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Haldi Ceremony: क्यों लगाई जाती है हल्दी? जानें धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व, शादी से पहले ज़रूर पढ़ें!

Haldi ceremony: हिंदू धर्म में शादी से पहले कई तरह की रस्मों को अदा किया जाता है. इनमें हल्दी की रस्म प्रमुख हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं हल्दी लगने के बाद जोड़ों को घर से क्यों निकलने नहीं देते?

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Significance of the Haldi ceremony: हिंदू धर्म में शादी से पहले और बाद में कई तरह की रस्मों को अदा किया जाता है. इन्हीं रस्मों में से एक रस्म हल्दी की है. इस रस्म के बाद दुल्ह-दुल्हन को घर से बाहर निकलने की मनाही होती है.

आज भी कई घरों में शादी के दौरान इस रस्म को श्रद्धा के साथ निभाई जाती है. इसके पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों कारण हैं. आइए जानते हैं आखिर ये पंरपरा क्यों निभाई जाती है?

शादी में हल्दी रस्म का महत्व

हिंदू संस्कृति में हल्दी को बेहद अहम माना जाता है. यह केवल मसाला नहीं, बल्कि आयुर्वेद के लिहाज से काफी फायदेमंद भी मानी जाती है. शादी में हल्दी केवल सौंदर्य निखारने के लिए ही नहीं है, यह शादी की तैयारियों का एक शुभ संकेत भी माना जाता है. हल्दी लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होने के साथ मन शांत होता है. 

हल्दी शुभता और सुरक्षा का प्रतीक

धार्मिक नजरिए से देखा जाए तो हल्दी लगाने के बाद इसकी खुशबू हमारे शरीर के आस-पास पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों तरह की ऊर्जाओं को अपनी ओर आकर्षित करती है. शरीर पर हल्दी लगने के बाद हमारा शरीर काफी एनर्जेटिक हो जाता है.

ऐसे में अगर हल्दी लगने के बाद घर से बाहर निकलते हैं और किसी भी तरह की नेगेटिव या अशुभ ऊर्जा के संपर्क में आते हैं, तो शादी पर इसका अशुभ प्रभाव देखने को मिल सकता है. 

इसी कारण, दूल्हा-दुल्हन को हल्दी लगाने के बाद घर से बाहर नहीं जाने दिया जाता है, ताकि उनकी पॉजिटिव ऊर्जा बनी रहे और शादी में किसी भी तरह की बाधाएं न आए. 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हल्दी की खुशबू राहु और केतू जैसे ग्रहों से जुड़ी होती है. शादी में हल्दी की रस्म होने के बाद घर से बाहर जाने पर इन ग्रहों का प्रभाव बढ़ सकता है, जिसके कारण मानसिक समस्याएं सता सकती है. इसी वजह से हल्दी लगने के बाद दूल्हा-दुल्हन को घर में रहने की सलाह दी जाती है.

हल्दी का वैज्ञानिक कारण

शादी में इस रस्म के पीछे वैज्ञानिक कारण कहता है कि, हल्दी एक नेचुरल एंटीसेप्टिक है जो त्वचा में गहराई तक चली जाती है. हल्दी लगाने के बाद त्वचा काफी संवेदनशील हो जाती है. इस दौरान धूप में रहने से जलन या कालापन का सामना करना पड़ सकता है. 

इसी वजह से पुराने समय में लोग कहते थे कि, हल्दी लगाने के बाद बाहर जाने से बचना चाहिए, ताकि निखार और सौंदर्य बना रहे और किसी भी तरह की एलर्जी का खतरा न हो.

शरीर पर हल्दी लगाने से ऊपरी परत के पोर्स खुलते हैं और स्किन साफ होती है, जिन पर गंदगी और धूल आसानी से जम सकती है. इसी वजह से शादी में हल्दी की रस्म के बाद दूल्हा-दुल्हन को बाहर जाने से मना किया जाता है. 

हल्दी रस्म का सामाजिक पहलू

हल्दी रस्म की सामाजिक पहलू के मुताबिक, इस रस्म के बाद दूल्हा-दुल्हन को घर में रहने की सलाह दी जाती है, ताकि वे अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ इस समय का आनंद उठा सकें. यह पल वैवाहिक जोड़ों के लिए पारिवारिक बंधन और एकता का प्रतीक माना जाता है.

इस दौरान घर के सभी लोग, रिश्तेदार और खासकर महिलाएं दूल्हा-दुल्हन को हल्दी लगाने के साथ गीत का आनंद उठाते हैं. इसी वजह से हल्दी की ये रस्म धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक तीनों ही नजरिए से खास मानी जाती है. 

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

अंकुर अग्निहोत्री (Ankur Agnihotri)

Astrology & Religion Content Writer | ABP Live

अंकुर अग्निहोत्री ABP Live के Astro & Religion सेक्शन से जुड़े डिजिटल पत्रकार हैं, जो दैनिक राशिफल, व्रत-त्योहार, ग्रह-गोचर और ज्योतिषीय विषयों पर सरल, तथ्य-आधारित और उपयोगी लेखन करते हैं. उनका कंटेंट विशेष रूप से उन पाठकों के लिए तैयार होता है जो ज्योतिष और धर्म को आसान भाषा में समझना चाहते हैं.

अंकुर पिछले 2+ वर्षों से ABP Live (abplive.com) में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं और ज्योतिष, अंक शास्त्र, वास्तु शास्त्र, शकुन अपशकुन शास्त्र, हस्तरेखा, स्वप्न शास्त्र, चाइनीच ज्योतिष आदि पर आर्टिकल्स प्रकाशित करते हैं.

उनका काम हाई-फ्रीक्वेंसी कंटेंट प्रोडक्शन, ट्रेंड-आधारित स्टोरी चयन और यूजर-इंटेंट आधारित लेखन पर केंद्रित है, जिससे उनके लेख लगातार अच्छा डिजिटल एंगेजमेंट प्राप्त करते हैं. इसके अतिरिक्त अंकुर अग्निहोत्री निम्नलिखित विषयों पर भी लेखन करते हैं:

  • दैनिक और साप्ताहिक राशिफल
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उनके लेख धार्मिक मान्यताओं, पारंपरिक ज्योतिषीय सिद्धांतों और सामान्य स्रोतों पर आधारित होते हैं. वे किसी भी प्रकार के निश्चित या गारंटीड परिणाम का दावा नहीं करते और पाठकों को जानकारी को मार्गदर्शन के रूप में लेने की सलाह देते हैं. इन्होने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई की है.

अंकुर का फोकस ज्योतिष और धर्म को सरल, व्यावहारिक और समझने योग्य रूप में प्रस्तुत करना है, ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यह जानकारी हर वर्ग के पाठकों तक पहुंच सके.

Personal Interests की बात करें तो अंकुर को अंक शास्त्र, वैदिक ज्योतिष, वास्तु और स्वप्न शास्त्र में रुचि. साथ ही साहित्य और फिल्में देखने का शौक है.

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