Devshayani Ekadashi 2026: देव सोने के बाद क्या बदल जाते हैं श्रीकृष्ण की पूजा के नियम ? शास्त्रों क्या कहते हैं
Devshayani Ekadashi 2026: 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के बाद विष्णु जी योगनिद्रा में रहेंगे, चातुर्मास के 4 महीने कैसे की जाती है श्रीकृष्ण की पूजा, क्या नियम में कोई बदलाव होते हैं, शास्त्रों से जानें.

Devshayani Ekadashi 2026: पद्म पुराण में देवशनयी एकादशी को पापनाशक और सबसे अधिक पुण्य प्रदान करने वाली एकादशी माना गया है. आषाढे शुक्लपक्षस्य एकादश्यां उपोषितः. सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णुलोकं स गच्छति॥ अर्थात जो व्यक्ति आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर अंत में विष्णुलोक को प्राप्त करता है.
इस दिन से भगवान विष्णु योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं, इसलिए इसे हरिशयनी या देवशयनी एकादशी कहा जाता है. इस एकादशी के बाद देवशयन शुरू होता है. ऐसे में देव सोने के बाद क्या बदल जाते हैं श्रीकृष्ण की पूजा के नियम जान लें शास्त्र क्या कहता है.
देव सोने के बाद कैसे करनी चाहिए श्रीकृष्ण की पूजा
देवशयनी एकादशी पर विष्णु जी सोते नहीं बल्कि चार माह तक ध्यान मुद्रा, समाधि में यानी योगनिद्रा में रहते हैं. ऐसे में शास्त्र अनुसार विष्णु जी और श्रीकृष्ण की पूजा बंद नहीं होती है, बल्कि इस दौरान धर्मशास्त्रों उनकी पूजा, भजन, जप और व्रत का महत्व और अधिक बढ़ जाता है,हालांकि ईश्वर विश्राम अवस्था में होते हैं इसलिए उन्हें जाग्रत भाव में न पूजें.
ऐसे करें पूजन
- प्रतिदिन श्रीकृष्ण को स्नान कराएं. स्वच्छ वस्त्र, चंदन, पुष्प, तुलसी दल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें.
- चातुर्मास में हर दिन कान्हा जी को तुलसी दल अर्पित करें. एकादशी के दिन तुलसी न तोड़े.
- कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने. प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥ - चातुर्मास में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है ऐसे में ये मंत्र समस्त संकटों से रक्षा करने में सहायक होता है.
- जितना संभव हो विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता और श्रीमद्भागवत का पाठ करें.
- भगवान श्रीकृष्ण को दूध, दही, माखन, मिश्री, फल, खीर और अन्य सात्विक व्यंजन का रोजाना सुबह-शाम भोग लगाएं.
- चातुर्मास में जप-तप का ज्यादा महत्व है, ऐसे में श्रीकृष्ण की कृपा पाने के लिए भजन कीर्तन करें.
- खास तिथियों पर जैसे अमावस्या, पूर्णिमा, संक्रांति, एकादशी पर दीपदान करें.
- पद्म पुराण और स्कंद पुराण में चातुर्मास के दौरान इंद्रिय संयम, ब्रह्मचर्य का पालन करें. इस समय क्रोध, निंदा और तामसिक प्रवृत्तियों से बचना चाहिए.
नोट - वैष्णव, स्मार्त, गौड़ आदि संप्रदाय में पूजा पद्धति अलग हो सकती है.
इन चीजों का करें त्याग
पद्म पुराण और धर्मसिंधु में चातुर्मास के दौरान त्याग का विशेष महत्व बताया गया है. कई लोग पूरे चार महीने या प्रत्येक महीने अलग-अलग किसी प्रिय वस्तु का त्याग करते हैं. जैसे-
- हरी पत्तेदार सब्जियां
- दही
- दूध
- उड़द दाल या कोई प्रिय खाने की वस्तु
चातुर्मास से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q 1. चातुर्मास 2026 में कब से कब तक है ?
उत्तर. चातुर्मास 25 जुलाई से 20 नवंबर 2026 तक रहेगा.
Q 2. चातुर्मास में श्रीकृष्ण को क्या भोग लगाना चाहिए?
चातुर्मास में श्रीकृष्ण को दूध, दही, माखन, मिश्री, खीर, फल और अन्य सात्विक भोजन का भोग लगाना शुभ माना गया है.
Q 3.क्या चातुर्मास में रोज तुलसी दल अर्पित कर सकते हैं?
हाँ, श्रीकृष्ण को प्रतिदिन तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना गया है, हालांकि एकादशी के दिन तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए, इसलिए पहले से तोड़े गए तुलसी दल का उपयोग करें.
Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी पर क्या सच में सो जाते हैं विष्णु जी ?
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