वरुथिनी एकादशी व्रत 13 अप्रैल 2026, सोमवार को रखा जाएगा। व्रत पारण का समय 14 अप्रैल को सुबह 6:54 बजे से 8:31 बजे तक रहेगा।
Varuthini Ekadashi 2026: व्रत में स्मार्टफोन छोड़ें 'स्मार्ट-सोल' बनें, वरुथिनी एकादशी पर अन्न के साथ गैजेट्स का त्याग भी जरूरी
Varuthini Ekadashi 2026 Vrat Niyam: वरुथिनी एकादशी व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा. व्रत में लोग अन्न का त्याग करते हैं. लेकिन आज के डिजिटल में दौर में अन्न के साथ ही गैजेट्स का त्याग भी उतना ही जरूरी है.

Varuthini Ekadashi 2026 Vrat Niyam: वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. सभी एकादशी की तरह यह भी महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का महत्व है. धार्मिक मान्यतानुसार, वरुथिनी एकादशी व्रत से पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है, सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं और मनोकामना पूर्ण होती है.
वरुथिनी एकादशी 2026 तिथि
इस वर्ष वरुथिनी एकादशी व्रत सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा. वहीं व्रत पारण का समय 14 अप्रैल को सुबह 6:54 बजे से 8:31 बजे तक रहेगा.
व्रत के दिन गैजेट्स से दूरी क्यों जरूरी
एकादशी में व्रत-नियमों का पालन करना आवश्यक होता है. नियमों का पालन करने से व्रत सफल माना जाता है और भगवान का आशीर्वाद मिलता है. आमतौर पर लोग व्रत के दौरान क्या खाएं और क्या नहीं खाएं जैसी चीजों पर विशेष ध्यान देते हैं. लेकिन आज के डिजिटल दौर में व्रत के दौरान अन्न के साथ ही गैजेट्स का त्याग भी जरूरी है.
लोग व्रत के दौरान पूरे दिन फोन, टैब या वीडियो आदि देखकर समय बिताते हैं. जबकि शास्त्रों में कहा गया है कि, व्रत के दौरान अधिक से अधिक समय मंत्रों का जाप, भजन और प्रभु ध्यान में लगाना चाहिए. इसलिए कई आध्यात्मिक गुरुओं का भी मानना है कि, आप चाहे कितने भी व्यस्त या कामकाजी क्यों न हों, व्रत के दिन कुछ समय के लिए स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और अन्य गैजेट्स से दूरी बनाएं. इससे मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ सकती है.
ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास की सलाह
धार्मिक दृष्टि से एकादशी व्रत सिर्फ शरीर को शुद्ध करने का माध्यम नहीं, बल्कि यह मन और आत्मा को भी पवित्र करने का अवसर देता है. व्रत के दौरान जब व्यक्ति पूरे दिन फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया में उलझा रहता है तो उसका मन स्थिर नहीं रह पाता. इसलिए व्रत के दिन डिजिटल उपकरणों से दूरी बनाकर ध्यान, जप और भक्ति में समय बिताना अधिक फलदायी माना जाता है.
शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के नाम का जप, भजन-कीर्तन और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. यदि इस दिन व्यक्ति को अपना मन को बाहरी आकर्षणों से हटाकर आध्यात्मिक साधना में लगाना चाहिए.
व्रत में जरूरी है डिजिटल डिटॉक्स
आज के समय में लोगों के दिन की शुरुआत मोबाइल देखकर होती है और रात मे भी लोग मोबाइल का उपयोग करने के बाद ही सोते हैं, जिसका असर न केवल मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है, बल्कि इससे ध्यान और एकाग्रता में कमी आती है. इसलिए पूजा-पाठ या विशेष व्रत-त्योहार जैसे वरुथिनी एकादशी ऐसे अवसर की तरह है जब कुछ समय के लिए गैजेट्स से दूर रहकर ‘डिजिटल डिटॉक्स’ किया जा सके. इससे व्यक्ति अपने भीतर झांकने, आत्मचिंतन करने और भगवान की भक्ति में मन लगाने का अवसर पा सकता है. वरुथिनी एकादशी पर गैजेट्स के दूरी बनाकर आप आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर पा सकते हैं. इसलिए व्रत वाले दिन कुछ समय के लिए स्मार्टफोन और अन्य गैजेट्स का भी त्याग जरूर करें.
ये भी पढ़ें: GEN Z में बढ़ रहा हेयर कलर का ट्रेंड, ब्लू, रेड या गोल्डन बालों से जानें व्यक्तित्व का राज
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
Frequently Asked Questions
वरुथिनी एकादशी 2026 कब है?
वरुथिनी एकादशी व्रत क्यों रखा जाता है?
धार्मिक मान्यतानुसार, वरुथिनी एकादशी व्रत से पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है, सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं और मनोकामना पूर्ण होती है।
एकादशी व्रत के दिन गैजेट्स से दूरी क्यों बनानी चाहिए?
शास्त्रों के अनुसार, व्रत के दौरान अधिक से अधिक समय मंत्रों का जाप, भजन और प्रभु ध्यान में लगाना चाहिए। गैजेट्स से दूरी बनाने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ सकती है।
व्रत के दिन डिजिटल डिटॉक्स का क्या महत्व है?
डिजिटल डिटॉक्स से व्यक्ति अपने भीतर झांकने, आत्मचिंतन करने और भगवान की भक्ति में मन लगाने का अवसर पा सकता है। यह आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक है।
Source: IOCL



























