पूर्व नेवी चीफ एडमिरल अरुण प्रकाश को SIR का नोटिस, वीर चक्र विजेता से पहचान साबित करने को कहा गया
SIR Notice to Former Navy Chief: रिटायरमेंट के बाद से एडमिरल अरुण प्रकाश गोवा में रह रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि SIR के फॉर्म जरूरी जानकारी नहीं ले पा रहे हैं, तो उनमें बदलाव किया जाना चाहिए.

निर्वाचन आयोग (ECI) ने भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश (सेवानिवृत्त) को नोटिस जारी कर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत अपनी पहचान साबित करने के लिए बैठक में आने को कहा है. इस नोटिस के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे हैं और इस प्रक्रिया पर चर्चा तेज हो गई है.
गोवा में रहते हैं एडमिरल अरुण प्रकाश
रिटायरमेंट के बाद से एडमिरल अरुण प्रकाश गोवा में रह रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि SIR के फॉर्म जरूरी जानकारी नहीं ले पा रहे हैं, तो उनमें बदलाव किया जाना चाहिए. वहीं, निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2002 में अपडेट हुई अंतिम मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज नहीं है, इसलिए उन्हें ‘अनमैप’ श्रेणी में रखा गया है.
‘अनमैप’ श्रेणी में क्यों आए एडमिरल
दक्षिण गोवा की जिला निर्वाचन अधिकारी एग्ना क्लीटस ने बताया कि ऐसे कई मामलों में यही स्थिति सामने आ रही है. उन्होंने कहा कि एडमिरल प्रकाश का मामला भी ‘अनमैप’ कैटेगरी का है. उन्होंने यह भी कहा कि सोमवार को उनके फॉर्म की जांच की जाएगी और संबंधित अधिकारी उनसे संपर्क करेंगे.
सोशल मीडिया पर उठे सवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कई लोगों ने सवाल किया कि जब एडमिरल प्रकाश का पेंशन भुगतान आदेश (PPO) और जीवन प्रमाणपत्र पहले से ही सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद हैं, तो SIR टीम को और कौन से दस्तावेज चाहिए.
1971 युद्ध के नायक हैं एडमिरल प्रकाश
एडमिरल अरुण प्रकाश को भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 में अहम भूमिका निभाने के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया था. उन्हें SIR के तहत जारी ‘सुनवाई नोटिस’ में निर्वाचन अधिकारी के सामने उपस्थित होकर अपनी पहचान साबित करने को कहा गया है.
नोटिस पर एडमिरल प्रकाश की प्रतिक्रिया
ऑनलाइन चर्चा के बाद एडमिरल प्रकाश ने ‘एक्स’ पर लिखा कि उन्हें किसी खास सुविधा की जरूरत नहीं है और न ही उन्होंने कभी ऐसी मांग की है. उन्होंने कहा कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने समय पर SIR फॉर्म भरे थे और गोवा की प्रारूप मतदाता सूची 2026 में अपना नाम देखकर वे खुश थे. इसके बावजूद वे निर्वाचन आयोग के नोटिस का पालन करेंगे.
बुजुर्ग दंपती को बार-बार बुलाने पर सवाल
एक अन्य पोस्ट में एडमिरल प्रकाश ने कहा कि यदि SIR फॉर्म में कमी है तो उसे सुधारा जाना चाहिए. उन्होंने यह भी बताया कि बूथ लेवल अधिकारी उनसे तीन बार मिल चुके हैं और जरूरत पड़ने पर वहीं जानकारी ली जा सकती थी. उन्होंने कहा कि वे 82 और उनकी पत्नी 78 वर्ष की हैं और उन्हें 18 किलोमीटर दूर दो अलग-अलग तारीखों पर बुलाया गया है.
पूर्व सैन्य अधिकारियों का समर्थन
सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल टी. एस. आनंद ने कहा कि यह मामला शायद सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी की वजह से हुआ हो. उन्होंने कहा कि एडमिरल प्रकाश के मामले में उनका पीपीओ या वेटरन कार्ड पहचान के लिए काफी है और नियमों के अनुसार SIR टीम उनके घर जाकर भी सत्यापन कर सकती है.
आम समझ की कमी का आरोप
एक अन्य यूजर ने लिखा कि पीपीओ और जीवन प्रमाणपत्र पहले से सरकारी सिस्टम में मौजूद हैं. ऐसे में SIR टीम को बस सिस्टम में देखना चाहिए. उन्होंने इसे 'आम समझ की कमी' बताया.
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Source: IOCL























