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Child Mortality Rate In India: बच्चों की मौत को लगातार कैसे मात दे रहा भारत, जानें दुनिया के मुकाबले कैसे मिली यह कामयाबी?

Newborn Care In India: रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2014 से 2024 के बीच भारत में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में 41 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है.

How India Reduced Child Mortality Rate: पिछले एक दशक में भारत ने बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसकी चर्चा अब दुनिया भर में हो रही है. संयुक्त राष्ट्र की हाल ही में जारी यूएन इंटर-एजेंसी ग्रुप फॉर चाइल्ड मॉर्टेलिटी एस्टिमेशन 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2014 से 2024 के बीच भारत में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में 41 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. वहीं नवजात शिशु मृत्यु दर में 37 प्रतिशत की गिरावट आई है. खास बात यह है कि यह उपलब्धि वैश्विक औसत से कहीं बेहतर है, जहां इसी अवधि में बाल मृत्यु दर में 18 प्रतिशत और नवजात मृत्यु दर में 15 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. 

क्या है इस सफलता के पीछे का कारण?

एक्सपर्ट का मानना है कि यह सफलता किसी एक योजना का परिणाम नहीं, बल्कि माताओं और बच्चों के लिए लगातार मजबूत की गई स्वास्थ्य सेवाओं का नतीजा है. भारत ने पिछले कुछ वर्षों में गर्भावस्था से लेकर बच्चे के शुरुआती वर्षों तक स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता दी है. हाल ही में जारी NFHS-6 (2023-24) रिपोर्ट के अनुसार, 76.2 प्रतिशत महिलाओं को गर्भावस्था की पहली तिमाही में ही प्रसवपूर्व देखभाल मिल गई. वहीं संस्थागत प्रसव का आंकड़ा बढ़कर 90.6 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो पहले 88.6 प्रतिशत था. इसी तरह प्रशिक्षित हेल्थकर्मियों की निगरानी में होने वाले प्रसव भी 89.4 प्रतिशत से बढ़कर 91.3 प्रतिशत हो गए हैं. 

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देखभाल में काफी सुधार दर्ज किया गया?

जन्म के तुरंत बाद का समय बच्चों के लिए सबसे सेंसिटिव माना जाता है. इसी को ध्यान में रखते हुए भारत ने नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया है. देशभर में 1,100 से अधिक स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट और नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट स्थापित की गई हैं. इनके साथ 2,868 न्यूबॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट भी काम कर रही हैं, जो हर साल 15 लाख से अधिक बीमार और कमजोर नवजातों को विशेष देखभाल प्रदान करती हैं.

टीकाकरण का भी रोल

बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार का एक बड़ा कारण टीकाकरण भी रहा है. NFHS-6 के अनुसार, 12 से 23 महीने की उम्र के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज 76.6 प्रतिशत से बढ़कर 82.6 प्रतिशत हो गया है. वहीं रोटावायरस वैक्सीन कवरेज में जबरदस्त उछाल देखा गया है, जो 36.4 प्रतिशत से बढ़कर 85.4 प्रतिशत तक पहुंच गया. पोषण के क्षेत्र में भी भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति की है. पांच साल से कम उम्र के बच्चों में स्टंटिंग यानी उम्र के हिसाब से कम लंबाई की समस्या 35.5 प्रतिशत से घटकर 29.3 प्रतिशत रह गई है. वहीं गंभीर कुपोषण की दर भी 7.7 प्रतिशत से घटकर 5.5 प्रतिशत हो गई है.

 लाखों बच्चों की जिंदगी बचाई जा सकती है

पूर्व सदस्य (स्वास्थ्य एवं पोषण), नीति आयोग डॉ. विनोद के. पॉल का मानना है कि भारत की यह उपलब्धि सिर्फ राष्ट्रीय सफलता नहीं है, बल्कि दुनिया के विकासशील देशों के लिए एक उदाहरण बन चुकी है. उनका कहना है कि मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था, फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल ने भारत को बाल मृत्यु दर कम करने में बड़ी सफलता दिलाई है. भारत की यह उपलब्धि दिखाती है कि सही नीतियों और निरंतर प्रयासों से लाखों बच्चों की जिंदगी बचाई जा सकती है और आने वाली पीढ़ियों को बेहतर स्वास्थ्य दिया जा सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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