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छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री रहे अजीत जोगी का निधन, पीएम मोदी ने जताया दुख

अजीत जोगी लंबे समय से रायपुर के नारायणा अस्पताल में भर्ती थे. हार्ट अटैक के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था. वो 74 वर्ष के थे.

रायपुर: छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री रहे अजीत जोगी का निधन हो गया. वो रायपुर के श्री नारायणा अस्पताल में भर्ती थे, उनकी तबीयत में कोई सुधार नहीं आ रहा था. चिकित्सक उनके मस्तिष्क को क्रियाशील करने के लिए उनके पसंदीदा गाने उन्हें सुनवा रहे थे. अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉक्टर सुनील खेमका ने बताया था कि जोगी (74 वर्ष) की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई थी. उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था.

अजीत जोगी के निधन पर छत्तीसगढ़ सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है. इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा. कोई भी शासकीय समारोह आयोजित नहीं होंगे. स्व. अजीत जोगी का राजकीय सम्मान के साथ 30 मई को गौरेला में अंतिम संस्कार किया जाएगा.

पीएम मोदी ने जताया दुख

अजीत जोगी के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुख जताया है. उन्होंने कहा, ''श्री अजीत जोगी जी को जनसेवा का शौक था. इस जुनून में उन्हें नौकरशाह और एक राजनीतिक नेता के रूप में कड़ी मेहनत की. वह गरीबों, विशेषकर आदिवासी समुदायों के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रयासरत रहे. मैं उनके निधन से दुखी हूं. उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदना.''

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने किया ट्वीट मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अजीत जोगी के निधन पर दुख जताया है. उन्होंने ट्वीट किया कि छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी जी के निधन से दुखी हूं. मैं उनके चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं. मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिवार के साथ हैं. ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दें और इस कठिन घड़ी में उनके परिजनों को संबल प्रदान करें.

बेटे ने पिता के निधन के बारे में बताया. उन्होंने कहा, ''20 वर्षीय युवा छत्तीसगढ़ राज्य के सिर से आज उसके पिता का साया उठ गया. केवल मैंने ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ ने नेता नहीं,अपना पिता खोया है.माननीय अजीत जोगी जी ढाई करोड़ लोगों के अपने परिवार को छोड़ कर,ईश्वर के पास चले गए.गांव-गरीब का सहारा,छत्तीसगढ़ का दुलारा,हमसे बहुत दूर चला गया.''

अजीत जोगी के बारे में जानें

अजीत जोगी कलेक्टरी छोड़ राजनीति में आए थे. इंदौर का कलेक्टर रहते उनकी कठोर प्रशासक छवि को देखते हुए राजीव गांधी ने राजनीति में आने का मौका दिया. कांग्रेस की मदद से संसद का हिस्सा बनने पर उनकी पहचान तेज तर्रार नेता के तौर पर होने लगी. राजीव गांधी को वीपी सिंह के हमले से बचाने के लिए उनकी गिनती हल्ला बोल टीम में होती थी.

अजीत जोगी का परिचय जन्म तिथि- 29 Apr 1946 जन्म स्थान- बीलासपुर छत्तीसगढ़ इतिहास- साधारण परिवार में जन्मे अजीत जोगी बचपन से ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे, पढ़ाई-लिखाई में अव्वल जोगी को गुदड़ी का लाल भी कहा जाता था. * 1968 में उन्होंने स्वर्ण पदक के साथ मौलाना आजाद कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, भोपाल से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की. कॉलेज के दिनों में जोगी अपने विभाग में छात्र संघ के अध्यक्ष भी चुने जा चुके हैं. * 1967 में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज, रायपुर (छत्तीसगढ़) में एक व्याख्याता (1967-68) के रूप में भी काम किया. * 1974 में अजीत जोगी भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए चुने गए. * 1974 से 1986 तक मध्य प्रदेश के सिधी, शाहडोल, रायपुर और इंदौर जिलों में 12 वर्षों से जोगी जी ने सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट का रिकॉर्ड स्थापित किया.

राजनीतिक घटनाक्रम 1986 में अजीत जोगी ने अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के सदस्य बनकर राजनीतिक कॅरियर की शुरूआत की. इसके बाद कांग्रेस ने इन्हें राज्यसभा में नामित किया. * 1987 में अजीत जोगी को जनरल-सेक्रेटरी, प्रदेश कांग्रेस कमेटी, मध्य प्रदेश के रूप में भी नियुक्त किया गया था. इतना ही नहीं इसके अलावा इन्हें लोक उपक्रमों की समिति, उद्योग समिति, रेलवे, अध्यक्ष, राज्य अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जनजाति (मध्य प्रदेश) समिति का हिस्सा बनाया गया. * 1989 में मणीपुर राज्य के लोकसभा चुनावों के दौरान जोगी को कांग्रेस ने केंद्रीय पर्यवेक्षक का काम सौपा. जोगी ने मध्यप्रदेश के 1500 किमी के जनजातियों वाले इलाके में काम कर उनके बीच जनजागृति फैलाई और उन्हें कांग्रेस पार्टी के समर्थन में जूटा लिया. * 1995 में जोगी को विज्ञान और प्रौद्योगिकी समिति और पर्यावरण व वन पर बनी कमेटी के अध्यक्ष का भी भार सौंपा गया. * 1995 सिक्किम विधानसभा चुनावों के दौरान जोगी ने कांग्रेस पार्टी के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में काम किया. * 1996 में कोर समूह और संसदीय चुनाव (लोकसभा) के बाद में जोगी संसद में कार्यकारी समिति के सदस्य बन गए. * 1997 में इन्हें दिल्ली राज्य कांग्रेस कमेटी चुनावों के पर्यवेक्षक के तौर पर नियुक्त किया गया था. इसके अलावा परिवहन और पर्यटन समिति, ग्रामीण व शहरी विकास सदस्य समिति, परामर्श समिति, कोयला मंत्रालय, लोक लेखा समिति, अप्रत्यक्ष कर पर ऊर्जा, संयोजक, उप-समिति के सलाहकार समिति का सदस्य चुना गया. इतना ही नही जोगी राज्य सभा के उपाध्यक्ष के पैनल में सदस्य भी बन चुके है. इसी बीच उन्होंने 1997 से 1999 तक मुख्य प्रवक्ता, कांग्रेस संसदीय दल के साथ-साथ एआईसीसी के मुख्य प्रवक्ता के रूप में काम किया. * 1998 में जोगी छत्तीसगढ़ के रायगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से 12 वीं लोक सभा के लिए चुने जा चुके है. * 1999 में इन्होंने छत्तीसगढ़ के अलग राज्य के लिए जागरूकता फैलाने के लिए दंतेवाड़ा के मां दांतेश्वरी मंदिर से अंबिकापुर के महामाया मंदिर तक जात्रा का नेतृत्व किया. * नवंबर 2000 को नवीन्तम राज्य छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री के रूप में इन्होंने शपथ ली थी. इन्होंने 2003 में छत्तीसगढ़ में विकास यात्रा का भी नेतृत्व किया. * 2004 में 14 वीं लोकसभा में महासामुंड, छत्तीसगढ़ के लिए सांसद के रूप में चुने गए. * 2008 में छत्तीसगढ़ की विधान सभा के सदस्य के रूप में जोगी चुने गए, यह मारवाही निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे. * 2009 में लोकसभा चुनावों में चुने जाने के बाद जोगी ने लोकसभा सदस्य छत्तीसगढ़ के महासमुंद निर्वाचन क्षेत्र के रूप में काम किया. * 2014 में महासमुंद लोकसभा चुनावों में अपनी सीट बरकरार रखने में असफल रहे और बीजेपी के चंदू लाल साहू से 133 मतों से हार गए. * जून 2016 में, अजीत जोगी ने छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस नामक एक नए राजनीतिक संगठन की स्थापना की. * 2018 में अजीत जोगी ने घोषणा की वह राजनंदगांव और मारवाही सीटों से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. इसका मतलब है कि वह सीधे डॉ. रमन सिंह को चुनौती देंगे मगर वे मरवाही से चुनाव लड़े और निर्वाचित हो कर विधानसभा के सदस्य बने.

09 मई को दोपहर 12:10 बजे हार्ट अटैक के बाद रायपुर के नारायणा आसप्ताल में भर्ती कराया गया था, 29 मई 20 दिनों बाद दोपहर 3:30 निधन हो गया.

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