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Mosquito Reproduction And Feeding: अब मच्छर भूल जाएंगे इंसान का खून चूसना? कोलंबिया यूनिवर्सिटी की इस रिसर्च ने मचाई खलबली

Mosquito Reproduction And Feeding: मच्छरों से जुड़ी एक अहम खोज की है, जो भविष्य में इनके काटने की आदत को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है. चलिए इसके बारे में जानते हैं.

Why Mosquitoes Stop Biting Humans After Blood Meal: गर्मी का मौसम आतके ही मच्छरों का आतंक शुरू हो जाता है. अब साइटिस्ट ने मच्छरों से जुड़ी एक अहम खोज की है, जो भविष्य में इनके काटने की आदत को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है. रिसर्च में पता चला है कि मादा मच्छरों के शरीर में एक खास तरह की सेल्स मौजूद होती हैं, जो खून पीने के बाद इंसानों को काटने की इच्छा को कुछ समय के लिए रोक देती हैं. यह खोज इसलिए भी चौंकाने वाली है, क्योंकि यह नियंत्रण दिमाग में नहीं बल्कि मच्छर के पेट के आखिरी हिस्से में मौजूद सेल्स से जुड़ा है.

क्या नई खोज की गई है?

कोलंबिया यूनिवर्सिटी की साइंटिस्ट लौरा डुवाल की टीम ने पाया कि ये सेल्स वहीं स्थित होती हैं, जहां मच्छर के शरीर में भोजन और पोषण का संतुलन बनता है. दरअसल, मादा मच्छर खून पीने के बाद कुछ दिनों तक इंसानों को काटने में रुचि नहीं दिखाती. लंबे समय से वैज्ञानिक इस स्विच को समझने की कोशिश कर रहे थे. अब पता चला है कि यह प्रक्रिया NPYLR7 नाम के एक रिसेप्टर से जुड़ी है, जो भोजन के बाद भूख और गतिविधि को कंट्रोल करता है।

स्टडी में पाया गया कि जब इस रिसेप्टर को हटाया गया, तो मच्छरों ने खून पीना तो जारी रखा, लेकिन उनके अंडों का विकास प्रभावित हो गया. उनके अंडे कम सफलतापूर्वक फूटे और उनमें पोषण की कमी देखी गई. इससे यह साफ हुआ कि यह सिस्टम सिर्फ खाने की इच्छा को नहीं, बल्कि प्रजनन प्रक्रिया को भी कंट्रोल करता है. 

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 मच्छर के शरीर में कुछ खास सिग्नल 

रिसर्च के दौरान यह भी सामने आया कि खून पीने के बाद मच्छर के शरीर में कुछ खास सिग्नल सक्रिय हो जाते हैं. नर्व एंडिंग्स से निकलने वाला एक पेप्टाइड सिग्नल इन कोशिकाओं को सक्रिय करता है, जिससे वे शरीर को यह संदेश देती हैं कि अब पोषण मिल चुका है. दिलचस्प बात यह है कि यह प्रक्रिया सिर्फ मच्छरों तक सीमित नहीं हो सकती. साइंटिस्ट का मानना है कि कई जीवों में आंत और दिमाग के बीच इसी तरह का संबंध होता है, जो खाने और भूख को कंट्रोल करता है.

यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मच्छरों के दिमाग की तुलना में उनके पेट में मौजूद इस सिस्टम को टारगेट करना आसान हो सकता है. शुरुआती टेस्ट में ऐसे केमिकल्स भी सामने आए हैं, जो इस रिसेप्टर को एक्टिव करके मच्छरों के काटने की इच्छा को कम कर सकते हैं. यह स्टडी करंट बॉयोलॉजी में प्रकाशित हुआ है, जो यह संकेत देता है कि भविष्य में मच्छरों को नियंत्रित करने के नए और प्रभावी तरीके सामने आ सकते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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