राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद में अब तक क्या-क्या हुआ? SIT ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की स्टेटस रिपोर्ट
अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी की जांच कर रही SIT ने सुप्रीम कोर्ट को सीलबंद लिफाफे में अपनी स्टेटस रिपोर्ट सौंप दी है. चंदा चोरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है.

अयोध्या के राम मंदिर के दान में कथित हेराफेरी की जांच के लिए बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने सुप्रीम कोर्ट को सीलबंद लिफाफे में अपनी स्टेटस रिपोर्ट सौंप दी है. यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों के बाद दाखिल की गई है, जिसमें जांच के बारे में अपडेट मांगा गया था. सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं उन्होंने SIT को प्रोग्रेस रिपोर्ट की जानकारी सौंपने का निर्देश दिया था.
सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले दान में कथित वित्तीय गड़बड़ियों की कोर्ट की निगरानी में CBI से जांच कराने की मांग की गई है. केंद्र सरकार, यूपी सरकार और ट्रस्ट को भी नोटिस जारी किए गए हैं. यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है जिनमें कहा गया है कि अयोध्या में राम मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए दान का गलत इस्तेमाल किया गया. इन आरोपों के बाद यूपी की योगी सरकार ने जांच के लिए जून में 3 सदस्यों वाली SIT बनाई थी.
बाद में कई याचिकाकर्ताओं ने दान के प्रबंधन में वित्तीय गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए कोर्ट की निगरानी में CBI जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. SIT ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक शुरुआती रिपोर्ट सौंपी है और अपनी जांच पूरी करने के लिए और समय मांगा है. शुरुआती जांच के नतीजों के मुताबिक, जांचकर्ताओं को मंदिर के दान को संभालने में सुरक्षा और प्रक्रिया से जुड़ी कई कमियां मिली हैं. इनमें दान पेटियों तक अनधिकृत लोगों की पहुंच और गिनती व निगरानी की प्रक्रिया में कई कमियां शामिल हैं.
जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच
बता दें कि इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें से राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और मनीष यादव को हाल ही में आगे की पूछताछ के लिए 39 घंटे की पुलिस कस्टडी में भेजा गया, जबकि बाकी आरोपी अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं. SIT नकदी और कीमती सामान के कथित हेरफेर का भी पता लगा रही है और दान का प्रबंधन करने के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच कर रही है.
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