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ऋषि पंचमी आज या कल ? इस दिन देवी-देवता की बजाय ऋषियों की पूजा क्यों होती है

Rishi Panchami 2026: ऋषि पंचमी 15 सितंबर 2026 को है. इस दिन देवी-देवता नहीं बल्कि ऋषियों की पूजा का विधान है, धार्मिक नजरिए से क्या है इसका महत्व.

Rishi Panchami 2026: ऋषि पञ्चमी कोई त्यौहार नहीं है, अपितु सप्त ऋषियों अर्थात सात ऋषियों को श्रद्धाञ्जलि देने और रजस्वला दोष से शुद्ध होने के लिए स्त्रियों द्वारा किया जाने वाला व्रत है. आज के दौर में भी कई क्षेत्रों और परिवारों में मासिक धर्म के समय महिलाओं को भोजन पकाने, किसी भी धार्मिक गतिविधि में भाग लेने और परिवार के किसी भी सदस्य को छूने की अनुमति नहीं होती है.

धार्मिक मान्यता है कि इन दिशा-निर्देशों का पालन न करने से रजस्वला दोष लगता है. रजस्वला दोष से मुक्ति प्राप्त करने हेतु ऋषि पञ्चमी व्रत का सुझाव दिया जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं ऋषि पंचमी पर देवी -देवता नहीं बल्कि ऋषियों की पूजा ही क्यों होती है.

ऋषि पंचमी पर देवी-देवताओं के बजाय ऋषियों की पूजा क्यों?

हिंदू दर्शन में देवता और ऋषि की भूमिका अलग मानी गई है. देवता प्रकृति और दैवी शक्तियों के अधिष्ठाता माने जाते हैं, जबकि ऋषि वह हैं जिन्होंने तप, साधना और ज्ञान के माध्यम से धर्म तथा वेदों की परंपरा को मनुष्यों तक पहुंचाया. इसलिए ऋषि पंचमी का केंद्र ईश्वर से वर मांगना नहीं, बल्कि ज्ञान देने वाली ऋषि परंपरा के प्रति कृतज्ञता और अपने दोषों के लिए प्रायश्चित करना है.

धार्मिक परंपरा में इसे ऋषि-ऋण से भी जोड़ा जाता है. मनुष्य पर देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण की अवधारणा मिलती है. ऋषियों ने वेद, धर्म, संस्कार और जीवन के नियमों का ज्ञान आगे बढ़ाया, इसलिए उनके प्रति सम्मान व्यक्त करना ऋषि-ऋण की स्मृति माना जाता है.

ऋषि पंचमी की तारीख में कंफ्यूजन क्यों

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 15 सितंबर 2026 को सुबह 7.44 पर शुरू होकर 16 सितंबर को सुबह 8.59 तक रहेगी. ऋषि पंचमी की पूजा दोपहर में जब पंचमी तिथि विद्यमान हो तब होती है. ऐसे में इस दिन 15 सितंबर को सुबह 11.02 से दोपहर 12.30 तक मुहूर्त रहेगा.

FAQ

1. सवाल: ऋषि पंचमी पर सप्तर्षियों की पूजा क्यों होती है?

जवाब: यह व्रत ऋषि-ऋण, ज्ञान परंपरा और प्रायश्चित से जुड़ा है, इसलिए सप्तर्षियों की पूजा मुख्य होती है.

2. सवाल: ऋषि पंचमी पर दोपहर में पूजा क्यों की जाती है?

जवाब: शास्त्रीय परंपरा में पंचमी तिथि में दोपहर के समय सप्तर्षि पूजन का विधान बताया गया है.

3. सवाल: क्या ऋषि पंचमी सिर्फ महिलाओं का व्रत है?

जवाब: परंपरागत रूप से यह व्रत महिलाओं से अधिक जुड़ा है, लेकिन इसका मूल भाव ऋषियों के प्रति श्रद्धा और शुद्धि का है.

4. सवाल: ऋषि पंचमी में अरुंधती की पूजा क्यों होती है?

जवाब: सप्तर्षियों की पूजा के साथ अरुंधती का स्मरण दांपत्य निष्ठा, तप और आदर्श जीवन के प्रतीक के रूप में किया जाता है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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