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बकरी पालन में कौनसी नस्ल देगी सबसे ज्यादा मुनाफा? जान लें

बकरी पालन में अच्छी कमाई के लिए केवल ज्यादा बकरियां खरीदना काफी नहीं है. गलत ब्रीड चुनने पर खर्च बढ़ सकता है. जान लीजिए ज्यादा मुनाफा पाने के लिए कौनसी नस्ल आपके फार्म के लिए सही रहेगी,

देश में बड़ी संख्या में किसान खेती के साथ बकरी पालन भी कर रहे हैं. इस काम को कम जगह और छोटे बजट से शुरू किया जा सकता है. गाय और भैंस के मुकाबले बकरियों के चारे और देखभाल पर कम खर्च होता है. इनके दूध, मीट, बच्चों और खाद को बेचकर कमाई की जा सकती है. हालांकि बकरी पालन में मुनाफा केवल पशुओं की संख्या बढ़ाने से नहीं मिलता. इसके लिए सही ब्रीड चुनना सबसे जरूरी है.

कई किसान दूसरों की देखा देखी महंगी बकरियां खरीद लेते हैं. बाद में पता चलता है कि वह ब्रीड उनके इलाके के मौसम में ठीक से एडजस्ट नहीं हो रही. कुछ ब्रीड दूध के लिए बेहतर होती हैं. जबकि कुछ तेजी से वजन बढ़ाने के चलते मीट के बिजनेस के लिए पसंद की जाती हैं. इसलिए बकरी खरीदने से पहले तय करें आप कैसे बिजनेस करना चाहते हैं. जमुनापारी, बरबरी और सिरोही देश की पॉपुलर ब्रीड में शामिल हैं. इन तीनों की अपनी खासियत है. चलिए आपको बताते हैं कि आपके के लिए इनमें से कौनसी ब्रीड सही है.

दूध और बड़े साइज के लिए जमुनापारी

जमुनापारी देश की बड़ी बकरी ब्रीड में शामिल है. इसका कनेक्शन उत्तर प्रदेश के इटावा और आसपास के इलाकों से माना जाता है. लंबे पैर, सफेद और क्रीम रंग, उभरी हुई नाक और नीचे की तरफ लटके लंबे कान इसकी पहचान हैं. अच्छी डाइट और सही देखभाल मिलने पर इसका वजन तेजी से बढ़ सकता है. बड़े शरीर के चलते इसे मीट के लिए भी अच्छा माना जाता है. इसके अलावा जमुनापारी बकरी अच्छी क्वांटिटी में दूध दे सकती है.

अगर किसान दूध और मीट दोनों से कमाई करना चाहते हैं. तो जमुनापारी एक अच्छा ऑप्शन बन सकती है. हालांकि बड़े शरीर के चलते इसे ज्यादा जगह और अच्छी क्वालिटी का चारा चाहिए. कमजोर डाइट मिलने पर इसकी ग्रोथ और दूध दोनों कम हो सकते हैं. इस ब्रीड को खरीदते समय बकरी के बारे में जरूरी जानकारी पहले लें ताकि बाद में नुकसान न उठाना पड़े.


बकरी पालन में कौनसी नस्ल देगी सबसे ज्यादा मुनाफा? जान लें

छोटे फार्म के लिए बरबरी नस्ल सही

बरबरी बकरी साइज में छोटी होती है. इसका रंग आमतौर पर सफेद होता है जिस पर भूरे और लाल रंग के धब्बे दिखाई देते हैं. यह ब्रीड उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा के कई इलाकों में पाली जाती है. कम जगह में बकरी पालन शुरू करने वाले किसानों के लिए बरबरी अच्छा ऑप्शन हो सकती है. इसका मैनेजमेंट बड़ी बकरियों के मुकाबले आसान रहता है. बरबरी जल्दी मैच्योर होने और बच्चे देने की अच्छी क्षमता के चलते पसंद की जाती है.

सही देखभाल मिलने पर यह एक बार में एक से ज्यादा बच्चे भी दे सकती है. इससे किसान अपने फार्म पर बकरियों की संख्या तेजी से बढ़ा सकते हैं. इसके बच्चों की बिक्री से रेगुलर इनकम तैयार की जा सकती है. छोटे शरीर के चलते इसे चारा भी ज्यादा नहीं देना पड़ता. कम बजट से मीट का बिजनेस शुरू करने वाले किसानों के लिए बरबरी फायदे वाली ब्रीड बन सकती है.


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यह भी पढ़ें: घर पर इस तरीके से उगाएं शिमला मिर्च, बाजार से खरीदना कर देंगे बंद

गर्म और सूखे इलाके के लिए सिरोही का ऑप्शन

सिरोही बकरी राजस्थान की पॉपुलर ब्रीड है. इसे गर्म और सूखे मौसम में आसानी से एडजस्ट करने के लिए जाना जाता है. इसका शरीर मजबूत और मीडियम से बड़ा होता है. सिरोही का रंग भूरा दिखाई देता है. जिस पर हल्के और गहरे रंग के धब्बे हो सकते हैं. यह ब्रीड कम सुविधा वाले इलाकों में भी ठीक ग्रोथ कर सकती है. इसी वजह से राजस्थान, गुजरात और आसपास के राज्यों में किसान इसे मीट के लिए बड़े लेवल पर पालते हैं.

सिरोही बकरी का वजन सही डाइट मिलने पर अच्छी रफ्तार से बढ़ सकता है. मजबूत शरीर होने के चलते बाजार में इसके बड़े बकरे का अच्छा रेट मिल सकता है. खुले एरिया और चराई की सुविधा रखने वाले किसानों के लिए यह बेहतर ऑप्शन है. हालांकि इसे कम देखभाल वाली ब्रीड मानकर बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. साफ पानी, सूखा शेड, हरा और सूखा चारा तथा समय पर वैक्सीन जरूरी है. 


बकरी पालन में कौनसी नस्ल देगी सबसे ज्यादा मुनाफा? जान लें

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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