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40 दिनों का सफर और करोड़ों लोगों की आस्था...जानिए 'चेहल्लुम' का इतिहास और संदेश

चेहल्लुम (Chehlum) या अर्बईन (Arbaeen) का क्या अर्थ है? पढ़ें कर्बला का इतिहास, इमाम हुसैन की शहादत, अर्बईन वॉक और न्याय व इंसानियत के इसके संदेश के बारे में.

KARBALA ARBAEEN: चेहल्लुम... शोक, सब्र और इंसानियत की एक ऐसी दास्तान, जो सदियों बाद भी दुनिया भर में न्याय की लौ जलाए हुए है. आज 4 अगस्त 2026 को दुनिया भर में चेहल्लुम की अकीदत निभाई जा रही है. मुहर्रम की 10 तारीख (अशूरा) के ठीक 40 दिन बाद यह दिन आता है.

चेहल्लुम केवल एक तारीख नहीं है. यह जुल्म के खिलाफ खड़े होने, शांति चुनने और इंसानियत को बचाने का प्रतीक है.

'चेहल्लुम' का अर्थ और इतिहास

'चेहल्लुम' फारसी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब होता है '40वां'. अरबी में इसे 'अर्बईन' कहा जाता है. किसी अपनों के गुजर जाने के 40वें दिन उनकी याद में दुआ करना और शोक मनाना एक पुरानी परंपरा रही है.

सन् 680 ईस्वी में कर्बला की सरजमीं पर एक ऐतिहासिक जंग हुई थी. इसमें पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन और उनके 72 साथी शहीद कर दिए गए थे. इमाम हुसैन ने उस वक्त के जालिम शासक यजीद के आगे सिर झुकाने और उसके जुल्म को सहने से साफ इनकार कर दिया था.

जंग के बाद इमाम के परिवार को बंदी बना लिया गया. जब वे यजीद की कैद से रिहा हुए, तो सबसे पहले कर्बला पहुंचे. शहीदों की मजारों पर पहला शोक सभा (अजादारी) आयोजित हुआ, और यहीं से चेहल्लुम की शुरुआत हुई.

हजरत जैनब का ऐतिहासिक साहस

चेहल्लुम की दास्तान हजरत जैनब के बिना अधूरी है. वे इमाम हुसैन की बहन थीं, जिन्होंने कर्बला के बाद हक और सच की अलख जगाए रखी.

कैद में होने के बावजूद, उन्होंने यज़ीद के भरे दरबार में बेबाक होकर सच बोला. उन्होंने कर्बला के दर्द और यज़ीद के जुल्म को दुनिया के सामने बेनकाब किया. चेहल्लुम का दिन उनके इसी अटूट साहस और कर्बला वापसी की याद दिलाता है.

'अरबईन वॉक (Arbaeen Walk)' आस्था का सबसे बड़ा पैदल सफर

आज चेहल्लुम का सबसे भव्य रूप इराक में देखने को मिलता है, जिसे 'अरबईन वॉक (Arbaeen Walk)' कहते हैं. इस सफर में करीब 2 करोड़ से ज्यादा लोग एक साथ कदम मिलाते हैं.

लोग नजफ शहर से कर्बला तक 80 किलोमीटर का रास्ता नंगे पैर तय करते हैं. रास्ते भर स्थानीय इराकी नागरिक ज़ायरीन (यात्रियों) के लिए खाना, पानी और रहने का मुफ़्त इंतज़ाम करते हैं.

यहा न कोई अमीर होता है, न गरीब. कोई जाति या धर्म का भेद नहीं होता, बस सिर्फ सेवा और भाईचारे का भाव दिखता है.

भारत में साझी संस्कृति का प्रतीक

भारत में चेहल्लुम हमारी गंगा-जमुनी तहजीब का एक जीवंत हिस्सा है. लखनऊ, दिल्ली, हैदराबाद और कोलकाता जैसे शहरों में इस दिन ऐतिहासिक जुलूस निकाले जाते हैं.

सड़कों पर ताज़िए और अलम (झंडे) के साथ मातमी जुलूस निकलते हैं. भारत में कई धर्मों के लोग इस दिन लंगर बांटते हैं और पानी-शर्बत की सबीलें लगाते हैं. भारत का 'हुसैनी ब्राह्मण' समुदाय भी इमाम हुसैन की याद में चेहल्लुम का शोक पूरी श्रद्धा से मनाता है.

आज के दौर में चेहल्लुम का संदेश

आज की दुनिया में चेहल्लुम का संदेश बेहद अहम हो जाता है. यह दिन हमें तीन बड़ी बातें सिखाता है:

  1. अन्याय के आगे न झुकना: परिस्थितियां कितनी भी कठिन हों, सच का साथ कभी न छोड़ें.
  2. सब्र और संयम: मुश्किल से मुश्किल दौर में भी अपने नैतिक मूल्यों पर टिके रहें.
  3. निःस्वार्थ सेवा: बिना किसी स्वार्थ और भेद के दूसरों की मदद के लिए हाथ बढ़ाएं.

चेहल्लुम किसी एक समुदाय तक सीमित दिन नहीं है. यह हर उस दिल की आवाज है, जो दुनिया में शांति, न्याय और इंसानियत का परचम लहराना चाहता है.

मशहूर शायर जोश मलीहाबादी ने एक बहुत प्यारा शेर लिखा है. यह शेर उनकी एक मशहूर नज़्म 'क्या सिर्फ मुसलमानों के प्यारे हैं हुसैन' का हिस्सा है, जिसे उन्होंने कर्बला के शहीद हजरत इमाम हुसैन की याद और उनके सार्वभौमिकता (universal) संदेश को समर्पित करते हुए लिखा था. वे फरमाते हैं-

क्या सिर्फ मुसलमानों के प्यारे हैं हुसैन
चर्खे नौए बशर के तारे हैं हुसैन
इंसान को बेदार तो हो लेने दो
हर कौम पुकारेगी हमारे हैं हुसैन

आज 4 अगस्त 2026 को चेहल्लुम के मौके पर सबसे सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके दिखाए रास्ते पर चलें और अपने समाज में मोहब्बत व भाईचारा फैलाएं.

FAQ

चेहल्लुम कब मनाया जाता है?
चेहल्लुम इस्लामी कैलेंडर के सफर महीने की 20वीं तारीख को, आशूरा के 40 दिन बाद मनाया जाता है. चांद दिखने के अनुसार तारीख में क्षेत्रीय अंतर हो सकता है.

चेहल्लुम और अरबईन में क्या अंतर है?
दोनों एक ही अवसर के नाम हैं. ‘चेहल्लुम’ फ़ारसी और ‘अर्बईन’ अरबी शब्द है; दोनों का अर्थ 40वां होता है.

चेहल्लुम क्यों मनाया जाता है?
यह इमाम हुसैन और कर्बला में शहीद हुए उनके साथियों की याद में मनाया जाता है.

अर्बईन वॉक कहां से कहां तक होती है?
इसका सबसे प्रसिद्ध पैदल मार्ग इराक के नजफ शहर से कर्बला तक है, जिसकी दूरी लगभग 80 किलोमीटर है.

चेहल्लुम का प्रमुख संदेश क्या है?
इसका केंद्रीय संदेश अन्याय के सामने न झुकना, कठिन परिस्थितियों में सब्र रखना और निःस्वार्थ भाव से इंसानियत की सेवा करना है.

यह भी पढ़ें- 16 दिनों में 2 ग्रहण: सत्ता से सीमा तक बढ़ सकती है हलचल, भारत की वर्षकुंडली दे रही बड़े संकट के संकेत

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader

"ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है."

हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.

वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता और IIMT University Meerut से ज्योतिष शास्त्र व वास्तु शास्त्र की पढ़ाई की है और Astrosage व Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम किया है. मीडिया, ऑडियंस बिहेवियर, डिजिटल पब्लिशिंग और कंटेंट रणनीति की समझ ने उनके काम को अलग पहचान दी है.

हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है. वर्तमान में CJP आंदोलन को लेकर उनकी भविष्यवाणियां सत्य साबित हुईं हैं, उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.

वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.

डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.

उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.

श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.

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