चुनाव आयोग में जिम्मेदारियों का नया बंटवारा, सीमा खन्ना अब पवन शर्मा के जरिए भेजेंगी फाइलें
चुनाव आयोग ने आईटी विभाग की महानिदेशक सीमा खन्ना के लिए नया कार्य आवंटन आदेश जारी किया है. इसके तहत वह अपने अधीनस्थ विभागों की फाइलें वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त पवन कुमार शर्मा के माध्यम से भेजेंगी.

चुनाव आयोग में आंतरिक कामकाज और अधिकारियों की जिम्मेदारियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच आयोग ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग के कामकाज से जुड़ा नया आदेश जारी किया है. इसके तहत आईटी विभाग की महानिदेशक सीमा खन्ना अपने अधीन आने वाले विभागों की फाइलें वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त पवन कुमार शर्मा के माध्यम से भेजेंगी. चार नवंबर को जारी कार्य आवंटन आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है. इसके साथ ही 23 सितंबर 2025 को जारी पुराने कार्यालय आदेश में आंशिक बदलाव किया गया है.
चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने एनडीटीवी को बताया कि कार्य आवंटन से जुड़े आदेश आयोग के सर्वसम्मत फैसलों के आधार पर जारी किए गए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि महानिदेशक (आईटी) की रिपोर्टिंग व्यवस्था में पदानुक्रम के स्तर पर कोई बदलाव नहीं हुआ है. अधिकारी के मुताबिक, सीमा खन्ना पहले भी उप चुनाव आयुक्त स्तर के अधिकारी को रिपोर्ट करती रही हैं.
आपत्ति के बाद विवाद में आया था आदेश
यह नया आदेश चुनाव आयोग में आंतरिक कार्य आवंटन को लेकर चल रहे विवाद के बीच आया है. इससे पहले जारी एक कार्यालय आदेश पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा आयोग के दो अन्य सदस्यों, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने आपत्ति जताई थी. इस मामले में चुनाव आयोग ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा था कि आंतरिक कामकाज 23 सितंबर 2025 के पुराने कार्यालय आदेश में तय व्यवस्था के अनुसार ही चल रहा है.
हलफनामे में आयोग ने बताया कि 28 जुलाई 2026 को जारी कार्यालय आदेश चुनाव आयोग में प्रतिनियुक्ति पर तैनात अतिरिक्त सचिव स्तर के एक आईएएस अधिकारी ने जारी किया था. इस आदेश को कभी लागू नहीं किया गया. हलफनामे के अनुसार, अगले दिन यानी 29 जुलाई को दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस आदेश को लेकर कैबिनेट सचिव को अलग-अलग पत्र लिखे थे. इसके बाद 30 जुलाई 2026 को दोनों चुनाव आयुक्तों के संयुक्त निर्देश के चलते 28 जुलाई का आदेश लागू नहीं किया गया.
आईटी विभाग की निगरानी कभी नहीं हटाई गई
सितंबर में इंडियन एक्सप्रेस ने दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से जुड़ी खबर प्रकाशित की थी. इसके बाद चुनाव आयोग ने प्रेस नोट जारी कर अपना पक्ष रखा था. आयोग ने कहा था कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग या आईटी विभाग की किसी नीतिगत विषय से संबंधित नहीं था, बल्कि चुनाव आयोग में प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज को लेकर था.
प्रेस नोट में यह भी कहा गया था कि संबंधित अधिकारी की ओर से जारी किए गए कार्य पुनर्वितरण के आदेश दोनों चुनाव आयुक्तों के निर्देश के बाद लागू नहीं किए गए थे. आईटी विभाग की निगरानी भी उप चुनाव आयुक्त से कभी नहीं हटाई गई थी.
एसआईआर से छूटे मतदाताओं के लिए विशेष पुनरीक्षण
इस बीच, गुरुवार को चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान छूट गए लोगों और पहली बार मतदान के योग्य हुए युवाओं को सूची में शामिल करने के लिए विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) की घोषणा की. इसके तहत मतदाता सूची का मसौदा 30 नवंबर को प्रकाशित किया जाएगा. इस पर दावे और आपत्तियां 12 दिसंबर तक दर्ज कराई जा सकेंगी. इनका निस्तारण 16 जनवरी 2027 तक किया जाएगा, जबकि अंतिम मतदाता सूची 21 जनवरी 2027 को जारी होगी.
पहले भी सवालों के घेरे में आई थी सीमा खन्ना
पिछले साल से देशभर में चल रहा एसआईआर राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ है. विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं. पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई विपक्षी नेताओं ने इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने के आरोपों में सीमा खन्ना का नाम भी लिया था. चुनाव आयोग के प्रेस नोट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को एसआईआर प्रक्रिया को बरकरार रखा था.
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