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Mangla Gauri Vrat Katha: मंगला गौरी की पूजा में पढ़ें ये कथा, अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देंगी माता!

Mangla Gauri Vrat 2026: मां मंगला गौरी की पूजा सावन के हर मंगलवार को होती है. अखंड सौभाग्य के लिए स्त्रियां पूजा में मां मंगला गौरी की इस कथा को पढ़ें.

Mangla Gauri Vrat 2026: सावन के हर मंगलवार पर मां मंगला गौरी की पूजा होती है. मंगला गौरी मां पार्वती का ही स्वरूप है. आज 4 अगस्त को पहला मंगला गौरी व्रत है. माता मंगला गौरी की पूजा में कथा का जरुर श्रवण करें. इसके बिना व्रत पूजन अधूरा माना जाता है. मां मंगला गौरी व्रत 

मंगला गौरी व्रत कथा

प्राचीन काल का वृत्तान्त है, कुण्डिन नामक एक भव्य नगर था. उस नगर में धर्मपाल नामक एक धनिक निवास करता था. धर्मपाल की पत्नी अत्यन्त पतिव्रता एवं सती स्वभाव की थी. वे दोनों एक आदर्श दम्पति थे. उनका जीवन समस्त प्रकार की सुख-सुविधाओं से सम्पन्न था.

सब कुछ होते हुये भी उनके जीवन में एक अभाव था कि उनकी कोई सन्तान नहीं थी. जिससे वह परेशान रहते थे. उनके दरवाजे पर एक जटाधारी भिक्षुक प्रतिदिन आया करते थे. वे अवधूत वेश में रहते थे तथा उनके कण्ठ में रुद्राक्ष की माला सुशोभित रहती थी.

एक दिन सेठानी ने विचार किया कि यदि भिक्षुक को स्वर्ण आदि कुछ धन प्रदान कर दें तो सम्भवतः उसके पुण्य प्रभाव से उसे पुत्र की प्राप्ति हो जाये. सेठानी ने इस विषय में अपने पति धर्मपाल से भी विचार-विमर्श किया तथा पति की सहमति से उन भिक्षुक की झोली में अन्न में छुपाकर कुछ स्वर्ण भी डाल दिया. 

सेठानी को यह ज्ञात नहीं था कि वह भिक्षुक अपरिग्रही थे, अर्थात् वह किसी भी प्रकार के द्रव्य या धन आदि का स्पर्श व संग्रह नहीं करते थे. सेठानी द्वारा उनकी झोली में स्वर्ण डालने से उनका अपरिग्रही व्रत भंग हो गया. इससे क्रोधित होकर उन भिक्षुक भगवान ने धर्मपाल एवं उसकी पत्नी को निःसन्तानता का शाप दे दिया.

शाप मिलते ही धनिक अपनी पत्नी सहित उनके चरणों में पड़ गया तथा वे दोनों अपनी गलती की क्षमा मांगने लगे. उन दोनों की प्रार्थना से भिक्षुक महाराज का क्रोध शान्त हो गया तथा उन्होंने सेठानी को श्रावण माह में मंगला गौरी व्रत करने का निर्देश दिया.

साधु जी ने सेठानी को व्रत का विधान बताया. सेठानी ने साधु जी के निर्देशानुसार श्रद्धापूर्वक श्रावण माह में मंगला गौरी व्रत का पालन करने लगी. सेठानी की निश्छल श्रद्धा एवं भक्ति से माता पार्वती प्रसन्न हो गयीं तथा उन्होंने भगवान शिव से उस दम्पति को एक पुत्र प्रदान करने का आग्रह किया.

उसी रात्रि में धर्मपाल को स्वप्न में एक दिव्य शक्ति ने दर्शन दिया तथा कहा कि समीपवर्ती वन में एक आम के वृक्ष के नीचे भगवान गणेश का श्रीविग्रह विराजमान है, तुम उस वृक्ष से आम तोड़कर अपनी पत्नी को ग्रहण करवा देना. ऐसा करने से तुम्हें अवश्य ही एक पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी."

प्रातःकाल होते ही धर्मपाल ने अपनी पत्नी को स्वप्न का सम्पूर्ण वृत्तान्त सुनाया तथा उस आम के वृक्ष की खोज में वन की ओर चल पड़ा. सम्पूर्ण वन में इधर से उधर वह उस आम के वृक्ष को खोज रहा था किन्तु उसे वह वृक्ष नहीं मिला. बहुत समय तक खोजने के उपरान्त जब वह व्याकुल हो उठा तभी उसकी दृष्टि एक आम के वृक्ष पर पड़ी जिसके मूल में भगवान श्रीगणेश की एक अत्यन्त सुन्दर प्रतिमा विराजमान थी.

धर्मपाल प्रसन्नतापूर्वक आम तोड़ने का प्रयास करने लगा लेकिन आम अत्यन्त ऊँचाई पर थे. वह पत्थर मारकर आम तोड़ने का प्रयत्न करने लगा. उसके पत्थरों के प्रहार से एक आम तो टूट गया किन्तु उनमें से ही एक पत्थर सीधा गणेश जी को लग गया. धनिक की इस उद्दण्डता से गणेश जी कुपित हो उठे एवं यथास्थान प्रकट हो गये. गणेश जी को साक्षात् अपने समक्ष पाकर वह चौंक गया.

इससे पूर्व कि वह धनिक कुछ कह पाता, क्रोधित भगवान गणेश ने उसे शाप देते हुये कहा हे दुष्ट धनिक! तूने स्वयं की स्वार्थसिद्धि होने के बाद आम तोड़ने के लिये मुझ पर प्रहार किया. तूने मुझे क्षति पहुँचायी है. माता पार्वती की कृपादृष्टि से तुझे पुत्र की प्राप्ति तो होगी किन्तु वह पुत्र अल्पायु होगा. उसकी मृत्यु इक्कीस वर्ष की आयु में ही हो जायेगी." इतना कहकर गणेश जी वहाँ से अन्तर्धान हो गये.

गणेश जी से शाप पाकर धनिक भयभीत एवं व्यथित हो उठा तथा आम लेकर अपने घर आ गया. उसने अपनी पत्नी से वन में गणेश जी से प्राप्त शाप के विषय में कुछ नहीं कहा एवं उसे वह आम खिला दिया. शनैः शनैः समय व्यतीत हुआ तथा भगवान शिव एवं देवी पार्वती की कृपा से उन दोनों को एक सुन्दर पुत्र रत्न की प्राप्ति हुयी. पुत्र प्राप्ति से उनके जीवन में आनन्द एवं उल्लास का सञ्चार हो गया किन्तु धर्मपाल मन ही मन गणेश जी के शाप के विषय में विचार कर चिन्तित हो रहा था.

कालान्तर में वह बालक बीस वर्ष का हो गया तथा अपने पिता के व्यापार आदि कार्यों में सहायता करने लगा. एक दिन यात्रा से लौटते समय धर्मपाल एवं उसका पुत्र मार्ग में एक सरोवर के तट पर वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन कर रहे थे. उसी समय वहाँ कमला एवं मंगला नाम की दो कन्यायें जल भरने एवं वस्त्रादि धोने हेतु आयीं. वे दोनों वस्त्र धोते हुये चर्चा कर रही थीं.

कमला, मंगला से कह रही थी कि मैंने इस श्रावण माह में प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत करने का सङ्कल्प लिया है. तुम्हें भी माता पार्वती का यह सौभाग्यदायक व्रत अवश्य करना चाहिये. इस व्रत को करने से माता पार्वती प्रसन्न होती हैं तथा अपनी विशेष कृपा एवं आशीर्वाद प्रदान करती हैं. यह व्रत मनोवाञ्छित वर एवं अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति में सहायक होता है कमला के वचन सुनकर मंगला ने भी इस व्रत को करने का निश्चय कर लिया.

धनिक ने मन ही मन यह विचार किया कि यह कन्या मंगला गौरी व्रत का पालन करती है. व्रत के फलस्वरूप इसे अवश्य ही अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति होगी. यही मेरे पुत्र से विवाह हेतु एक उपयुक्त कन्या है. इस प्रकार विचार करते हुये वह अपने पुत्र का विवाह प्रस्ताव लेकर कन्या के पिता के समक्ष उपस्थित हुआ.

कमला के पिता ने अपनी पुत्री के विवाह हेतु धनिक पुत्र का सम्बन्ध स्वीकार कर लिया. तदुपरान्त पूर्ण विधि-विधान से उन दोनों का विवाह करवा दिया गया. विवाहोपरान्त भी कमला विधिपूर्वक मंगला गौरी का व्रत करने लगी.

कमला की श्रद्धा एवं भक्ति से माता पार्वती प्रसन्न हो गयीं तथा उसे स्वप्न में दर्शन देते हुये कहा मैं तुम्हारी भक्ति से अत्यन्त प्रसन्न हूँ, इसीलिये तुम्हें अखण्ड सौभाग्य का वरदान देती हूँ. पर तुम्हारा पति अल्पायु है, इसीलिये अगले माह मंगलवार के दिन एक विषैला सर्प तुम्हारे पति का अन्त करने के लिए आयेगा.

तुम उस सर्प के लिये एक पात्र में मधुर दुग्ध रख देना तथा दुग्ध के पात्र के समीप ही एक मटका भी रख देना. तुम्हारे ऐसा करने से सर्प दुग्ध पान करेगा तथा उस मटके में चला जायेगा. उसके बाद तुम उस मटके के मुख को एक वस्त्र से ढक देना. इस प्रकार तुम्हारे पति के प्राणों की रक्षा होगी.

कमला ने माता पार्वती के निर्देशानुसार वही कार्य किया. माता पार्वती की दया एवं कृपा से कमला के पति के प्राणों की रक्षा हुयी. इस प्रकार मंगला गौरी व्रत के पुण्य फल से धनिक पुत्र शापमुक्त हो गया.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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