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आज हल षष्ठी की पूजा में पढ़ें ये कथा, कैसे ग्वालिन की बेजान संतान को मिला जीवनदान

Hal Shahsthi Vrat Katha: हल षष्ठी व्रत 2 सितंबर 2026 को है. इस दिन स्त्रियां व्रत में हल से उगा अनाज नहीं खाती है. संतान से जुड़े इस पूजा में कथा का जरुर श्रवण करें. इसके बिना पूजन अधूरा है.

Hal Shashthi 2026: आज 2 सितंबर 2026 को हल षष्ठी व्रत है. महिलाएं संतान की खुशहाली, सफलता, सुरक्षा के लिए ये व्रत करती हैं. हल षष्ठी व्रत को लेकर ग्रंथों में ग्वालिन और उसकी संतान से जुड़ी कथा प्रचलित है. इस पूजा में भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी की पूजा की जाती है, व्रती महिलाएं हल से जुड़ी वस्तुओं, पलाश, कुश तथा मौसमी सामग्री से पूजा करती हैं, हल से उगे अन्न नहीं खाती हैं. हल षष्ठी की पूजा में इस कथा का श्रवण करें. 

हल षष्ठी व्रत कथा

पूर्वकाल में एक ग्वालिन थी, जो दूध, दही आदि बेचकर जीवन-यापन करती थी. एक समय वह गर्भवती हुई, उसका प्रसवकाल आने ही वाला था. उसे अत्यन्त तीव्र प्रसव-पीड़ा होने लगी. ग्वालिन ने विचार किया कि यदि शिशु का जन्म हो गया, तो उसकी यह सामग्री बिक नहीं पायेगी. वह अपने सिर पर दही एवं मक्खन की मटकी रखकर निकल पड़ी. मार्ग में चलते-चलते उसे और अधिक पीड़ा होने लगी. समीप ही उसे झरबेरी की कुछ झाड़ियाँ दिखाई दीं. वह उन्हीं झाड़ियों की ओट में बैठ गयी. उसी स्थान पर उसका प्रसव हो गया तथा उसने एक सुन्दर पुत्र को जन्म दिया.

दूध, दही बेचने के लालच में उस ग्वालिन ने अपने शिशु को एक वस्त्र में लपेटकर उसी स्थान पर लिटा दिया तथा स्वयं मटकियों को लेकर दूध, दही, मक्खन आदि बेचने चल दी. उस दिन हलछठ थी. गांव में अनेक स्त्रियों ने व्रत किया था. हलछठ के व्रत में गाय के दूध, दही आदि का प्रयोग वर्जित होता है. ऐसे में ग्वालिन के दूध, दही, मक्खन में गाय एवं भैंस दोनों का दूध मिश्रित था, किन्तु उसने सभी से यही कहा कि यह केवल भैंस का ही है. इसीलिये उसका सम्पूर्ण दूध-दही शीघ्र ही बिक गया. सभी सामग्री बिक जाने से ग्वालिन अत्यन्त प्रसन्न थी.

उधर जहाँ ग्वालिन अपने बच्चे को छुपाकर आयी थी, वहाँ उन झाड़ियों के निकट ही एक किसान हल चला रहा था. अकस्मात् ही उस किसान के बैल अनियन्त्रित हो गये एवं भागते हुये खेत की मेड़ पर चढ़ गये. वे बैल इधर-उधर भाग ही रहे थे कि तभी उनसे बँधा हुआ हल उस ग्वालिन के शिशु से जा टकराया. उस हल की नोक से शिशु का पेट फट गया.

किसान को ज्यों ही शिशु के रोने की आवाज सुनाई दी, वह दौड़ा-दौड़ा झाड़ियों के समीप गया एवं शिशु को घायल देख घबरा गया. असमंजस की स्थिति में उस किसान ने झरबेरी के काँटों से ही उस शिशु के पेट में टाँके लगा दिये तथा उसे वहीं छोड़कर चला गया.

कुछ समय पश्चात् ग्वालिन वहाँ शिशु को लेने आयी, तो उसने देखा कि शिशु मृत अवस्था में पड़ा हुआ है. यह भीषण दृश्य एवं अपने शिशु की दुर्दशा देखकर ग्वालिन का हृदय काँप उठा. वह मन ही मन विचार करने लगी कि यह सब मेरे ही पाप का दुष्परिणाम है. मैंने आज हलछठ का व्रत करने वाली अनेक स्त्रियों को गाय का दूध-दही बेचा है,

जिसके कारण उन सभी का व्रत भंग हुआ है. उसी के दण्डस्वरूप मेरे शिशु की मृत्यु हो गयी. बहुत विलाप करने के बाद उसने निर्णय लिया कि मुझे पुनः उन सभी स्त्रियों के समक्ष जाकर अपने पाप का प्रायश्चित्त करना चाहिये. विलाप करती हुयी वह ग्वालिन प्रत्येक गली-मोहल्ले में भ्रमण करते हुये चिल्ला-चिल्लाकर सभी से कहने लगी मैंने जो दूध, दही, मक्खन आदि आप लोगों को बेचा था, वह गाय एवं भैंस दोनों का था.

मैंने झूठ कहा था कि वह केवल भैंस का ही है, मुझे क्षमा करें, मेरे कारण आपका व्रत भंग हुआ है, मुझे क्षमा करें. भगवान ने दण्डस्वरूप मेरी सन्तान को मुझसे छीन लिया. उस ग्वालिन की व्यथा सुनकर अपने धर्म की रक्षा के विचार से व्रती स्त्रियों ने उसे क्षमादान देते हुये आशीर्वाद प्रदान किया. उन सभी से क्षमा-याचना करने के पश्चात् पुनः ग्वालिन उसी झरबेरी की झाड़ी के निकट गयी.

जहाँ उसका शिशु मृत पड़ा था, उसने पाया कि उसका पुत्र जीवित एवं सकुशल है. उस दिन से उस ग्वालिन ने पाप छुपाने के लिए जीवन में कभी झूठ न बोलने का प्रण लिया तथा भक्तिपूर्वक हलछठ का व्रत करने लगी.ॉ

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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