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Explained: Explained: मोदी नहीं नीतीश के नाम पर मिली है NDA को जीत, कैसे चला 'सुशासन बाबू' का जादू, जानिए 5 बड़ी वजहें

ABP Explainer: PM मोदी की केंद्रीय स्कीम्स को नीतीशे कुमार बिहार में लाए. नीतीशे को सुशासन, महिला क्रांति और पांडव की स्ट्रैटजी ने हीरो बना दिया. नीतीशे ही बिहार में NDA को पटरी पर लाए.

14 नवंबर 2025 की सुबह से बिहार के हर कोने से NDA की जीत की खबरें आ रही हैं. काउंटिंग सेंटरों पर चहल-पहल है, टीवी स्क्रीन पर आंकड़े उछल रहे हैं. बिहार के लेटेस्ट रुझान कहते हैं कि NDA 189 सीटों पर आगे है, तो महागठबंधन को महज 50 सीटें मिल रही हैं. यह जीत सिर्फ नंबरों की नहीं, बल्कि एक कहानी की है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चमक तो थी, लेकिन असली हीरो बने बिहार के 'सुशासन बाबू' नीतीशे कुमार. यानी NDA की जीत के असल हीरो नीतीशे हैं...

तो आइए ABP एक्सप्लेनर में समझते हैं कि NDA की जीत PM मोदी नहीं, बल्कि नीतीशे कुमार के नाम पर कैसे मिल रही है. इसकी 5 बड़ी वजहें क्या हैं...

वजह 1- नीतीशे का 'सुशासन'- विकास की सड़कें, जो जनता को याद रहीं
नीतीशे कुमार ने 2005 से बिहार को 'जंगलराज' से निकालकर विकास की पटरी पर चढ़ाया. सड़कें, पुल, बिजली और महिलाओं को 10 हजार रुपए प्रतिमाह जनता की आंखों में ताजा हैं. एग्जिट पोल (एक्सिस माय इंडिया) के मुताबिक 43% वोटरों ने 'विकास' को प्राथमिकता दी और इसमें नीतीशे का नाम सबसे ऊपर आया.

2004-05 में बिहार का प्रति व्यक्ति आय उत्तर प्रदेश के मुकाबले सिर्फ 56% था. 2023-24 तक ये बढ़कर 66% हो गया. बिहार का सालाना ग्रोथ रेट 5.4% रहा, जो नेशनल एवरेज से 1.1% ज्यादा था. सड़कों का नेटवर्क 2005 के 800 किलोमीटर से बढ़कर 2025 तक 5 हजार किलोमीटर से ज्यादा हो गया. पटना मेट्रो, एयपोर्ट्स और रेल इंजन एक्सपोर्ट बढ़ा. इसमें मोदी सरकार से मदद  मिली, लेकिन नीतीशे की ग्राउंड लेवल पर मेहनत रंग लाई.

बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा, 'लोगों ने मोदी-नीतीश के डबल इंजन के लिए वोट दिया, लेकिन नीतीश की लोकल इमेज ने मोदी को पीछे छोड़ दिया.'

वजह 2- महिलाओं का भरोसा- नीतीशे की 'महिला क्रांति' ने वोटिंग रेट तोड़ा
बिहार की महिलाओं ने नीतीश को 'रक्षक' माना. शराबबंदी से लेकर साइकिल स्कीम तक, नीतीशे ने महिलाओं को सशक्त बनाया. एग्जिट पोल्स (चाणक्य) ने बताया कि महिलाओं में 48% सपोर्ट मिला, जबकि महागठबंधन को 38% ने सपोर्ट किया.

बिहार में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत रिकॉर्डतोड़ 71.6% रहा, जो 1951 के बाद हाईएस्ट है. नीतीशे की 'मैया समर्पण' स्कीम ने 1.4 करोड़ महिलाओं को 10 हजार रुपए दिए. 2006 से लड़कियों को साइकिल मिलने से फीमेल लिटरेसी 53% से बढ़कर 70% हो गई.

CSDS सर्वे के मुताबिक, महिलाओं में नीतीशे को 30% प्रिफरेंस मिला. एक्सिस माय इंडिया के CMD प्रदीप गुप्ता ने कहा कि नीतीश-मोदी का कॉम्बो हीरो बना, लेकिन शराबबंदी ने महिलाओं को NDA की तरफ झुकाया. महिलाओं ने साबित किया कि नीतीशे के काम की वजह से वोट किया, न कि जाति की वजह से.

वजह 3- जाति का गणित- NDA की 'पांडव' स्ट्रैटजी ने विपक्ष को चकमा दिया
NDA में नीतीशे ने जातिगत समीकरण सुलझाए. EBC और महादलितों पर फोकस किया, जो बिहार की 40% आबादी है. NDA ने '5 पंडव' यानी बीजेपी, जदयू, HAM, RLM और LJP का फॉर्मूला चलाया. नतीजतन, बीजेपी 84, जदयू 76, LJP 22, HAM 4 और RLM 3 सीटों पर आगे है. NDA कुल 189 सीटों पर मजबूत है.

2020 में NDA को 125 सीटें मिलीं थीं, जो अब महागठबंधन की कुल सीटों से भी आगे हो गई है. क्योंकि EBC के 55% वोट्स NDA को शिफ्ट हुए. नीतीशे की कुर्मी-कोइरी बेस (15%) ने बीजेपी के ऊपरी जातियों (20%) से मैच किया. केंद्रीय गृह मंत्री अमित साह ने रैली में कहा, 'नीतीश नेतृत्व में बिहार फ्लड-फ्री बनेगा, क्योंकि पांडव एकजुट हैं.'

वजह 4- मोदी की गारंटी, लेकिन नीतीशे की डिलीवरी- डबल इंजन का फायदा
केंद्र सरकार की PM आवास और उज्जवला जैसी योजना बिहार पहुंची, लेकिन नीतीशे ने लोकल टच दिया. जनता ने 'डबल इंजन' को सराहा, लेकिन सीएम फेस नीतीशे ही बने. बिहार ने पहली बार रेल इंजन एक्सपोर्ट किया, गयाजी में इंजीनियरिंग क्लस्टर बना. बेरोजगारी 7.6% घटी, लेकिन प्रवासी मजदूर 50% कम हुए.

एग्जिट पोल्स में NDA में जदयू को 60-70 सीटें और बीजेपी को 55-65 सीटें दी थीं. बीजेपी नेता जीवीएल नरसिम्हा राव बोले, 'लोगों ने मोदी-नीतीशे को क्रेडिट दिया, लेकिन नीतीशे की लास्ट इलेक्शन वाली सिम्पैथी ने वोट पक्का किया.'

मोदी की महिलाओं से जंगलराज पर अटैक की अपील और बीजेपी का डेवलपमेंट प्लैंक ने रेजोनेट किया, जिसे नीतीशे की लोकल डिलीवरी ने मैच किया. बीजेपी सासंद दीपक प्रकाश बोले, 'ये बिहार की जनता की जीत है. डबल इंजन सरकार बनेगी, मोदी और नीतीशे पर भरोसा है.'

वजह 5- विपक्ष की कमजोरी- तेजस्वी की भीड़, लेकिन वोट ट्रांसफर फेल
एक्सिस एग्जिट पोल्स में महागठबंधन की तेजस्वी की पॉपुलैरिटी सीएम प्रिफरेंस के लिए 34% रही, लेकिन वोट शेयर सिर्फ 41% रहा. प्रशांत किशोर की जन सुराज 0-5 सीटें ही ले सकी. तेजस्वी ने 'चेंज' का नारा दिया, लेकिन एंटी-इनकंबेंसी सिर्फ 28% वोटरों तक सीमित रही. MGB ने सोशल जस्टिस और जॉब्स पर फोकस किया, लेकिन ग्राउंड पर 'जंगलराज' का डर जीत गया.

कांग्रेस ने महागठबंधन को ड्रैग डाउन किया, 2020 में 70 सीटों पर सिर्फ 19 सीटें जीतीं थीं, आंकड़े अब और कम है. सबसे बड़ी वजह सीट शेयरिंग में ईगो क्लैश कर गया. जदयू नेता नीरज कुमार बोले, 'तेजस्वी की सरकार सपना टूटा क्योंकि जनता ने नीतीशे को चुना.'

NDA की ओर से नीतीशे की स्ट्रैटजी ने विपक्ष को कमजोर किया और तेजस्वी की भीड़ वोट में नहीं बदली.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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