटर भी हैं.
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