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Bihar Election 2025: नीतीश, तेजस्वी या प्रशांत किशोर... बिहार में कौन बनाएगा सरकार? पत्रकार ने कर दी चौंकाने वाली भविष्यवाणी!

बिहार में भाजपा-जदयू गठबंधन यानी एनडीए को बढ़त मिलती दिख रही है. नीतीश कुमार की योजनाएं, खासकर महिलाओं और गरीबों के लिए चल रही कल्याणकारी योजनाएं, चुनाव में एनडीए के लिए गेम-चेंजर साबित हो रही हैं.

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की घोषणा के बाद से तमाम राजनीतिक पार्टियां उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर रहे हैं. इस बीच एक सवाल हर किसी के मन में चल रहा है कि आखिर कौन सा नेता अपने दल या गठबंधन को बढ़त दिलाएगा और 14 नवंबर के बाद मुख्यमंत्री पद की शपथ लेगा. इस पर बिहार के सीनियर पत्रकार ने अगले मुख्यमंत्री को लेकर भविष्यवाणी कर दी है.

पत्रकार अजीत द्विवेदी ने न्यूज तक से बातचीत में कहा, बिहार की राजनीति में इन दिनों एक बात साफ दिखाई दे रही है NDA (भाजपा-जदयू गठबंधन) को जनता का झुकाव मिल रहा है. इसकी बड़ी वजह है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सामाजिक योजनाओं और शासन में बनी स्थिरता. लंबे समय से चली आ रही सरकार के बावजूद बिहार में एंटी-इंकंबेंसी नहीं, बल्कि प्रॉ-इंकंबेंसी (सरकार के पक्ष में लहर) देखी जा रही है. हालांकि, इसके अलावा प्रशांत किशोर रोजगार की बात कर रहे हैं, वहीं RJD नेता तेजस्वी यादव सरकारी नौकरी देने की घोषणा कर चुके है. इन सब के बीच ये देखना दिलचस्प होगा की कौन सी पार्टी की सरकार बनेगी.

नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जोड़ी

पत्रकार के मुताबिक, नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जोड़ी ने बिहार में एक राजनीतिक भरोसा बनाया है. जनता का मानना है कि जो सरकार लगातार योजनाओं और कल्याणकारी कदमों से लोगों को राहत दे रही है, उसे बदलने की जरूरत नहीं है. यही कारण है कि विपक्षी इंडिया ब्लॉक कई मोर्चों पर कमजोर नजर आ रहा है. बिहार में नीतीश कुमार की लोकप्रियता का एक बड़ा आधार उनकी विकास योजनाएं और महिलाओं के लिए विशेष कार्यक्रम हैं. यही कारण है कि एनडीए को जनता के बीच एक स्थायी भरोसा हासिल है.

प्रॉ-इंकंबेंसी का दौर नीतीश-मोदी का समीकरण

पिछले कुछ वर्षों में भारत की राजनीति में एक नई प्रवृत्ति देखी जा रही है सरकारों के खिलाफ गुस्सा कम और उनके पक्ष में समर्थन ज़्यादा. इसे ही प्रॉ-इंकंबेंसी कहा जाता है. बिहार में यह स्थिति और भी मज़बूत है क्योंकि यहां नीतीश कुमार लंबे समय से सत्ता में हैं, फिर भी जनता में उनके प्रति कोई बड़ा असंतोष नहीं दिखता. इसका मुख्य कारण यह है कि उन्होंने शासन को योजनाओं के जरिए लोगों से जोड़ रखा है. महिलाओं, किसानों, युवाओं और गरीबों के खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर करना, यह रणनीति बिहार के समाज में सीधा असर डाल रही है. यह स्थिति मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की तरह है, जहां शिवराज सिंह चौहान, भूपेश बघेल और एकनाथ शिंदे की योजनाओं ने चुनावी समीकरण बदल दिए. बिहार में भी ऐसा ही होता दिखाई दे रहा है.

महिलाओं पर नीतीश कुमार का भरोसा सबसे बड़ा वोट बैंक

बिहार की राजनीति में महिलाओं का वोट बैंक आज सबसे प्रभावशाली बन चुका है. 2005 में जब नीतीश कुमार ने स्थानीय निकाय चुनावों में 50% महिला आरक्षण लागू किया, तब से उन्होंने एक नई सामाजिक शक्ति तैयार की. इसके बाद लड़कियों के लिए साइकिल योजना, ड्रेस योजना, और शिक्षा प्रोत्साहन योजना ने ग्रामीण महिलाओं तक सरकार का संदेश पहुंचाया. आज वही महिलाएं आजीविका समूहों, उद्यमिता योजनाओं और स्व-सहायता समूहों के रूप में खड़ी हैं. हाल में सरकार ने इन महिलाओं के खातों में 10,000 रुपये की मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता योजना के तहत रकम ट्रांसफर की है. यह केवल एक बार की योजना नहीं, बल्कि लगातार चलने वाला कार्यक्रम है.

महिलाओं की मतदान दर

बिहार में महिलाओं की मतदान दर पुरुषों से 5-6% ज़्यादा है. यही वह कारक है जिसने नीतीश कुमार को चुनाव दर चुनाव मज़बूती दी है. ग्रामीण इलाकों में पुरुषों के प्रवास के कारण महिलाओं का मतदान अनुपात और बढ़ गया है, जिससे महिला वोट निर्णायक बन गए हैं.

योजनाओं का असर कल्याणकारी राजनीति का नया रूप

बिहार में एनडीए की बढ़त की एक और वजह है सीधे लाभ देने वाली योजनाएं. नीतीश सरकार ने न केवल महिलाओं को आर्थिक सहायता दी, बल्कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को भी मज़बूती दी. वृद्ध, विधवा और विकलांग पेंशन को 400 रुपये से बढ़ाकर 1,100 रुपये किया गया. वहीं, 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त देने की घोषणा ने भी जनता को राहत दी है. दीवाली से ठीक पहले बैंक खातों में पैसे पहुंचने से लोगों में सरकार के प्रति सकारात्मक माहौल बना है. यह वही रणनीति है जिसने मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना, महाराष्ट्र में महा लाड़ली योजना और छत्तीसगढ़ में मातृ बंधन योजना को गेम-चेंजर बनाया.

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