Independence Day 2026: 15 अगस्त पर सूर्य देव को जल चढ़ाकर करें दिन की शुरुआत? जानें राष्ट्रपर्व पर सूर्य उपासना का धार्मिक अर्थ
Independence Day 2026: 15 अगस्त को सूर्य की विशेष स्थिति बन रही है, ऐसे में स्वतंत्रता दिवस की शुरुआत सूर्य पूजा से करना शुभ होगा, क्या खास संयोग बन रहा है, पूजन से क्या लाभ मिलता है जान लें.

Independence Day 2026: 15 अगस्त की सुबह जब लाल किले पर तिरंगा फहराया जाएगा, उसी समय आकाश में सूर्य भी आजाद भारत की कुंडली के एक बेहद अहम बिंदु के करीब पहुंच चुका होगा.
लाहिरी अयनांश पर आधारित भारत की प्रचलित स्वतंत्रता कुंडली में सूर्य कर्क राशि के लगभग 27°58 पर स्थित है. 15 अगस्त 2026 की सुबह गोचर सूर्य भी कर्क राशि में करीब 27°47 पर रहेगा. यानी जन्मकालीन और गोचर सूर्य के बीच केवल 11 कला का अंतर होगा.
ज्योतिष में सूर्य को सत्ता, राष्ट्राध्यक्ष, नेतृत्व, प्रतिष्ठा और आत्मबल का कारक माना गया है. जन्मकालीन सूर्य के इतने करीब गोचर सूर्य का पहुंचना भारत के नए वार्षिक चक्र की शुरुआत का संकेत माना जा सकता है.
ज्योतिष की भाषा में इसे सोलर रिटर्न यानी सूर्य-वापसी कहा जाता है. यह स्थिति हर साल बनती है, लेकिन 2026 में खास बात यह है कि स्वतंत्रता दिवस के प्रमुख आयोजनों के दौरान सूर्य भारत के जन्मकालीन अंश के बेहद करीब रहेगा. ऐसे में इस दिन सूर्य उपासना का महत्व कई गुणा बढ जाता है.
राष्ट्रपर्व पर सूर्य उपासना का धार्मिक महत्व
ज्योतिष में सूर्य आत्मा, तेज, सत्ता, नेतृत्व, प्रतिष्ठा और शासन का प्रमुख कारक माना गया है. कुंडली में सूर्य मजबूत हो तो आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति अच्छी मानी जाती है. सरकारी नौकरी या प्रशासन से जुड़े काम करने वालों के लिए भी सूर्य उपासना को विशेष शुभ माना जाता है
आजादी के पर्व पर सूर्य की खास स्थिति का लाभ लेने के लिए सुबह सूर्योदय के समय सूर्य देव को तांबे के पात्र से जल अर्पित कर दिन की शुरुआत करें. ॐ सूर्याय नमः या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं.
ऐसे पाएं सूर्य की कृपा
- सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए सुबह सूर्योदय के समय यानी 5 बजे से 8 बजे तक का समय सबसे शुभ होता है.
- स्नान करके साफ कपड़े पहनें और तांबे के लोटे में जल, गंगाजल, लाल फूल, अक्षत डालें.
- पूर्व दिशा की ओर मुख करके दोनों हाथों से लोटा सिर के ऊपर तक ले जाएं और फिर एक पतली और लगातार धारा बनाकर अर्घ्य दें. जल धारा से ही सूर्य देव को देखें.
- अर्घ्य देते समय ॐ घृणि सूर्याय नम मंत्र का जाप करें. उसी जगह पर तीन परिक्रमा लगाएं. अर्घ्य के जल को अपने हाथों से स्पर्श करें और थोड़ी मात्रा में अपने माथे, छाती या बाहों पर लगाएं. यह सूर्य की ऊर्जा को आत्मसात करने जैसा कार्य होता है.
- अर्घ्य देने के बाद कुछ क्षण शांत होकर सूर्य देव का ध्यान करें और मन ही मन अपनी मनोकामना कहें. इस विधि से सूर्य को अर्घ्य देना सही माना गया है.
शरीर में जागृत होती हैं ये 3 शक्तियां
सूर्य को अर्घ्य देना भारतीय संस्कृति में शरीर और मन को सकारात्मक ऊर्जा देने वाली दिनचर्या से भी जोड़ा गया है. मान्यता है कि सूर्य को अर्घ्य देने के दौरान शरीर की सप्तधातु, पिंगला नाड़ी और ताम्र तत्व पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
- सप्तधातु: आयुर्वेद में शरीर को सात धातुओं से बना माना गया है. सूर्य उपासना को शरीर में ऊर्जा और स्वास्थ्य बनाए रखने से जोड़ा जाता है.
- पिंगला नाड़ी: योग परंपरा में पिंगला नाड़ी को ऊर्जा और सक्रियता से संबंधित माना गया है. सूर्य को जल देने से आत्मविश्वास, उत्साह और काम करने की ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है.
- ताम्र प्रभाव: तांबे के पात्र से सूर्य को जल देने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता में इसे नकारात्मकता दूर करके सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला माना जाता है.
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