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Chandra Grahan 2025: चंद्र ग्रहण के दौरान शारीरिक संबंध बनाने से क्या होता है?

क्या चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) की रात संबंध बनाना सही है? धर्मशास्त्र और आधुनिक विज्ञान बताते हैं कि इस समय शारीरिक संबंध क्यों वर्जित हैं. जानिए शास्त्रीय प्रमाण और स्वास्थ्य दृष्टि से कारण.

चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) केवल आकाशीय घटना नहीं है, बल्कि इसे धर्म और ज्योतिष दोनों दृष्टियों से गहन महत्व प्राप्त है. भारतीय परंपरा में ग्रहणकाल को अशुभ समय माना गया है.

इस दौरान किए गए कर्मों का प्रभाव सामान्य दिनों से अलग माना जाता है. विशेषकर दांपत्य संबंध या शारीरिक मेल को शास्त्रों ने वर्जित बताया है. आइए जानें इसके पीछे शास्त्रीय और स्वास्थ्य दोनों ही कारण क्या हैं.

धर्मशास्त्रों और पुराणों में ग्रहणकाल को सूतक यानी अशुद्धि का समय कहा गया है. मनुस्मृति में उल्लेख है कि ग्रहण के समय भोजन, स्नान और मैथुन नहीं करना चाहिए.

गरुड़ पुराण में भी कहा गया है कि इस समय की गई दांपत्य क्रिया से उत्पन्न संतान को शारीरिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है.

ज्योतिषीय दृष्टि से इस समय राहु-केतु का प्रभाव प्रबल होता है. चंद्रमा असंतुलित हो जाता है, और यह गर्भाधान के लिए प्रतिकूल माना गया है. ऋषि-मुनियों ने इसे केवल निषेध के रूप में नहीं बताया, बल्कि इसके पीछे सामाजिक और पारिवारिक संतुलन का संदेश छिपा है.

स्वास्थ्य और वैज्ञानिक कारण

ग्रहणकाल में धार्मिक कारणों के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टि भी छिपी हुई है. माना जाता है कि इस समय वातावरण में विकिरण और नकारात्मक तरंगें सक्रिय होती हैं.

हार्मोनल असंतुलन की संभावना रहती है, जिससे शरीर का सामंजस्य बिगड़ सकता है. गर्भवती महिलाओं के लिए तो यह समय और भी संवेदनशील है.

कई चिकित्सक मानते हैं कि इस दौरान मानसिक और शारीरिक दबाव का असर गर्भस्थ शिशु पर पड़ सकता है. इसलिए स्वास्थ्य के नजरिए से भी इस समय दांपत्य संबंध उपयुक्त नहीं माने गए हैं.

परंपरा और अनुशासन

भारतीय संस्कृति में संयम और शुद्धता को सर्वोच्च महत्व दिया गया है. ग्रहणकाल में धार्मिक ग्रंथों ने मंत्रजप, ध्यान और ईश्वर-आराधना को श्रेष्ठ बताया है.

इस समय मूर्तियों और पवित्र वस्तुओं को स्पर्श करने से भी परहेज करने की परंपरा रही है. ग्रहण समाप्त होने पर स्नान, दान और शुद्ध आहार लेने का विधान है. इस अनुशासन का उद्देश्य लोगों को केवल धार्मिक भय में डालना नहीं, बल्कि उन्हें शारीरिक और मानसिक संतुलन की ओर ले जाना है.

चंद्र ग्रहण के दौरान दांपत्य संबंध बनाना शास्त्रों और स्वास्थ्य दोनों ही दृष्टियों से अनुचित माना गया है. इस काल में किए गए ऐसे कार्य अशुभ फलदायक माने जाते हैं. यही कारण है कि ऋषि-मुनियों ने इसे वर्जित कर ध्यान, जप और दान को प्राथमिकता दी.

ग्रहणकाल आत्मसंयम, साधना और आत्मशुद्धि का समय है. विवेकपूर्ण आचरण यही है कि इस अवधि में दांपत्य संबंध से परहेज किया जाए और इसके स्थान पर आध्यात्मिक साधना को अपनाया जाए.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader

"ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है."

हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.

वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता और IIMT University Meerut से ज्योतिष शास्त्र व वास्तु शास्त्र की पढ़ाई की है और Astrosage व Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम किया है. मीडिया, ऑडियंस बिहेवियर, डिजिटल पब्लिशिंग और कंटेंट रणनीति की समझ ने उनके काम को अलग पहचान दी है.

हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है. उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.

वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.

डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.

उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.

श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.

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