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Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज की पूजा सामग्री में भूलकर भी न छोड़ें ये 4 चीजें, अखंड सौभाग्य के लिए है जरुरी

Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज 15 अगस्त को मनाई जाएगी. तीज की पूजा स्त्रियों के सौभाग्य के लिए बहुत खास होती है इसलिए इसमें कुछ खास सामग्री जरुरी शामिल करें.

Hariyali Teej 2026: सुहागिनें और कुंवारी स्त्रियां 15 अगस्त 2026 को हरियाली तीज मनाएंगी. सावन में ये त्योहार अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. तीज का व्रत स्त्रियों के लिए बहुत खास है, पूजा में कोई रुकावट न आए, किसी तरह की भूल न हो जाए इसलिए स्त्रियां एक दिन पहले ही हरियाली तीज व्रत पूजा से जुड़ी सभी सामग्री इक्ट्ठा कर लेती हैं.

हरियाली तीज की पूजा थाली में कुछ खास सामग्री जरुर होना चाहिए, क्योंकि इसके बिना पूजा पूर्ण नहीं होती, ये सामग्री स्त्रियों के सौभाग्य से जुड़ी है.

हरियाली तीज पूजा की सामग्री लिस्ट

  • भगवान शिव-पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर
  • जल
  • गंगाजल
  • पंचामृत
  • बेलपत्र
  • धतूरा
  • आक के फूल
  • फूल
  • रोली
  • कुमकुम
  • अक्षत
  • चंदन
  • मेहंदी
  • हरी चूड़ियां
  • सिंदूर
  • बिंदी
  • काजल
  • बिछिया
  • चुनरी
  • हरे वस्त्र
  • धूप
  • दीपक
  • घी
  • कपूर
  • कलश
  • नारियल
  • पान
  • सुपारी
  • फल
  • मिठाई
  • कथा की पुस्तक
  • घेवर
  • दक्षिणा

ये 4 चीजें हैं जरुरी

  • मेहंदी - हरियाली तीज में मेहंदी केवल श्रृंगार का हिस्सा नहीं है, बल्कि सुहाग और प्रेम से जुड़ी शुभ परंपरा भी है. तीज पर स्त्रियां मेहंदी लगाएं और इसे पूजा थाली में भी रखें. माता पार्वती को अर्पित करें. ये सुहाग से जुड़ी होती है.
  • हरी चूड़ियां और श्रृंगार सामग्री - हरी चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, बिछिया, कंघी, काजल आदि सुहाग सामग्री का हिस्सा हैं. इनका संबंध विवाहित स्त्री के सौभाग्य और दांपत्य जीवन से माना जाता है. हरियाली तीज पर ये हरी चूड़ियां पहनने के अलावा दान भी करना चाहिए. मान्यता है इससे अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है.
  • बायना - हरियाली तीज में बहू बायना देकर अपनी सास या नंद से आशीर्वाद लेती हैं. बायना में सुहाग सामग्री और फल होते हैं. इसे घर की सुहागिन महिला को दिया जाता है.
  • जल और बेलपत्र - हरियाली तीज पर शिव जी का जलाभिषेक किया जाता है, इसमें बेलपत्र भोलेनाथ को जरुर अर्पित करें. सुख-समृद्धि की कामना के लिए ये सहायक मानी जाती है. महादेव को बेलपत्र प्रिय है.

हरे रंग का विशेष महत्व

हरियाली तीज का हरा रंग सावन की हरियाली से लेकर सुख-समृद्धि और सौभाग्य तक का प्रतीक है. हरी चूड़ियां सुहाग के श्रृंगार को दर्शाती हैं, जबकि मेहंदी प्रेम और मंगलकामना का प्रतीक मानी जाती है. ज्योतिषीय मान्यता में हरा रंग बुध से जुड़ा है, जो मानसिक स्थिरता का प्रतीक है. 

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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