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डेटिंग साइट पर लड़कों को क्यों रिजेक्ट कर देती हैं लड़कियां? ये स्टडी पढ़कर समझ आ जाएगी पूरी बात

आजकल लोग अपने खाली समय को भरने के लिए डेटिंग ऐप का सहारा लेते हैं और अपने लिए पार्टनर चुनते हैं. हालांकि, कई बार वहां से रिजेक्शन मिलता है. आपको बताते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है?

आजकल डेटिंग का चलन बहुत बढ़ गया है. ज्यादातर लोग इन्हें नए दोस्त बनाने या रिलेशनशिप की तलाश में इस्तेमाल करते हैं. लेकिन डेटिंग की दुनिया में हमेशा एक चर्चा रहती है. क्या महिलाएं बहुत ज्यादा पिकी होती हैं? यानी क्या वे बहुत सिलेक्टिव होकर ही किसी को पसंद करती हैं? अक्सर पुरुष शिकायत करते हैं कि महिलाएं जल्दी स्वाइप राइट नहीं करतीं और इसी वजह से उन्हें बार-बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ता है.

लेकिन हाल ही में पीएलओएस वन नामक जर्नल में छपी एक रिसर्च ने इस सोच को पूरी तरह बदलकर रख दिया है. रिसर्च में सामने आया कि असल में पुरुष ही बहुत हाई स्टैंडर्ड्स रखते हैं और अक्सर उन महिलाओं को पसंद करते हैं जो उनसे ज़्यादा अट्रैक्टिव या डिजायरेबल होती हैं. वहीं महिलाएं ज्यादातर उन पुरुषों को चुनती हैं जिनकी लोकप्रियता या आकर्षण उनके बराबर या आसपास हो.

स्टडी में क्या पता चला?

यह रिसर्च लगभग 3,000 हेट्रोसेक्शुअल यूज़र्स पर की गई, जो एक चेक डेटिंग ऐप का इस्तेमाल कर रहे थे. नतीजे बताते हैं कि पुरुष अक्सर उन महिलाओं में इंटरेस्ट दिखाते हैं, जो उनसे ज़्यादा डिज़ायरेबल होती हैं. यानी वे 'ऊपर के लीग' में मैच तलाशते हैं. इसके उलट, महिलाएं ज़्यादा रियलिस्टिक होती हैं. वे आमतौर पर उन पुरुषों को चुनती हैं जिनकी अट्रैक्टिवनेस उनके आसपास हो. कभी-कभी महिलाएं उन पुरुषों को भी पसंद कर लेती हैं जो उनसे कम अट्रैक्टिव हों.

इसका मतलब क्या है?

जब पुरुष कहते हैं कि महिलाएं उन्हें रिजेक्ट कर देती हैं, तो असलियत थोड़ी अलग होती है. महिलाएं जरूरी नहीं कि बहुत पिकी हों. दरअसल, रिजेक्शन इसलिए ज़्यादा होता है क्योंकि पुरुष अक्सर अपनी रीच से ऊपर वाली महिलाओं को चुन लेते हैं. ऐसे में नैचुरली रिजेक्शन की संभावना बढ़ जाती है.

रिलेशनशिप के लिए क्या मिलती है सीख?

इस स्टडी से सबसे बड़ी सीख यही है कि डेटिंग ऐप्स पर सक्सेस पाना चाहते हैं तो रियलिस्टिक रहना ज़रूरी है. अगर आप उन लोगों को चुनेंगे जिनका अट्रैक्शन या पॉपुलैरिटी आपके बराबर है, तो मैच मिलने के चांसेस काफी बढ़ जाते हैं. वहीं बार-बार 'आउट ऑफ योर लीग' लोगों को चुनने से रिजेक्शन का सामना करना पड़ सकता है.

डेटिंग का मतलब सिर्फ दिखावे या लुक्स नहीं होता, बल्कि कम्पैटिबिलिटी और कंफर्ट भी उतना ही मायने रखते हैं. इसलिए अगली बार डेटिंग ऐप इस्तेमाल करें, तो ध्यान रखें कि सिर्फ सबसे अट्रैक्टिव प्रोफाइल्स को चुनने से सक्सेस नहीं मिलेगी. बेहतर यह है कि आप किसी ऐसे इंसान को चुनें जो आपके बराबर हो.चाहे अट्रैक्शन में हो, सोच में हो या लाइफस्टाइल में. ऐसा करने से न सिर्फ रिजेक्शन के चांसेस कम होंगे, बल्कि लॉन्ग-टर्म कनेक्शन बनने की संभावना भी ज्यादा होगी.

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About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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