Myths Vs Facts: क्या हाई ब्लड प्रेशर से भी दिमाग में बन सकते हैं खून के थक्के? जान लीजिए सच
हाई बीपी (हाइपरटेंशन) दिमाग में खून के थक्के बनने के जोखिम को काफी हद तक बढ़ा सकता है. क्योंकि यह दिमाग की नसों की दीवारों को नुकसान पहुंचाता है. जिससे उनमें थक्का बनने की संभावना बढ़ जाती है.

हाई बीपी (हाइपरटेंशन) दिमाग में खून के थक्के बनने के जोखिम को काफी हद तक बढ़ा सकता है. क्योंकि यह दिमाग की नसों की दीवारों को नुकसान पहुंचाता है. जिससे उनमें थक्का बनने की संभावना बढ़ जाती है. जिससे अगर कोई खून का थक्का दिमाग में ब्लड सर्कुलेशन में रुकावट करता है. जिसके कारण स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है. यह एक गंभीर स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं हैं.
दिमाग की नसों में दिक्कत होने लगती है
उच्च रक्तचाप रक्त वाहिकाओं की दीवारों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे वे संकरी, सख्त हो जाती हैं और प्लाक बिल्डअप विकसित होता है, जो थक्के बनने के लिए आदर्श स्थिति बना सकता है.
स्ट्रोक का जोखिम
जब उच्च रक्तचाप के कारण संकुचित मस्तिष्क धमनी में रक्त का थक्का बनता है, तो यह मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को अवरुद्ध कर सकता है, जिससे इस्केमिक स्ट्रोक हो सकता है।
दिमाग के अंदर ब्लीडिंग स्ट्रोक का जोखिम
गंभीर मामलों में. उच्च रक्तचाप मस्तिष्क में रक्त वाहिकाओं की दीवारों को भी कमजोर कर सकता है, जिससे वाहिका फट सकती है और रक्तस्रावी स्ट्रोक हो सकता है.
हाई बीपी कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण होता है
हाई बीपी और शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढता है तो इसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है. दिमाग पर दबाव बढ़ने के कारण ब्रेन हेमरेज हो सकता है. बढ़ती उम्र के साथ दिमाग से जुड़ी बीमारियां जैसे डिमेंशिया, अल्जाइमर या स्ट्रोक जैसी समस्याएं घेर लेती है. खराब लाइफस्टाइल और खानपान के कारण कई लोगों को हाई बीपी की समस्या होती है. जिसका असर सीधा दिमाग पर पड़ता है.
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बढता है ब्रेन हेमरेज का खतरा
हाई बीपी के कारण कई बार ब्रेन हेमरोज हो जाती है. जिससे व्यक्ति के जान जाने का भी खतरा रहता है. ब्रेन हेमरेज को आप एक तरह का स्ट्रोक के रूप में ही देख सकते हैं. ब्रेन हेमरेज में भी ब्रेन के अंदर ब्लीडिंग होने लगती है. हाई बीपी के कारण हाइपरटेंशन का भी खतरा रहता है. जो ब्लड वेसल्स को धीरे-धीरे कमजोर करने लगता है. अगर किसी का बीपी लगातार हाई रहता है ब्लड वेसल्स पर दबाव बढ़ने लगता है.
95 प्रतिशत ब्रेन हेमरेज के मामले हाई बीपी के कारण होता है. इसलिए हमेशा बीपी चेक करवाते रहना चाहिए. ताकि हद से ज्यादा हाई बीपी शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. जिन लोगों की उम्र 40 साल से ज्यादा होती है वह अपने बीपी का खास ख्याल रखें वरना बीपी के साथ-साथ कोलेस्ट्रॉल और शुगर का लेवल बढ़ जाए तो फिर जोखिम भरा साबित हो सकता है.
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