भखरा सिंदूर का इस्तेमाल रिश्ते की पवित्रता और अखंडता को दर्शाता है। यह मिथिलांचल की शादियों में एक खास रस्म है।
दुल्हन की मांग में घी का लेप, 5 बार सिंदूरदान, क्या है मैथिल विवाह का ‘भखरा सिंदूर’ रहस्य?
Mithila Marriage Rituals: भारत के बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के कुछ हिस्सों में आज भी शादी में दूल्हन का सिंंदूरदान भखरा सिंदूर से किया जाता है. आइए जानते हैं भखरा सिंदूर का महत्व क्या है?

Mithila Sindoordaan Rituals: हिंदू धर्म में शादी शुदा महिलाओं के लिए सिंदूर का काफी महत्व होता है. विवाहित महिलाओं के लिए सिंदूर सुहाग का प्रतीक भी माना जाता है. मान्यताओं के मुताबिक महिलाओं के सिंदूर लगाने से उनके पति की लंबी आयु बनी रहती है.
आमतौर पर ज्यादातर लोग लाल सिंदूर के बारे में ही जानते होंगे. लेकिन बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और उत्तर पूर्व के कई हिस्सों में शादी के दौरान महिलाएं भखरा सिंदूर लगाती हैं. क्या है ये भखरा सिंदूर और मिथिला की शादी में इसे क्यों इतना खास माना जाता है?
मांग में घी का लेप लगाकर 5 बार सिंदूरदान
उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के कुछ हिस्सों में शादी के दौरान दूल्हा भखरा सिंदूर से दुल्हन का सिंदूरदान करता है, तब घर की बड़ी बुजुर्ग महिलाएं दुल्हन के चेहरे को कपड़े से ढक लेती हैं, ताकि दुल्हन को कोई और व्यक्ति देख न सकें.
सिंदूरदान करने से पहले दुल्हन के बालों को दो भागों में बांटकर बीच की मांग निकाली जाती है. इसके बाद महिलाएं दुल्हन की पूरी मांग पर घी का लेप लगा देती हैं. इसके बाद दूल्हा 5 बार दुल्हन की मांग को भखरा सिंदूर से भरता है.
इस तरह के रीति रिवाज मुख्य तौर मिथिलांचल शादियों में देखने को मिलता है.
धार्मिक कार्यों और पूजा अनुष्ठान में भखरा सिंदूर का इस्तेमाल प्रमुख तौर पर किया जाता है. यह सिंदूर रिश्ते की पवित्रता और अखंडता को दर्शाता है.
मैथिल ब्राह्मणों में शादी के अनोखे रीति रिवाज
मैथिल ब्राह्मणों की शादी में पहले दिन विवाह और दूसरे दिन विदाई जैसी रस्म नहीं होती है. मिथिलांचल में शादी समारोह 4 दिनों तक चलता है. विवाह के चौथे दिन दूल्ह-दुल्हन की विदाई होती है. शादी के पहले दिन से चौथे दिन तक दूल्हा दुल्हन के घर पर ही रहता है. इस दौरान कई तरह की रस्में निभाई जाती हैं.
जिसमें दूल्हा-दुल्हन को 4 दिनों तक नहाने की इजाजत नहीं होती है. इस दौरान दोनों जमीन पर ही सोते हैं. इस रस्म को चौठारी के नाम से जाना जाता है.
मैथिली ब्राह्मणों की शादी में व्यंजन का महत्व
मैथिली ब्राह्मणों की शादी में व्यंजन भोज का विशेष महत्व होता है. इस दौरान शादी में बाराती और घराती के लिए दही-चूड़ा,4 से 5 तरह के अचार,6 से 7 तरह की अलग अलग सब्जियां, मछली, पकोड़े और स्पंज वाले रसगुल्ले मिथिला की शादी को और खास बनाते हैं.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
Frequently Asked Questions
मिथिला की शादी में भखरा सिंदूर का क्या महत्व है?
मिथिलांचल में शादी के दौरान सिंदूरदान की क्या प्रक्रिया है?
दुल्हन की मांग में घी लगाकर दूल्हा 5 बार भखरा सिंदूर से मांग भरता है। इस दौरान दुल्हन का चेहरा कपड़े से ढका होता है।
मैथिल ब्राह्मणों की शादी कितने दिनों तक चलती है?
मैथिल ब्राह्मणों की शादी चार दिनों तक चलती है, जिसमें चौथे दिन दूल्हा-दुल्हन की विदाई होती है।
मैथिल ब्राह्मणों की शादी में 'चौठारी' रस्म क्या है?
चौठारी रस्म के तहत दूल्हा-दुल्हन को शादी के चार दिनों तक नहाने की इजाजत नहीं होती और वे जमीन पर सोते हैं।
मिथिला की शादी में खाने में किन विशेष व्यंजनों का महत्व है?
मिथिला की शादी में दही-चूड़ा, कई तरह के अचार, सब्जियां, मछली, पकोड़े और रसगुल्ले जैसे व्यंजन खास होते हैं।
Source: IOCL























