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Holi 2026: होली पर महासमंजस खत्म, शास्त्रों की गणना ने बताई रंगवाली होली खेलने की सही तारीख

Holi 2026: रंग खेलने वाली होली की तारीख को लेकर पूरे भारत में असमंजस की स्थिति है, लेकिन ज्योतिषाचार्य पं. मनोज त्रिपाठी ने शास्त्र गणना के आधार पर होली की सही तारीख बताई है.

Holi 2026: होली के पर्व को लेकर इस वर्ष देशभर में तारीखों का असमंजस बना हुआ था. कहीं 2 तारीख को होलिका दहन की तैयारी हो रही थी तो कहीं 3 तारीख को रंगोत्सव मनाने की चर्चा चल रही थी. आमजन से लेकर मंदिर समितियों तक के बीच यह प्रश्न बना हुआ था कि आखिर शास्त्र सम्मत तिथि कौन सी है.

इस पूरे विवाद और भ्रम के बीच विख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज त्रिपाठी ने विस्तार से पंचांग की गणना रखते हुए स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने बताया कि केवल कैलेंडर की तारीख देखकर निर्णय लेना उचित नहीं है, बल्कि पूर्णिमा तिथि का आरंभ, उसका समापन, भद्रा काल की स्थिति और शुभ मुहूर्त का सूक्ष्म अध्ययन आवश्यक होता है.

ज्योतिषाचार्य से जानें शास्त्रानुसार होली कब मनाएं

  • पंडित मनोज त्रिपाठी ने बताया कि होलिका दहन सदैव भद्रा मुख में नहीं किया जाता. भद्रा का त्याग कर, शुभ काल में ही दहन करना शास्त्रों का स्पष्ट निर्देश है.
  • पूर्णिमा तिथि कब लग रही है और कब समाप्त हो रही है, यह गणितीय और खगोलीय आधार पर तय होता है.
  • कई बार तिथि दो दिनों में फैल जाती है, जिससे भ्रम की स्थिति बनती है. ऐसे में हमें शास्त्रों और प्रमाणिक पंचांग का अनुसरण करना चाहिए, न कि केवल सोशल मीडिया पर प्रसारित जानकारी का.
  • उन्होंने आगे कहा कि पर्व का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि धार्मिक मर्यादाओं का पालन करते हुए सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का आह्वान करना है.

सही तिथि और समय पर होलिका दहन का महत्व

पंडित त्रिपाठी के अनुसार शास्त्र सम्मत समय पर किया गया होलिका दहन परिवार में सुख-शांति, आरोग्य और समृद्धि का संचार करता है, जबकि गलत मुहूर्त में किया गया अनुष्ठान अपेक्षित फल नहीं देता. इस प्रकार उनके विस्तृत स्पष्टीकरण के बाद होली की तिथि को लेकर बना संशय काफी हद तक समाप्त होता नजर आ रहा है.

ग्रहण से बचाएगा शिव मंत्रों का जाप 

वहीं श्री महंत रवींद्र पुरी का कहना है कि इस वर्ष चौकी चंद्रमा का ग्रहण है संध्या के समय पर. चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले लगता है और सूर्य ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले लगता है तो भारत में जिस समय दृश्य मन होगा अलग-अलग राज्य है अलग-अलग सूर्य उदय का कल और अस्त का कल अलग-अलग है तो उसी के हिसाब से 9 घंटे पहले सूतक की शुरुआत होने पर मंदिरों की पूजा पाठ करके बंद कर दिया जाएगा.

  • कोई भी ऐसे काम शादी विवाह हवन यज्ञ नहीं होगा.
  • जो व्रत किए हुए है, बालक हैं, उन्हें थोड़ा आहार लेने की अनुमति रहती है.
  • इस समय भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए क्योंकि चंद्रमा शक्ति प्रदान करने के लिए ही अनुष्ठान होता है.
  • सूतक का अर्थ यही होता है जिस ग्रह के ऊपर ग्रहण की छाया है उसके मंत्रों का जाप करना चाहिए, यही वैदिक परंपरा है.

Holika Dahan 2026: होलिका दहन के लिए प्रदोष काल का ये है सबसे शुभ मुहूर्त, भद्रा भी नहीं बनेगी बाधा

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

रोहित सिखौला 2004 से एबीपी न्यूज़ से जुड़े हैं. राजनीतिक, क्राइम और धार्मिक खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं.

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