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महिलाओं के कान पुरुषों के मुकाबले होते हैं काफी तेज! रिसर्च में चौंका देने वाला खुलासा

Women hear better than men : महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक बेहतर सुन सकती हैं. यह जानकर आपको हैरानी होगी, लेकिन रिसर्च में इस बात को साबित किया गया है. 

Women hear better than men : अक्सर आपने लोगों को मजाक में कहते हुए सुना होगा कि महिलाओं के कान काफी तेज होते हैं. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि मजाक में कही जाने वाली यह बात बिल्कुल सच है. दरअसल, साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला है कि पुरुष और महिलाएं अलग-अलग तरीके से सुनते हैं. महिलाओं की सुनने की क्षमता पुरुषों की तुलना में अधिक सेंसटिव होती है. इस अध्ययन में काफी चौंका देने वाले खुलासे हुए हैं. रिसर्च में बताया गया है कि हर मामले में महिलाओं के सुनने की क्षमता पुरुषों से बेहतर होती है, चाहे वह उम्र हो या कोई भी स्थान.

क्या कहता है रिसर्च?

अध्ययन के निष्कर्षों के अनुसार, महिलाओं के सुनने की पुरुषों के सुनने की क्षमता से औसतन लगभग दो डेसिबल बेहतर होती है. यह अध्ययन अलग-अलग वातावरण और आयु ग्रुप के बीच हुआ है, जो सच साबित हुआ है. बता दें कि इस अध्ययन में पांच देशों के 13 अलग-अलग ग्रुप के 448 स्वस्थ वयस्कों के सुनने की क्षमता की जांच की गई. इस अध्ययन में ग्रामीण, शहरी से लेकर ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक रहने वाले वयस्कों को शामिल किया गया था, जिसमें रिसर्च के हिसाब से बहुत विविधता थी. इस रिसर्च के परिणामों ने स्पष्ट रूप से दिखाया कि महिलाओं की सुनने की क्षमता पुरुषों की तुलना में बेहतर है. रिसर्च में साबित किया गया है कि  महिलाएं सभी तरह के आवाजों को बेहतर तरीके से सुन पाती है.

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बायोलॉजिकल अंतर - Biological Differences

रिसर्च के अनुसार, महिलाओं में यह एक यूनिवर्सल बायोलॉजिकल विशेषता का संकेत है, जो संभावित रूप से आंतरिक कान की संरचना में सूक्ष्म अंतर या शायद हार्मोनल अंतर का कारण बनता है. आश्चर्यजनक बात यह है कि उम्र के साथ भले ही लोगों के सुनने की क्षमता कम हो जाती है, लेकिन फिर भी महिलाओं के सुनने की क्षमता अपने आयु वर्ग के पुरुषों से सुनने की क्षमता से काफी बेहतर है. इस रिसर्च में एक छोटा सा पैटर्न देखा गया कि दायां कान, बाएं कान की तुलना में थोड़ा अधिक सेंसटिव था.

एनवायरमेंटल अंतर - Environmental Differences

इस अध्ययन में पर्यावरण पर भी ध्यान केंद्रित किया. इससे यह पता चलता है कि आप जहां रहते हैं, वहां का क्षेत्र भी आपके सुनने के तरीके को बदल सकता है. अध्ययन के अनुसार, ऊंचाई पर रहने वाले लोगों की सुनने की क्षमता कम होती है, क्योंकि यहां का ऑक्सीजन लेवल कम होता है. वहीं, जंगलों में रहने वाले लोगों की सुनने की क्षमता अधिक बेहतर होती है. लगातार शोर के संपर्क में रहने वाले शहर के लोगों में ऊंची आवाजों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है.

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About the author मीनू झा

मीनू झा पिछले 8 साल से हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लिख रही हैं. उन्होंने ग्वालियर के जीवाजी यूनिवर्सिटी से इकनॉमिक्स में एमए और भारतीय विद्या भवन से जर्नलिज़्म की पढ़ाई की है. लिखना उनके लिए सिर्फ एक प्रोफेशन नहीं, बल्कि दिल की बात कहने का तरीका है. उन्हें घूमना, पढ़ना और पेंटिंग करना बहुत पसंद है। हर नई जगह, हर नई किताब और हर रंग उनके लेखों में कहीं न कहीं झलकते हैं.

इसके साथ ही स्टोरी की स्ट्रैटेजी से टारगेट हासिल करना है, यही हुनर उनकी असल ताकत है. Digital Skills  डिजिटल युग की मांग को समझते हुए इन्होंने ने SEO और डेटा एनालिटिक्स में अलग-अलग ट्रेनिंग और कोर्स के जरिए अपनी दक्षता को एक नई ऊंचाई दी है. इतना ही नहीं स्वास्थ्य से जुड़ी तस्वीरों की बेहतरीन समझ रखने वाली मीनू Canva जैसे डिज़ाइन टूल्स में एक्सपर्ट हैं, जो उन्हें विज़ुअल कंटेंट प्लानिंग और सोशल मीडिया ऑप्टिमाइजेशन में एक बेहतरीन लीडर के तौर पर उभारता है.

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