Kashi: काशी में बारिश के लिए हुआ अनोखा अनुष्ठान, इंद्रदेव जमकर बरसे, हुई घनघोर वर्षा
Kashi Shehnai: वाराणसी में प्रचंड गर्मी से राहत पाने के लिए अनोखा अनुष्ठान हुआ. यहां शहनाई वादक ने मां गंगा की गोद में खड़े होकर शहनाई बजाई, इंद्रदेव भी कुछ घंटों बाद जमकर बरसे.

Kashi: जून के तीसरे सप्ताह में धर्मनगरी काशी में मानो आसमान से अंगार बरस रहा हो. आम जन जीवन से लेकर पशु पक्षी भी इस गर्मी से बेहाल नजर आ रहे हैं और अब लोगों की पूरी उम्मीदें आसमान पर टिकी हुई है कि जल्द से जल्द काशी में मूसलाधार बारिश हो . इसीलिए अब बेबस होकर काशी के परंपरागत अनुष्ठान भी शुरू हो चुके हैं
शहनाई बजाकर इंद्रदेव से प्रार्थना
वाराणसी के रीवा घाट स्थित गंगा नदी में एक अनोखी तस्वीर देखने को मिली . प्रचंड गर्मी से बेहाल नजर आ रही धरती पर इंद्रदेव की कृपा दृष्टि हो, इसी कामना के साथ गंगा नदी में शहनाई वादक महेंद्र प्रसन्ना और उनकी टीम की तरफ से राग मेघ बजाकर भगवान इंद्रदेव से बारिश के लिए गुहार लगाई गई.
धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ काशी संगीत साधना का भी प्रमुख केंद्र है, अनेक परंपरा यहां ऐसी है जो आज के आधुनिक दौर में लोगों के लिए भले ही अनोखी हो ,लेकिन भगवान से लेकर प्रकृति के अनेक रूपों को काशी वाले अपनी साधना से प्रसन्न करते हैं और सृष्टि को संकट से बचाने के लिए गुहार लगाते हैं. इन्हीं परंपराओं में से एक आज गंगा नदी में शहनाई बजाकर भगवान इंद्र को प्रसन्न करने का प्रयास किया गया. इस दौरान महेंद्र प्रसन्ना और उनकी टीम पूरे पारंपरिक वेशभूषा में भी नजर आई.
बीते वर्षों में काशी को मानसून ने किया है निराशा
जहां एक तरफ इस वर्ष प्री मानसून ने काशी को पूरी तरह से निराश किया है, वहीं बीते कुछ वर्षों से मानसून में भी काशी और आसपास के जनपद के लिए अच्छे संकेत नहीं मिले .बारिश अच्छी न होने की वजह से हर एक क्षेत्र में इसका प्रभाव पड़ा है और इस बार सारी उम्मीदें मानसून पर टिकी हुई है . अब देखना यह होगा की प्रसन्ना की शहनाई से भगवान इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं या नहीं.
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