कांग्रेस या बीजेपी? CBI ने किसके राज में कितने विपक्षी नेताओं पर कसा शिकंजा, डिटेल में जानिए
कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियों ने बीजेपी पर सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाया है. विपक्षी पार्टियों का कहना है कि सरकार गलत ढंग से सीबीआई का इस्तेमाल कर विपक्षी के नेताओं को परेशान कर रही है.

Misuse Of CBI: दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) को कथित शराब घोटाले केस में सीबीआई (CBI) ने गिरफ्तार किया हुआ है. मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद से ही केंद्र सरकार पर सीबीआई एवं अन्य जांच एजेंसियों के गलत इस्तेमाल का आरोप लग रहा है. विपक्षी पार्टियों के नेताओं का कहना है कि सरकार विपक्षी की आवाज को दबाने का काम कर रही है.
विपक्ष के नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी को एक पत्र भी लिखा है, जिसमें कहा गया कि 2014 में एनडीए (NDA) की सरकार बनने के बाद से ही विपक्षी नेताओं को टारगेट किया जा रहा है. हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि सीबीआई के इंडिपेंडेंट बॉडी है और सबूतों के आधार पर कार्रवाई करती है.
CBI - NDA Vs UPA
2004 से लेकर 2010 तक देश में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी. देश के प्रधानमंत्री उस समय मनमोहन सिंह थे. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कांग्रेस सरकार के समय कुल 72 नेता सीबीआई की जांच के दायरे में थे. इन सभी नेताओं पर अलग-अलग मामले थे. इनमें से विपक्ष के कुल 43 नेता थे. ऐसे में आंकड़ों से पता चलता है कि जिन नेताओं पर सीबीआई ने शिकंजा कसा उनमें 60 प्रतिशत विपक्षी थे. इनमें कुल 12 नेताओं की गिरफ्तारी हुई, जबकि 30 चार्जशीट दायर की गईं. 6 नेता दोषी करार दिए गए और 7 अब तक रिहा हो चुके हैं.
अब बात करते हैं बीजेपी सरकार में सीबीआई के एक्शन की. 2015 से 2021 तक कुल 124 नेताओं पर सीबीआई की गाज गिरी, जिनमें से विपक्षी दलों के नेताओं की संख्या 118 है. ऐसे में साफ है कि 95 प्रतिशत नेता, जिनपर सीबीआई ने शिकंता कसा वो विपक्षी दलों से आते हैं. 10 साल के कांग्रेस कार्यकाल में कुल 12 गिरफ्तारियां हुई थीं, लेकिन उसके मुकाबले बीजेपी के सात साल के कार्यकाल में सीबीआई ने 22 गिरफ्तारियां की. कुल 43 चार्जशीट दायर की गई, लेकिन अभी तक सिर्फ 1 ही दोषी करार हुआ है. वहीं किसी भी मामले में रिहाई नहीं हुई है.
देश में विपक्ष का मोर्चा
2024 के चुनाव में पीएम मोदी और बीजेपी से मुकाबला करने के लिए तमाम विपक्षी दल एक साथ आने की कोशिशों में लगे हुए हैं. चाहे फिर जेडीयू नेता नीतीश कुमार हों, बीआरएस प्रमुख केसीआर हों या टीएमसी की ममता बनर्जी, सभी ने कहा है कि बीजेपी को हराने के लिए एक साथ आने की जरूरत है. बीते दिनों कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी विपक्षी दलों से हाथ मिलाने की अपील की थी. ऐसे में ये समझना भी जरूरी है कि इस वक्त देश में विपक्षी मोर्चा कितना बड़ा है और इसमें कितना दम है.
किसके पास कितने सांसद?
देश में इस वक्त मुख्य रूप से 11 विपक्षी पार्टियां हैं. विपक्ष के कुल सांसदों की बात करें तो इसकी संख्या 139 है. कांग्रेस के पास 52 लोकसभा सांसद है और इसका प्रभाव देशभर के ज्यादातर राज्यों में है. वहीं दूसरे नंबर पर तमिनलाडु की डीएमके है, इसके पास 24 सांसद हैं. टीएमसी के पास 23 लोकसभा सांसद है और इसका प्रभाव पश्चिम बंगाल में है. शिवसेना (उद्धव गुट) के पास 7 सांसद हैं और इसका असर महाराष्ट्र में है.
जनता दल यूनाइटेड के 16 सांसद हैं, इसका प्रभाव बिहार में है. बीआरएस के पास 9 सांसद हैं, इसका प्रभाव तेलंगाना में है. समाजवादी पार्टी के पास 3 सांसद हैं वहीं झारखंड मुक्ती मोर्चा के पास 1 सांसद है. आरजेडी और आम आदमी पार्टी के पास एक भी लोकसभा सांसद नहीं है. हालांकि, इनका प्रभाव दिल्ली, पंजाब और बिहार में है.
Source: IOCL

























