Coronavirus: प्लाज्मा थेरेपी के मिल रहे हैं अच्छे परिणाम, मरीज की हालत में तेजी से हुआ सुधार
संक्रमण से ठीक हुए व्यक्ति के शरीर में उस वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बन जाती है और 3 हफ्ते बाद उसे प्लाज्मा के रूप में किसी संक्रमित व्यक्ति को दिया जा सकता है ताकि उसके शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने लगे.

नई दिल्ली: कोरोना के मामले लगातार देश में बढ़ती जा रहे हैं वहीं अब तक इस बीमारी का कोई इलाज सामने नहीं आया है. लेकिन इसी बीच दिल्ली से एक अच्छी खबर आई है. दिल्ली के साकेत में मौजूद मैक्स हॉस्पिटल में एक कोरोना संक्रमित मरीज के इलाज के लिए प्लाज्मा थेरेपी शुरू किया गया था. अब उस मरीज की सेहत में सुधार दिखने लगा है वहीं उस मरीज को वेंटीलेटर से हटा कर नॉर्मल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है.
49 साल के व्यक्ति को 4 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर दिल्ली के साकेत अस्पताल में भर्ती कराया गया था. संक्रमण पाए जाने के बाद उसे निमोनिया हो गया और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था. इस बीमारी का फिलहाल कोई इलाज नहीं था. परिवार को भी ये बात पता थी. जब परिवार को पता चला कि प्लाज्मा थेरपी से इसका इलाज अमेरिका जैसे देश में हो रहा है. तो उन्होंने अस्पताल से इस थेरपी करने की दरखास्त की. जिसके बाद अस्पताल ने लाइव सेविंग प्रोटोकॉल के तहत और ऑफ लेवल इंडिकेशन के तहत मरीज को प्लाज्मा थेरेपी देने का फैसला किया.
वहीं प्लाज्मा थेरेपी बकायदा आईसीएमआर और डीजीसीआई के गाइडलाइन के मुताबिक है. वहीं अस्पताल ने हॉस्पिटल एथिक्स कमेटी से इसको लेकर अप्रूवाल भी दे दिया. 14 अप्रैल को संक्रमित मरीज को प्लाजमा थेरपी दी गई और धीरे धीरे सुधार दिखने लगा. वहीं 18 तारीख के बाद तबीयत में इतना सुधार आया की वेंटिलेटर से हटा दिया गया.
प्लाज्मा थेरेपी यानी जिसमें इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति जो अब ठीक हो चुका है उसके शरीर से प्लाज्मा निकालकर संक्रमित मरीज के शरीर में डाला जाता है. खास बात ये है की खुद संक्रमित मरीज के परिवार ने ही प्लाज्मा के लिए डोनर की तलाश की. डोनर 3 हफ्ते पहले इस संक्रमण से ठीक हुआ है. इसके बाद डॉलर के शरीर से प्लाज्मा निकालकर संक्रमित मरीज को दिया गया.
मैक्स हॉस्पिटल के मुताबिक यह थेरेपी कोई नई नहीं है और इसका इस्तेमाल पहले भी अलग-अलग बीमारियों के लिए किया गया है. फिलहाल राहत की खबर ये है की इस थेरपी ने कोरोना का जब तक दवाई या वैक्सीन नहीं मिलता तब तक एक उम्मीद की किरण दिख रही है.
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