उडुपी के श्रीकृष्ण मठ पहुंचे PM Modi, 1 लाख लोगों के साथ किया गीता पाठ
प्रधानमंत्री Narendra Modi आज 28 नवंबर 2025 को कर्नाटक में उडुपी के श्रीकृष्ण मठ पहुंचे. यहां उन्होंने 1 लाख लोगों के साथ गीता का पाठ किया. पीएम ने पूजा-अर्चना की और सोने का कलश भी चढ़ाया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शुक्रवार 29 नवंबर 2025 को अपने एकदिवसीय दौरे पर कर्नाटक पहुंचे हैं. यहां उडुपी में जगद्गुरु श्री श्री सुगुनेंद्र तीर्थ स्वामीजी (Jagadguru Sri Sri Sugunendra Theertha Swamiji) ने विश्व गीता पर्याय लक्ष्य कंठ गीता परायण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिनंदन किया.
उडुपी दौरे में पीएम मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि उडुपी जनसंघ और भाजपा के सुशासन मॉडल की कर्मभूमि रही है. इसके साथ ही पीएम ने 25 नवंबर को अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में धर्म ध्वजा की स्थापना की चर्चा की.
#WATCH | Udupi, Karnataka | "... असमाकं नरेन्द्र मोदी महोदयः भारतः भाग्य विधता...," says Jagadguru Sri Sri Sugunendra Theertha Swamiji, as he addresses in Sanskrit.
— ANI (@ANI) November 28, 2025
Source: DD pic.twitter.com/pFRJ0axfUZ
सुर्वण तीर्थ मंडप का उद्घाटन
पीएम मोदी ने यहां श्रीकृष्ण मठ (Shri Krishna Mantha) के गर्भगृह में बने सुवर्ण तीर्थ मंडप का उद्घाटन किया और कनकवा किंडी के लिए कनक कवच (सोने का आवरण) समर्पित किया. बता दें कि उडुपी में श्रीकृष्ण मठ की स्थापना लगभग 800 वर्ष पहले द्वैत वेदांत दर्शन के संस्थापक श्री माधवाचार्य ने की थी.
पीएम ने 1 लाख लोगों के साथ किया गीता पाठ
पीएम मोदी ने कहा कि, आज इस अवसर पर जब 1 लाख लोगों ने एक साथ गीता के श्लोक पढ़े तो पूरे विश्व के लोगों ने भारत के सहस्त्र वर्षों की दिव्यता का साक्षात दर्शन भी किया है.
Addressing the Laksha Kantha Gita Parayana programme at Sri Krishna Matha in Udupi. Deeply honoured for the opportunity to be in the presence of the revered sages.
— Narendra Modi (@narendramodi) November 28, 2025
https://t.co/4E53zyQF7B
हरि गुन गाहा, गावत नर पावहिं भव थाहा
पीएम ने कहा, रामचरित मानस में लिखा है- कलियुग केवल हरि गुन गाहा, गावत नर पावहिं भव थाहा। अर्थात कलियुग में केवल भगवद् नाम और लीला का कीर्तन ही परम साधन है। उसके गायन कीर्तन से भवसागर से मुक्ति हो जाती है। हमारे समाज में मंत्रों का और गीता के श्लोकों का पाठ तो शताब्दियों से हो रहा है, पर जब 1 लाख कंठ, एक स्वर में इन श्लोकों का ऐसा उच्चारण करते हैं, जब इतने सारे लोग गीता जैसे पुण्य ग्रन्थ का पाठ करते हैं, जब ऐसे दैवीय शब्द एक स्थान पर एक साथ गूंजते हैं, तो एक ऐसी ऊर्जा निकलती है, जो हमारे मन को, हमारे मष्तिष्क को एक नया स्पंदन और नई शक्ति देती है
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL



























