अंबेडकर जयंती हर साल 14 अप्रैल को मनाई जाती है. यह दिन डॉ. भीमराव अंबेडकर को समर्पित है.
Ambedkar Jayanti 2026 Quotes: बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के 10 विचार, जिससे बदल जाएगा आपका नजरिया!
Ambedkar Jayanti 2026 Wishes Quotes in Hindi: बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती 14 अप्रैल को मनाई जाती है. अंबेडकर जयंती पर देखें उनके 10 विचार जो आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं और समाज को नई दिशा दिखाते हैं.

- बाबासाहेब अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को हुआ था।
- उन्होंने सामाजिक भेदभाव मिटाने, समानता व मानवाधिकारों हेतु संघर्ष किया।
- उनकी शिक्षा, संगठन व संघर्ष की राह आज भी प्रासंगिक।
- प्रस्तुत हैं बाबासाहेब के जीवन बदलने वाले अनमोल विचार।
Ambedkar Jayanti 2026 Wishes Quotes: हर साल 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के रूप में मनाया जाता है. यह दिन डॉ. भीमराव अंबेडकर को समर्पित है, जिन्हें भारत के महान समाज सुधारक, न्यायविद और संविधान निर्माता के रूप में जाना जाता है.
भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के महु में हुआ था. उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन सामाजिक भेदभाव को दूर करने, दलित समुदाय के खिलाफ भेदभाव से लड़ने के लिए समर्पित कर दिया. साथ ही देश में समानता, शिक्षा और मानवाधिकारों के लिए उन्होंने कई प्रयास किए. 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के दिन बाबा साहब के संघर्ष और संवैधानिक मूल्यों का याद किया जाता है, जिसके जरिए समाज और आधुनिक भारत को नई दिशा मिली.
"शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो"
दलित परिवार में जन्म लेने के कारण उन्होंने जीवनभर जातिवाद, भेदभाव और असमानता का सामना किया. लेकिन आगे चलकर बाबा साहब के इसके खिलाफ आवाज उठाई और समाज को नई दिशा दी. बाबा साहब ने हिंसा या अहिंसा का मार्ग नहीं अपनाया, बल्कि अपने कलम और शिक्षा को जीवन का ढाल बनाकर समाज में परिवर्तन लाए.
बाबा साहब अंबेडकर का एक ही मूलमंत्र था- "शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो". वे हमेशा कहते थे- ‘खुद को शिक्षित करो, क्योंकि शिक्षा ही प्रगति की रीढ़ है.’ ‘मैं मूर्तियों में नहीं किताबों में हूं. मुझे पूजने नहीं, पढ़ने की जरूरत है.’ बाबा साहब के विचारों में शिक्षा और ज्ञान का महत्व समाहित है. इसलिए आज भी उनके विचार समाज को नई दिशा देते हैं.
बाबा साहब अंबेडकर की जयंती पर देखिए उनके 10 अनमोल विचार, जो हर किसी को जरूर जानना चाहिए. ये विचार आपको जीवन में नई दिशा दिखाएंगे और सफलता की ओर ले जाएंगे. इसलिए इन्हें अपने जीवन का मूलमंत्र बना लें और अपने प्रियजनों व परिजनों को भी भेजें.
भीमराव अंबेडकर के 10 विचार (Dr BR Ambedkar Birth Anniversary Quotes, Images, Messages, Status)
- ‘सफलता कभी पक्की नहीं होती है और असफलता भी अंतिम नहीं होती है. इसलिए अपनी कोशिश तब तक जारी रखो जब तक आपकी जीत इतिहास ना बन जाए.’
- ‘मंदिर जाने वाले लोगों की लंबी कतारें जिस दिन पुस्तकालय की ओर बढ़ेगी, उस दिन देश को महाशक्ति बनने से कोई रोक नही सकता.’
- ‘अगर आप में गलत को गलत कहने की क्षमता नही है, तो आपकी प्रतिभा व्यर्थ है. शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो.’
- ‘लोकतंत्र केवल सरकार का एक रूप नहीं, यह मुख्य रूप से संयुक्त संचारित अनुभव का एक तरीका है.’
- ‘मैं किसी समुदाय की प्रगति का आकलन इस आधार पर करता हूँ कि महिलाओं ने कितनी प्रगति हासिल की है.’
- ‘मनुष्य का अंतिम लक्ष्य ज्ञान का विकास होना चाहिए.’
- ‘जीवन लंबा होने के बजाय महान होना चाहिए.’
- ‘मैं उस धर्म को नहीं मानता जो मनुष्य को मनुष्य से अलग करता हो.’
- ‘जो लोग अपने इतिहास को भूल जाते हैं, वे कभी नया इतिहास नहीं बना सकते.’
- ‘तुम्हारे पैरों में जूते भले ना हों, हाथों में किताब जरूर होनी चाहिए.’
अंबेडकर जयंती 2026 शुभकामना (Ambedkar Jayanti 2026 Wishes)
न्याय, समानता और प्रगति- ये आदर्श हमारे भविष्य को आकार देते हैं. अंबेडकर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं.
डॉ. बी.आर. अंबेडकर की विरासत एक मार्गदर्शक प्रकाश है. आइए ज्ञान और सशक्तिकरण के मार्ग पर चलें. अंबेडकर जयंती 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं.
आज का दिन उस महान व्यक्तित्व को याद करने का दिन है, जिसने हमें बेहतर भविष्य के सपने देखने की शक्ति दी. अंबेडकर जयंती की शुभकामनाएं.
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Frequently Asked Questions
अंबेडकर जयंती हर साल किस तारीख को मनाई जाती है?
डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के महु में हुआ था.
डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन सामाजिक भेदभाव को दूर करने, दलित समुदाय के खिलाफ भेदभाव से लड़ने, समानता, शिक्षा और मानवाधिकारों के लिए समर्पित कर दिया.
डॉ. भीमराव अंबेडकर का मूलमंत्र क्या था?
बाबा साहब अंबेडकर का मूलमंत्र था- 'शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो'.
डॉ. भीमराव अंबेडकर के अनुसार समाज की प्रगति किस पर निर्भर करती है?
वे मानते थे कि जिस दिन मंदिर जाने वाले लोगों की कतारें पुस्तकालय की ओर बढ़ेंगी, उस दिन देश को महाशक्ति बनने से कोई रोक नहीं सकता.
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