NASA Artemis II Mission: 53 साल में पहली बार इंसानी आंखों से देखा गया चांद का ये हिस्सा, आर्टेमिस II मिशन से आई ऐतिहासिक तस्वीर
NASA: नासा के आर्टेमिस II मिशन के बीच चांद की नई तस्वीर भेजी गई है. ये 53 साल में पहली बार हुआ है, जब इंसान चांद के पास पहुंचने वाला है.

नासा के आर्टेमिस II मिशन से एक बहुत खास खबर सामने आई है. नासा ने रविवार (5 अप्रैल 2026) को चांद की एक नई तस्वीर शेयर की, जिसे इस मिशन पर गए अंतरिक्ष यात्रियों ने लिया है. यह तस्वीर इसलिए खास है क्योंकि इसमें चांद का एक ऐसा हिस्सा दिखाई दे रहा है, जिसे पहले कभी इंसानों ने पूरी तरह नहीं देखा था. इस तस्वीर में चांद के किनारे पर मौजूद एक बड़ा क्षेत्र दिख रहा है, जिसे ओरिएंटेल बेसिन कहा जाता है. नासा ने बताया कि पहली बार ऐसा हुआ है जब इस पूरे हिस्से को इंसानी आंखों से देखा गया है. इससे पहले इस जगह की पूरी कभी नहीं मिल पाई थी.
इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री हैं. इनमें तीन अमेरिका से हैं और एक कनाडा से हैं. कनाडा के जेरेमी हैनसेन और अमेरिका के विक्टर ग्लोवर, रीड वाइसमैन और क्रिस्टीना कोच इस यात्रा पर हैं. यह लोग ओरियन नाम के स्पेसक्राफ्ट में सवार हैं, जो सोमवार (6 अप्रैल 2026) तक अपने तय रास्ते पर आगे बढ़ रहा है. यह मिशन इसलिए भी बहुत खास है क्योंकि 1972 में अपोलो 17 मिशन के बाद पहली बार इंसान चांद की ओर गया है. यानी करीब 53 साल बाद इंसान फिर से चांद के पास पहुंच रहा है. इस मिशन में क्रिस्टीना कोच पहली महिला बनेंगी जो चांद की ओर गई हैं और विक्टर ग्लोवर पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री होंगे जो इस यात्रा का हिस्सा हैं.
History in the making
— NASA (@NASA) April 5, 2026
In this new image from our @NASAArtemis II crew, you can see Orientale basin on the right edge of the lunar disk. This mission marks the first time the entire basin has been seen with human eyes. pic.twitter.com/iqjod6gqgz
आर्टेमिस II मिशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
आर्टेमिस II मिशन का मुख्य उद्देश्य चांद के उस हिस्से की तस्वीर लेना है, जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देता. इसे चांद का दूर वाला हिस्सा कहा जाता है. यह मिशन NASA के पुराने Apollo कार्यक्रम के बाद एक नया कदम है, जिससे आगे आने वाले मिशनों की तैयारी की जा रही है. यह अंतरिक्ष यान पृथ्वी से करीब 252,000 मील यानी लगभग 4 लाख किलोमीटर दूर तक जाएगा. यह चांद के पास से घूमकर वापस लौटेगा, लेकिन चांद पर उतरेगा नहीं और न ही उसकी कक्षा में जाएगा. इस यात्रा में यह अब तक इंसानों द्वारा तय की गई सबसे लंबी दूरी का रिकॉर्ड भी तोड़ सकता है. अभी यह रिकॉर्ड अपोलो 13 मिशन के पास है. रिपोर्ट के अनुसार, रविवार तक यह यान आधे से ज्यादा रास्ता तय कर चुका था. यह मिशन लगभग 10 दिन का है और 10 अप्रैल को खत्म होगा, जब यह यान प्रशांत महासागर में उतरेगा. यह मिशन NASA की बड़ी योजना का पहला कदम है. NASA चाहता है कि भविष्य में इंसान चांद पर लंबे समय तक रह सके. एजेंसी का लक्ष्य है कि 2028 तक चांद के दक्षिणी हिस्से में अंतरिक्ष यात्रियों को उतारा जाए.
मिशन की शुरुआत अच्छी रही
हालांकि मिशन की शुरुआत अच्छी रही, लेकिन कुछ समय बाद एक छोटी समस्या सामने आई. ओरियन यान का टॉयलेट ठीक से काम नहीं कर रहा है. जब तक यह ठीक नहीं होता, तब तक अंतरिक्ष यात्रियों को बैकअप के तौर पर इस्तेमाल होने वाले खास बैग का उपयोग करना पड़ रहा है. इंजीनियरों का मानना है कि सिस्टम में बर्फ जम गई है, जिसकी वजह से तरल कचरा बाहर नहीं जा पा रहा है. हालांकि ठोस कचरे के लिए टॉयलेट अभी भी काम कर रहा है. मिशन टीम के प्रमुख जॉन हनीकट ने कहा है कि सिस्टम पूरी तरह सही नहीं है, लेकिन इस्तेमाल किया जा सकता है और सभी अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित हैं.
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