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ईट क्रिकेट, स्लीप क्रिकेट, ड्रीम क्रिकेट : ये लाइनें झूलन गोस्वामी की असल जिंदगी का हिस्सा बन गईं

39 साल की स्टार गेंदबाज झूलन बीते शनिवार अपने करियर का आखिरी इंटरनेशनल मैच खेलने मैदान में उतरीं. यह उनके वनडे करियर का 204वां मुकाबला था.

भारत में क्रिकेट का नाम लेते ही सामने धोनी, कोहली या सचिन जैसे मशहूर खिलाड़ी का चेहरा आ जाता है. लोकिन अगर आप सच्चे क्रिकेट प्रेमी हैं तो आप भारत की महिला क्रिकेट टीम को अनदेखा नहीं कर सकते. इस टीम ने हमारे देश को एक बेहतरीन गेंदबाज दिया है. हम बात कर रहे हैं ‘चकदा एक्सप्रेस’ के नाम से मशहूर भारतीय महिला क्रिकेट की महान तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी की. झूलन के गेंद की रफ्तार इतनी तेज थी कि इन्होंने ना सिर्फ भारत में बल्कि विश्व भर में अपनी बॉलिंग का डंका बजवाया. 24 सितंबर को झूलन गोस्वामी का क्रिकेट में सफर थम गया हैं. इस दिन अपनी आखिरी मैच खेलने के साथ ही उन्होंने क्रिकेट से संन्यास ले लिया. 

आज दुनियाभर में अपने नाम से पहचानी जाने वाली झूलन का सफर इतना आसान नहीं था. उन्होंने उस दौर में क्रिकेट खेलना शुरू किया था जब क्रिकेट का मतलब पुरुषों और भद्रजनों का खेल हुआ करता था. उस वक्त शायद ही किसी को पता होगा कि महिलाओं की भी अपनी एक टीम है. भारत जैसे पुरुष प्रधान देश में जहां राजनीति से लेकर परिवार तक में पुरुष मुख्य ओहदे पर बैठते आएं है, उसी पुरुष प्रधान देश के लिए ऐसी महिलाएं महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आती हैं और करोड़ो महिलाओं को सपने देखने की हिम्मत देती हैं. 

झूलन गोस्वामी के सफर की शुरुआत होती है कि 6 जनवरी 2002 से. इस दिन भारत और इंग्लैंड की महिला क्रिकेट टीमों के बीच वनडे मैच खेला गया था. चेपक के मैदान पर खेले जाने वाले उस मैच में एक 19 साल की यह बॉलर भी क्रिकेट की दुनिया में अपना डेब्यू कर रही थी.

एक वो दिन था और एक आज का दिन है, तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी ने 20 साल से ज्यादा के करियर में कई कीर्तिमान अपने नाम किए हैं. अपने करियर की शुरुआत से लेकर अब तक झूलन गोस्वामी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपने शानदार प्रदर्शन से भारत को कई मैच जिताए. 

39 साल की स्टार गेंदबाज झूलन बीते शनिवार अपने करियर का आखिरी इंटरनेशनल मैच खेलने मैदान में उतरीं. यह उनके वनडे करियर का 204वां मुकाबला था. इंग्लैंड के खिलाफ अपने आखिरी मैच में भी शानदार प्रदर्शन देते हुए झूलन ने दो विकेट अपने नाम किए.

अब झूलन गोस्वामी मैदान में फिर कभी भारतीय जर्सी में नजर नहीं आएंगी. 24 सितंबर को हुए इस मैच के दौरान झूलन गोस्वामी जब बल्लेबाज़ी करने उतरीं तो भारत और इंग्लैंड दोनों ही खिलाड़ियों ने उन्हें 'गार्ड ऑफ़ ऑनर' दिया. दर्शकों ने भी तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया.

झूलन का ये आखिरी मैच इंडियन क्रिकेट टीम के लिए ही नहीं, बल्कि हर उस महिला के लिए भी यादगार पल था जिन्हें महिला होते हुए क्रिकेट की दुनिया में अपनी पहचान ढूंढ़ने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.

संन्यास लेने पर भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) ने झूलन गोस्वामी के दो दशक तक चले लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर को ‘यादगार’ करार देते हुए रविवार को कहा कि महिला क्रिकेट की सर्वकालिक महान खिलाड़ियों में से एक के संन्यास के साथ ही एक युग का अंत हो गया. 

बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा,‘‘झूलन के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा करने के साथ ही एक युग का अंत हो गया. उन्होंने बहुत गर्व के साथ भारत का प्रतिनिधित्व किया और हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. उन्होंने पूरी उत्कृष्टता के साथ भारतीय क्रिकेट की सेवा की. उनकी गेंदबाजी भावी क्रिकेटरों को प्रेरित करती रहेंगी. खेल में उनका योगदान यादगार रहा. मैदान पर जहां उनकी प्रेरणादायी उपस्थिति की कमी खलेगी वहीं उनकी उपलब्धियां भावी क्रिकेटरों को प्रेरित करती रहेंगी.’’

झूलन के संन्यास की खबर पर पूर्व कप्तान हुईं भावुक

झूलन गोस्वामी के बारे में PTI से बात करते हुए महिला टीम की पूर्व कप्तान मिताली राज ने कहा था कि वह अपने खेल को लेकर इतनी सीरियस रहती थीं कि नेट्स में गेंदबाजी करते हुए वह "आग उगलती" थीं. उन्होंने कहा कि मैंने दो दशक इस खेल को दिए हैं. उस दौरान मैंने महिला क्रिकेट टीम और झूलन दोनों के ही विकास को देखा है. इस बीस साल में हमने कई यादगार जीत और कुछ दिल तोड़ने वाली हार साथ में देखे हैं. 

मिताली ने कहा कि झूलन के लिए उनका सबसे बड़ा हथियार था उनका स्विंग. स्विंग इतनी बारीकी और सटीक करती थीं कि इससे कई विकेट उन्होंने लिए हैं. उन्होंने कहा, "नेट पर प्रैक्टिस के दौरान मैं हमेशा झूलन से पूछती थी कि 'तुम आग क्यों उगल रही हो, तुम मेरी टीम की साथी ही हो ना?' 


ईट क्रिकेट, स्लीप क्रिकेट, ड्रीम क्रिकेट : ये लाइनें झूलन गोस्वामी की असल जिंदगी का हिस्सा बन गईं

मिताली ने झूलन को लेकर सुनाया दिलचस्प किस्सा

मिताली ने झूलन का एक दिलचस्प किस्सा सुनाते हुए कहा कि हम सेमीफाइनल (रेलवे बनाम बंगाल) में खेल रहे थे. घरेलू सत्र में मैं हेलमेट नहीं ले जाती. झूलन मेरे सिर पर ही निशाना बनाये थी और मैंने उनके द्वारा फेंके गए कई बाउंसर छोड़ दिये थे. थोड़ी देर बाद वह मेरे पास आयीं और बोलीं, तुम हेलमेट क्यों नहीं पहन रहीं? मैंने कहा, मैं हेलमेट नहीं लायी तो कैसे पहनूंगी?’ वो भी मजेदार दिन थे. 

मिताली और झूलन ने ऐसे समय में एक साथ खेलना शुरू किया था जब महिला क्रिकेट की काफी अनदेखी की जाती थी. लेकिन 2006 में बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट बोर्ड) के अंतर्गत आने के बाद इसमें बदलाव शुरू हुआ.

मिताली ने झूलन गोस्वामी के क्रिकेट से संन्यास लेने के फैसले पर कहा कि यह एक दुखद क्षण है. लेकिन यह किसी ऐसे व्यक्ति का जश्न मनाने का क्षण भी है जो इतने लंबे समय तक खेलतीं रहीं और देश का नाम उंचा करतीं रहीं. एक तेज़ गेंदबाज़ के रूप में उस तरह का करियर बनाना आसान नहीं है."


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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 353 विकेट

झूलन गोस्वामी एक तेज गेंदबाज तो हैं ही, साथ ही महिला विश्व कप में सर्वाधिक विकेट (43) लेने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है. झूलन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 353 विकेट लिए हैं. इसके अलावा वह महिला एशिया कप जीतने वाली टीम की हिस्सा भी रह चुकी हैं. 

एक मैच के बाद किए गए प्रेस कॉन्फ्रेंस में झूलन ने अपने सफर को याद करते हुए कहा था कि, 'मैंने जब शुरुआत की थी तब बिल्कुल नहीं सोचा था कि इतने लंबे समय तक टिक पाउंगी. यह एक अच्छा अनुभव रहा है. हमें विश्वास था कि हम महिला क्रिकेट का चेहरा बदल सकते हैं, हमें विश्वास था कि हम दुनिया की शीर्ष तीन-चार टीमों में शामिल हो सकते हैं और यह एक दिवसीय प्रक्रिया नहीं थी, यह एक लंबी प्रक्रिया थी. 

झूलन गोस्वामी ने बीबीसी को दिए अपने एक इंटरव्यू में अपनी शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा था, "मैं बंगाल के एक छोटे से गाँव चकदा पली बढ़ी. बचपन में हमारे आंगन में घर के सभी लड़के क्रिकेट खेलते थे. उस वक्त मैं उनकी बॉल गर्ल होती थी. लड़कों के इस क्रिकेट मैच में मेरा काम था आंगन के बाहर गई गेंद को उठाकर लाना और भाइयों को देना. दोपहर में जब सब सो जाते थे तो मैं अकेले प्रेक्टिस करती थी."


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बीबीसी के मुताबिक उन्होंने कहा कि सबसे पहले मुझे क्रिकेट खेलने का मन तब हुआ जब मैं दस साल की थी. साल 1992 का वो दिन मुझे आज भी याद है जब मैं वर्ल्ड कप टीवी पर देखा था. उस वक्त लोग सचिन के लिए पागल थे. चारो चरफ सचिन-सचिन की आवाज़ें बिल्कुल जादुई लग रहा था. उन्होंने कहा कि उस वक्त वर्ल्ड कप को प्रमोट करने के लिए एक विज्ञापन आता था- ईट क्रिकेट, स्लीप क्रिकेट, ड्रीम क्रिकेट. इस विज्ञापन की तरह ही हमारे सपने भी थे. इस विज्ञापन से ही हमारे उम्र के बच्चों को बहुत प्रेरणा मिली थी."

झूलन ने आगे कहा कि क्रिकेट मुझे पसंद तो था लेकिन गांव में लड़के मुझे अपने साथ खेलने दें ये आसान नहीं था. उस वक्त लड़के कहा करते थे कि मैं बहुत धीरे बॉलिंग करती हूं. साथ ही उस वक्त में गेम खेलने वाले लड़को के नजर में आना था तो मुझे ऑलराउंडर होने की जरूरत थी. मैंने पहले तो खुद से चैलेंज लिया और धीरे धीरे आगे बढ़ती चली गई. 


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छोटे से कस्बे चकदा से हैं झूलन

गेंदबाज झूलन गोस्वामी का जन्म पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में 25 नवम्बर 1982 को हुआ था. उनके  पिता इंडियन एयरलाइंस में काम करते हैं. झूलन की पढ़ाई लिखाई उसी जिले के चकदा कस्बे में हुई थी. यही कारण है कि झूलन गोस्वामी को चकदा एक्सप्रेस भी कहा जाता है. अपने उन्हें बचपन से स्पोर्ट्स में रुचि थी लेकिन उनकी मां को झूलन का गली में लड़कों संग क्रिकेट खेलना पसंद नहीं था. 

क्रिकेट में एंट्री

झूलन ने अपनी खेल की ट्रेनिंग एम.आर.एफ एकेडमी से ली. जब वह 15 साल की थी तब उनकी बॉलिंग ने सेलेक्टर्स का ध्यान खींचा था. हालांकि पहली बार उन्हें भारतीय महिला क्रिकेट टीम में इंग्लैंड के खिलाफ जनवरी 2002 में वनडे सीरीज खेलने का मौका मिला.

झूलन के नाम रिकॉर्ड 

झूलन गोस्वामी के नाम कई बड़े रिकॉर्ड हैं. उन्हें दुनिया की दूसरे नंबर की सबसे तेज गेंदबाज कहा जाता है. इसे अलावा इंटरनेशनल क्रिकेट में 2000 से ज्यादा ओवर करने वाली झुलन दुनिया की इकलौती महिला गेंदबाज हैं. इसके अलावा झूलन गोस्वामी महिला वनडे क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज भी हैं. उन्होंने कुल 333 अंतरराष्ट्रीय विकेट लिए हैं.

झूलन गोस्वामी का इंटरनेशनल करियर


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झूलन गोस्वामी को मिले पुरस्कार 

प्रसिद्ध गेंदबाज झूलन को ICC की ओर से महिला क्रिकेटर ऑफ द इयर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है. ये सम्मान उन्हें  महेंद्र सिंह धोनी ने दिया था. इसके अलावा गोस्वामी को सर्वश्रेष्ठ महिला क्रिकेट खिलाड़ी का भी खिताब मिल चुका है. वहीं साल 2010 में अर्जुन अवार्ड और 2012 में पद्मश्री से सम्मानित हो चुकी हैं. 

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