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High Protein Diet Risks: कितना प्रोटीन इनटेक हो जाता है बॉडी में हद से ज्यादा प्रोटीन, इससे सेहत को कितनी हो सकती है दिक्कत?

Protein do we need: आजकल सोशल मीडिया पर एक हाइप बन गई है कि ज्यादा प्रोटीन लेने से ज्यादा सेहत बनता है. चलिए आपको इसके पीछे की सच्चाई बताते हैं कि आखिर इसके पीछे की सच्चाई क्या है

How Much Protein do We Need: प्रोटीन को शरीर की बिल्डिंग ब्लॉक कहा जाता है. यह मांसपेशियों, स्किन, बाल, नाखून और कई जरूरी टिश्यूज को बनाने और रिपेयर करने का काम करता है. लेकिन आजकल प्रोटीन को लेकर जो हाइप बन गया है, उसमें कई बार हकीकत और मार्केटिंग के बीच फर्क करना मुश्किल हो जाता है. हर दुकान और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर हाई-प्रोटीन बिस्किट, प्रोटीन पास्ता, प्रोटीन पानी और ना जाने क्या-क्या मिल रहा है. सवाल यह है कि क्या वाकई हमें इतनी ज्यादा प्रोटीन की जरूरत है?. चलिए आपको बताते हैं कि ज्यादा प्रोटीन से क्या दिक्कत हो सकती है. 

कितना प्रोटीन जरूरी है?

साइंटिस्ट का कहना है कि एक सामान्य एडल्ट को डेली लगभग 0.8 ग्राम प्रति किलो बॉडी वेट प्रोटीन की जरूरत होती है. यानी अगर आपका वजन 70 किलो है, तो आपको रोज करीब 55-60 ग्राम प्रोटीन चाहिए. जो लोग वर्कआउट करते हैं या रेजिस्टेंस ट्रेनिंग में लगे रहते हैं, उनके लिए यह जरूरत बढ़कर 1.3 से 1.6 ग्राम प्रति किलो तक हो सकती है. इससे ज्यादा लेने पर रिसर्च बताती है कि मसल्स या स्ट्रेंथ पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता.

मसल्स और प्रोटीन का रिश्ता

कई स्टडीज में यह सामने आया है कि प्रोटीन का फायदा तभी ज्यादा होता है जब आप इसे रेजिस्टेंस ट्रेनिंग यानी वेट उठाने जैसी एक्सरसाइज के साथ जोड़ते हैं. केवल प्रोटीन ज्यादा खाने से मसल्स अपने आप नहीं बनेंगे. 2018 और 2022 में हुई कई रिसर्च में यही साबित हुआ कि एक तय सीमा तक प्रोटीन लेना और जिम वर्कआउट करना ही असली फर्क पैदा करता है.

क्या ज्यादा प्रोटीन से वजन तेजी से घटता है?

कई लोग मानते हैं कि हाई-प्रोटीन डाइट से तेजी से वजन कम होता है. सच यह है कि प्रोटीन खाने से आपको ज्यादा देर तक भूख नहीं लगती और मेटाबॉलिज्म भी थोड़ी देर के लिए तेज हो जाता है. लेकिन लंबी अवधि में इसका फर्क बहुत बड़ा नहीं निकलता. 2015 और 2024 की कई रिसर्च यही दिखाती हैं कि वजन घटाने में कैलोरी बैलेंस सबसे अहम है, न कि सिर्फ प्रोटीन.

पौधे या एनिमल प्रोटीन कौन बेहतर?

एनिमल प्रोटीन जैसे मांस, अंडे और दूध को अक्सर ज्यादा असरदार माना जाता है क्योंकि इनमें सभी जरूरी अमीनो एसिड होते हैं. लेकिन रिसर्च बताती है कि अगर आप प्लांट प्रोटीन दालें, सोया, चना, मसूर आदि को अच्छे कॉम्बिनेशन में खाते हैं, तो यह भी उतना ही असरदार हो सकता है. कई स्टडीज में पाया गया कि समान मात्रा में प्रोटीन लेने पर वेगन और नॉन-वेगन लोगों में मसल्स ग्रोथ में कोई खास फर्क नहीं था.

कब बनता है ज्यादा प्रोटीन नुकसानदायक?

हेल्दी लोगों के लिए 2 ग्राम प्रति किलो तक प्रोटीन लेना सुरक्षित माना जाता है. लेकिन इससे ज्यादा प्रोटीन लंबे समय तक लेने पर रिसर्च ने कुछ खतरे बताए हैं जैसे हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ना या किडनी पर दबाव आना खासकर अगर पहले से किडनी की बीमारी हो. रेड मीट और प्रोसेस्ड मीट से मिलने वाला प्रोटीन ज्यादा होने पर कार्डियोवैस्कुलर प्रॉब्लम्स का रिस्क भी बढ़ सकता है. आज प्रोटीन एक जरूरत से ज्यादा एक बिजनेस बन चुका है. सप्लीमेंट इंडस्ट्री का ग्लोबल मार्केट 25 बिलियन डॉलर से ऊपर है. असलियत यह है कि ज्यादातर लोग पहले से ही अपनी डाइट में पर्याप्त प्रोटीन ले रहे हैं. लेकिन मार्केटिंग और सोशल मीडिया के दबाव में लोग मान बैठे हैं कि ज्यादा प्रोटीन मतलब ज्यादा हेल्थ.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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