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Ashadha Amavasya 2026: आषाढ़ अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या क्यों कहते, स्नान-दान के अलावा इस दिन होती है बहुत खास पूजा

Ashadha Aamavasya 2026: आषाढ़ अमावस्या पर स्नान-दान के अलावा कृषि से जुड़े उपकरण की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. ऐसा क्यों किया जाता है. इसका महत्व क्या है जान लें.

Ashadha Aamavasya 2026: आषाढ़ मास अमावस्या पर देवी लक्ष्मी और विष्णु जी का विशेष अभिषेक करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है, ऐसी मान्यता है.  इस दिन तीर्थ दर्शन और नदियों में स्नान करने के साथ ही हल, कृषि उपकरण की पूजा करने की भी परंपरा है.

दोपहर में पितरों के लिए धूप-ध्यान किया जाता है. आषाढ़ मास को हलहारिणी अमावस्या कहते हैं. ये पितृ देवता का तर्पण, धूप-ध्यान के साथ किसानों के लिए भी खास दिन है. जानते हैं आषाढ़ अमावस्या पर स्नान-दान का मुहूर्त और हलहारिणी अमावस्या का महत्व.

आषाढ़ अमावस्या 2026 मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 4.11 - सुबह 4.51
  • सुबह 5.32 - सुबह 7.16
  • सुबह 8.59 - सुबह 10.43

आषाढ़ अमावस्या को क्यों कहते हैं हलहारिणी अमावस्या

हलहारिणी अमावस्या के दिन किसान अपने हल या अन्य कृषि उपकरणों की भी पूजा करते हैं. साथ ही भगवान से अच्छी फसल होने की प्रार्थना करते हैं. इसलिये इस अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या भी कहते हैं. अन्न जीवन का अभिन्न अंग है, . फसल खराब होने से अन्न की कमी, महंगाई और जीविका संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं, जिससे लोगों का जीवन प्रभावित होता है. मान्यता है कि आषाढ़ अमावस्या पर कृषि संबंधित विशेष पूजा करने से इंद्रदेव और सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं और प्रकृति फसल के लिए अनुकूल रहती है,,

पौधे दिलाते पितरों का आशीर्वाद

इस दिन पौधे लगाना भी शुभ माना जाता है, क्योंकि वर्षा ऋतु का आगमन आषाढ़ में हो जाती है. ऐसे में अमावस्या के दिन पीपल, नीम, बरगद आदि का पेड़ मंदिर में लगाना शुभ माना जाता है. इससे पितर प्रसन्न रहते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं. वहीं घर में बेलपत्र, आंवला पौधा लगा सकते हैं. इससे महादेव और विष्णु जी प्रसन्न होते हैं.

आषाढ़ अमावसया पर शुभ संयोग

  • सर्वार्थ सिद्धि योग - सुबह 05:32 - सुबह 05:41
  • अमृत सिद्धि योग - सुबह 05:32 - सुबह 05:41

आषाढ़ अमावस्या पर क्या करना शुभ

  • अमावस्या के दिन काली चींटियों को चीनी या शक्कर मिला हुआ आटा खिलाना शुभ माना जाता है. धार्मिक विश्वास है कि इस छोटे से पुण्य कार्य से नकारात्मक कर्मों का प्रभाव कम होता है और जीवन में शुभ फल मिलने लगते हैं.
  • इस दिन नदी, तालाब या अन्य जलाशय में मछलियों के लिए आटे की गोलियां डालने की भी परंपरा है. मान्यता है कि यह उपाय जीवन की बाधाओं को दूर करने और मानसिक शांति प्राप्त करने में सहायक होता है.
  • अमावस्या पर पीपल के वृक्ष को जल अर्पित कर उसकी श्रद्धापूर्वक पूजा करनी चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से शनि सहित अन्य ग्रहों के अशुभ प्रभावों में कमी आती है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है.
  • संध्या के समय घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक जलाएं. दीपक में रूई की बजाय लाल धागे की बत्ती रखें और उसमें थोड़ा-सा केसर डालें. मान्यता है कि इस उपाय से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है तथा घर में सुख-समृद्धि और आर्थिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है.
  • अमावस्या के दिन काले कुत्ते को तेल लगी रोटी खिलाना भी शुभ माना गया है. धार्मिक विश्वास है कि इस उपाय से शत्रु बाधाएं कम होती हैं, साहस बढ़ता है और व्यक्ति को विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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