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पॉपकॉर्न लंग से लेकर पॉपकॉन ब्रेन तक, जानें क्या हैं ये अजीब तरह की बीमारियां

पॉपकॉर्न लंग और पॉपकॉर्न ब्रेन जैसी बीमारियां जितनी अजीब सुनाई देती हैं,उतनी ही गंभीर भी हैं.हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन दोनों ही बीमारियों से बचने का एक ही तरीका है सावधानी रखना और अलर्ट रहना

Strange Diseases : आजकल हमारी लाइफस्टाइल, खानपान और रुटीन ऐसी हो गई हैं कि कई अजीबोगरीब बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. इनमें ही पॉपकॉर्न लंग और पॉपकॉर्न ब्रेन भी शामिल हैं. नाम सुनने में अटपटा और मजेदार भले ही लग सकता है लेकिन, लेकिन सच्चाई तो यही है कि ये बेहद खतरनाक बीमारियां हैं. आइए इस आर्टिकल में जानते हैं आखिर ये बीमारियां क्या होती हैं इनके कारण, लक्षण, रिस्क फैक्टर्स और बचाव के तरीके...

पॉपकॉर्न लंग कौन सी बीमारी है

पॉपकॉर्न लंग (Popcorn Lung) का असली नाम है Bronchiolitis Obliterans है. ये एक रेयर लेकिन खतरनाक फेफड़ों (Lung) की बीमारी है, जो खास तौर पर उन लोगों को होती है जो लंबे समय तक आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग एजेंट्स के संपर्क में रहते हैं. यह बीमारी तब सामने आई जब माइक्रोवेव पॉपकॉर्न फैक्ट्री में काम करने वाले लोगों के फेफड़े खराब होने लगे. इसका कारण Diacetyl नाम का एक केमिकल, जिसका इस्तेमाल मक्खन जैसा फ्लेवर देने में होता है.

पॉपकॉर्न लंग के लक्षण

खांसी जो ठीक नहीं होती

सांस लेने में तकलीफ

सीने में दर्द

इस बीमारी से कैसे बचें

फ्लेवरिंग एजेंट्स खासकर Diacetyl वाले फ्लेवर से बचें और सावधानी रखें.

अगर आप ऐसे किसी इंडस्ट्री में काम करते हैं तो मास्क और वेंटिलेशन जरूरी है.

फ्लेवरिंग फैक्ट्रियों में वेंटिलेशन जरूरी है.

धूम्रपान और वेपिंग से बचें.

पॉपकॉर्न ब्रेन कितनी खतरनाक बीमारी

पॉपकॉर्न ब्रेन (Popcorn Brain) यानी एक ऐसा दिमाग, जो पलभर भी किसी एक जगह टिककर नहीं ठहर सकता है. कभी यहां तो कभी वहां. मान लीजिए आप टीवी पर अपनी फेवरेट मूवी देख रहे हैं लेकिन तभी हाथ स्मार्टफोन उठा लेता है और रील चलाने लगता है या सोशल मीडिया यूज करने लगता है.  पॉपकॉर्न ब्रेन कोई मेडिकल टर्म नहीं है, लेकिन ये एक नया 'डिजिटल एज सिंड्रोम; है, जिसका नाम लोगों की डिजिटल दुनिया में बढ़ती डिपेंडेंसी पर रखा गया है.

जब दिमाग हर समय सोशल मीडिया, वीडियो, इंस्टेंट नोटिफिकेशन, गेम्स और शॉर्ट वीडियो से घिरा रहता है, तब रियल लाइफ की चीजें धीमी और बोरिंग लगने लगती हैं. ब्रेन को हर वक्त डोपामिन की हाई डोज चाहिए होती है.

साल 2011 में वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर डेविड लेवी ने एक मेंटल सिचुएशन के लिए पहली बार 'पॉपकॉर्न ब्रेन' शब्द का इस्तेमाल किया. जब किसी के विचार, फोकस, दिमाग कूदते-फांदते रहें तो उसे पॉपकॉर्न ब्रेन कहते हैं. यह ठीक उसी तरह होता है, जैसे गर्म बर्तन में पॉपकॉर्न तेजी से कूदते और फूटते रहते हैं. इससे वर्क परफॉर्मेंस और पर्सनल लाइफ बुरी तरह प्रभावित हो सकती है.

पॉपकॉर्न ब्रेन के लक्षण

ध्यान न लगना

रियल लाइफ में खुशी महसूस न होना

हर वक्त बेचैनी और थकान

एक जगह एकाग्र होकर नहीं बैठ सकते

दिमाग इधर-उधर करता रहता है लगातार

हर मिनट सोशल मीडिया चेक करते रहना

पॉपकॉर्न ब्रेन से बचने के लिए क्या करें

डिजिटल डिटॉक्स करें, एक बार में सोशल मीडिया का टाइम तय करें.

हर दिन कुछ समय बिना मोबाइल बिताएं.

माइंडफुलनेस, मेडिटेशन और योग करें.

क्रिएटिव एक्टविटीज बढ़ाएं

जरूरी काम पहले निपटाएं.

क्वालिटी नींद लें.

काम से समय-समय पर ब्रेक लेते रहें.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें..

यह भी पढ़ें :तेज खार के साथ लग रही है ठंड तो इस बीमारी के हैं लक्षण, तुरंत करें ये काम

 

 

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About the author कोमल पांडे

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है. पत्रकारिता में 11 साल का अनुभव है. पॉलिटिकल, फीचर, नॉलेज के लेखन में दिलचस्पी है. ABP Live के लिए फीचर की खबरें लिखती हूं. खबरें अच्छी हों, रीडर्स को पढ़ने में अच्छा लगे और जो तथ्य हों वो सही हों, इसी पर पूरा जोर रहता है.
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