Parshuram Jayanti 2025 Upay: परशुराम जयंती पर आज कर लें ये 7 उपाय, होगा लाभ
Parshuram Jayanti 2025 Upay: आज 29 अप्रैल 2025 को परशुराम जयंती पर ये 7 चमत्कारी उपाय जरूर करें. इससे अद्भुत लाभ मिलेगा और जीवन में तरक्की होगी.

Parshuram Jayanti 2025: धार्मिक मान्यता है कि, वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान परशुराम का जन्म हुआ था. इसलिए यह दिन परशुराम जयंती के रूप में मनाया जाता है. भगवान परशुराम श्रीहरि के अवतार माने जाते हैं. आइए जानते हैं कि ऐसे कौन से उपाय हैं जिसे परशुराम जयंती पर करने से व्यक्ति के जीवन में चमत्कारी बदलाव आने लगते हैं.
भगवान परशुराम का जन्म जमदग्नि ऋषि और उनकी पत्नी रेणुका के घर हुआ था. वह अपने पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए प्रसिद्ध है. परशुराम जयंती पर लोग भगवान परशुराम की पूजा करते हैं और उनके जीवन के आदर्शों को अपनाने का प्रयास करते हैं. आइए जानते हैं परशुराम जयंती पर किए जाने वाले उपायों के बारे में.
- घी का दीपक जलाएं: भगवान परशुराम के सामने घी का दीपक जलाएं. इस उपाय से यश और प्रतिष्ठा मिलती है.
- कमल का फूल अर्पित करें: भगवान परशुराम चरणों में कमल चढ़ाएं, जीवन में मान-सम्मान बढ़ता है.
- प्रार्थना करें: सुबह स्नान कर परिवार के साथ चरणों में प्रणाम करें और रुके काम पूरे होने की प्रार्थना करें.
- शुभ कार्य शुरू करें: यह दिन नए काम, व्यापार, विवाह आदि के लिए बेहद शुभ है.
- दान करें: फल, अन्न, घड़ा, कपड़े, सत्तू, आम आदि किसी गरीब, ब्राह्मण या मंदिर में दान करें.
- पानी पिलाएं: नींबू पानी या सादा पानी लोगों को पिलाएं, इससे पुण्य मिलता है और रोग दूर रहते हैं.
- भोग लगाएं: भगवान परशुराम के लिए पकवान बनाकर भोग लगाएं, घर में सुख-समृद्धि आती है.
परशुराम जयंती पर किए इन विशेष उपायों से जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है. इन उपायों को करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव भी आते हैं और लक्ष्य की प्राप्ति होती है. साथ ही भगवान परशुराम की कृपा मिलती है.
यह भी पढ़ें: यहां गड़ा है भगवान परशुराम का शक्तिशाली फरसा ! रहस्य जानकर रह जाएंगे हैरान
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
Source: IOCL





















