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Arbain Pilgrimage: मक्का-मदीना के बाद अरबईन तीर्थयात्रा, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक जमावड़ा

Arbain Pilgrimage: अरबईन तीर्थयात्रा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक जमावड़ा है. मंगलवार को शिया जायरीनों को पाकिस्तान से इराक के कर्बला से जा रही बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई और कई लोगों की मौत हो गई.

Arbain Pilgrimage: सभी धर्मों के लोगों के लिए धार्मिक तीर्थयात्रा का खास महत्व होता है. दुनियाभर में मुसलमानों (Muslims) के लिए भी कई खास तीर्थस्थल है. इस्लाम (Islam) में मक्का और मदीना को सबसे पवित्र तीर्थस्थल माना जाता है.

मक्का-मदीना (makka madina) के बाद अरबईन तीर्थयात्रा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक जमावड़ा है. हर साल इसमें करोड़ों मुस्लिम तीर्थयात्री शामिल होते हैं. मक्का-मदीना की तरह ही दुनियाभर के मुसलमानों के लिए अरबईन तीर्थयात्रा की काफी अहमियत होती है.

लेकिन इस बीच ईरान (Iran) में एक सड़क दुर्घटना हुई है, जिसमें कर्बला जा रहे पाकिस्तानी तीर्थयात्रियों (Pakistan Bus Accident in Iran)) की बस ईरान में पलट गई और इसमें कई तीर्थयात्रियों की मौत हो गई. यह दुखद दुर्घटना मंगलवार देर रात हुई. खबरों के अनुसार, बस पाकिस्तान के लरकाना से तीर्थयात्रियों को लेकर इराक (Iraq) जा रही थी.

बताया जा रहा है कि तीर्थयात्री अरबईन के लिए कर्बला (Karbala) जा रहे थे. दरअसल हर साल पाकिस्तान से शिया तीर्थ यात्री कर्बला के लिए जाते हैं. आइये जानते हैं मुस्लिम तीर्थयात्रियों के लिए क्यों खास है अरबईन तीर्थयात्रा और क्या है इसका महत्व.  

क्या है अरबईन तीर्थयात्रा? (What is Arbain Pilgrimage)

अरबईन तीर्थयात्रा आशूरा के बाद 40 दिनों (मुहर्रम की दसवीं तारीख़ के चालीस दिन बाद) की शोक की अवधि के अंत में इराक के कर्बला में आयोजित किया जाता है. यह तीर्थयात्रा 61 हिजरी (साल 680) में पैगंबर मुहम्मद (Prophet Muhammad) के पोते और तीसरे शिया मुस्लिम (Shia Muslim) इमाम हुसैन इब्न अली की शहादत के गम में की जाती है. इस्लामिक मान्यता है कि, हुसैन इब्न अली को सभी सांस्कृतिक सीमाओं के परे हर तरह की आजादी, करुणा और न्याय का प्रतीक माना जाता है.

हर साल उनकी शहादत या अरबईन के 40वें दिन पर तीर्थयात्री कर्बला जाते हैं. कर्बला में ही हुसैन और उनके साथियों को उनके अपने लोगों ने इराक के कुफा में आमंत्रित कर धोखा दिया था. इसके बाद कर्बला की लड़ाई में हुसैन शहीद हो गए थे.

कैसे होती है अरबईन तीर्थयात्रा (How is the Arbaeen pilgrimage performed)

कर्बला में अरबईन तीर्थयात्रा 20 दिनों तक चलती है. इस तीर्थयात्रा के लिए शिया शहर, कस्बे और गांव सभी खाली हो जाते हैं. इस लंबी पैदल तीर्थयात्रा के लिए शिया मुसलमान संगठित होकर एक साथ निकलते हैं. इसलिए इसे दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक जमावड़ा कहा जाता है.  

कर्बला की अरबईन तीर्थयात्रा और हज यात्रा में अंतर (Difference between Arbaeen pilgrimage to Karbala and Hajj pilgrimage)

आमतौर पर लोग मुसलमानों के तीर्थयात्रा को केवल हज यात्रा (Hajj Yatra) के रूप में जानते हैं. लेकिन कर्बला यात्रा हज यात्रा से काफी अलग है. इस्लाम में ऐसा कहा गया है कि, हर मुसलमान को अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार हज यात्रा करना अनिवार्य होता है. लेकिन कर्बला तीर्थयात्रा अनिवार्य नहीं है. बल्कि यह तीर्थयात्रा केवल उनके लिए जरूरी है जोकि इसके अपनी श्रद्धा से करना चाहते हैं और इसका खर्चा उठाने में सक्षम होते हैं.

हालांकि हज यात्रा की अपेक्षा अरबाईन वॉक या तीर्थयात्रा में कम खर्च होता है. ऐसे में जो मुस्लिम जायरीन हज यात्रा के लिए अधिक खर्च उठाने में सक्षम नहीं होते, वह भी कर्बला तीर्थयात्रा के लिए पहुंचते हैं.

ये भी पढ़ें: इजरायल से दो-दो हाथ करने को आतुर इस मुस्लिम देश में है हिंदूओं का प्राचीन मंदिर

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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