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पहली बार किया गया ब्लैडर ट्रांसप्लांट, 8 घंटे की मेहनत और 7 साल की राहत की कहानी पढ़िए

Bladder Transplant Success Story: दुनिया का पहला इंसानी ब्लैडर ट्रांसप्लांट अमेरिका में सफल हुआ है. डायलिसिस पर निर्भर मरीज को 7 साल बाद राहत मिली है. जानिए इस ऐतिहासिक सर्जरी की पूरी कहानी.

Bladder Transplant Success Story: दुनिया में पहली बार डॉक्टरों ने एक इंसान पर ब्लैडर ट्रांसप्लांट की सर्जरी सफलतापूर्वक की है. यह ऐतिहासिक उपलब्धि अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया और यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया के केक मेडिसिन संस्थान के डॉक्टरों ने पूरी की है, यह सर्जरी उन लोगों के लिए उम्मीद की एक नई किरण है जो लंबे समय से डायलिसिस पर निर्भर हैं या ब्लैडर डिसफंक्शन से जूझ रहे हैं. 

जानकारी के मुताबिक, यह जटिल सर्जरी 4 मई को की गई है. जिसमें  यूरोलॉजिक ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. नीमा नस्सिरी और इंस्टीट्यूट ऑफ यूरोलॉजी के संस्थापक निदेशक की मुख्य भूमिका रही है। ये दोनों विशेषज्ञ इस तकनीक को विकसित करने में सालों लगा चुके थे। 

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ब्लैडर का ज्यादातर हिस्सा खो चुका था 

41 साल के मरीज का इलाज के वक्त ट्यूमर हटाने की प्रक्रिया में अपने ब्लैडर का अधिकांश हिस्सा खो चुका था. जो हिस्सा बचा था, वह बेहद छोटा और कमजोर था, जिससे ब्लैडर सामान्य रूप से काम नहीं कर पा रहा था. इसके अलावा उसे कैंसर और अंतिम चरण की किडनी बीमारी भी थी. इसलिए दोनों किडनी निकालनी पड़ी थी. पिछले सात सालों से वह डायलिसिस पर निर्भर था. लेकिन अब उसने राहत की सांस ली है. 

ब्लैडर ट्रांसप्लांट की सूची में आ गया 

अब तक जिन मरीजों का ब्लैडर गंभीर रूप से प्रभावित होता था, उनके लिए एकमात्र विकल्प होता था कि, आंत के एक हिस्से को ब्लैडर की तरह उपयोग में लाया जाए. लेकिन यह तरीका 80% मामलों में जटिलताएं पैदा करता है. जैसे पाचन तंत्र की समस्याएं और किडनी फंक्शन में गिरावट होती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि डाइजेस्टिव और यूरिनरी ट्रैक्ट के माइक्रोबायोम एक-दूसरे से काफी अलग होते हैं. 

यह ट्रांसप्लांट इतना मुश्किल क्यों था? 

ब्लैडर ट्रांसप्लांट करना इसलिए मुश्किल रहा है, क्योंकि यह अंग हमारे पेट के अंदर गहराई में पाया जाता है और इसकी खून का ज्यादा बह जाने वाली तकलीफ बनी रहती है. इन्हीं तकनीकी चुनौतियों के चलते अब तक यह प्रक्रिया इंसानों पर संभव नहीं हो पाई थी. लेकिन इस बार डॉक्टरों ने सर्जरी को आसान बनाने के लिए ब्लड वेसल्स को पहले आपस में जोड़ दिया और फिर डोनर का ब्लैडर शरीर में विकसित कर दिया था. 

मरीज की हालत में सुधार हुआ है 

एक सामान्य पुरुष का ब्लैडर लगभग 700 मिलीलीटर यूरिन को स्टोर कर सकता है, लेकिन मरीज के बचे हुए ब्लैडर की क्षमता केवल 30 मिलीलीटर थी. सर्जरी के बाद अब मरीज की स्थिति में सुधार देखा गया है और उसे 7 साल बाद डायलिसिस से छुटकारा मिल गया है. 

यह सर्जरी चिकित्सा विज्ञान में एक नया मील का पत्थर बन गया है. अब तक हृदय, किडनी, लिवर जैसे अंगों का इलाज होता है. लेकिन अब ब्लैडर को भी इस सूची में शामिल कर लिया गया है. यह उन लाखों मरीजों के लिए एक नई आशा है, जो अब तक केवल अस्थायी उपायों पर निर्भर थे. 

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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