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क्या जोड़ों के दर्द में इस्तेमाल होनेवाली सस्ती दवा कोविड-19 की बीमारी में हो सकती है कारगर? रिसर्च में है जवाब

जोड़ों के दर्द में इस्तेमाल होनेवाली सस्ती दवा कोविड-19 के इलाज में प्रभावी पाई गई है. शोधकर्ताओं का कहना है कि परीक्षण से पता चला कि उसने इलाज का समय और ऑक्सीजन की जरूरत को कम कर दिया. कोविड-19 के इलाज में कोल्चिसीन मुंह से खाई जानेवाली पहली दवा साबित हो सकती है.

जोड़ों के दर्द में इस्तेमाल होनेवाली एक सस्ती दवा कोविड-19 के इलाज में असरदार साबित हुई है. रिसर्च में कोल्चिसीन दवा का इस्तेमाल कोविड-19 के मरीजों पर असरदार पाया गया है. उसके इस्तेमाल से मरीजों को अतिरिक्त ऑक्सीजन की कम जरूरत पड़ी. दवा का असर जानने के लिए 75 मरीजों पर ब्राजील में मानव परीक्षण किया गया. नतीजे से पता चला कि दवा इस्तेमाल करनेवाले मरीजों का अस्पताल में ठहरने का समय घट गया. इसके अलावा, शोधकर्ताओं का कहना है कि मौत का खतरा 20 फीसद तक कम हो सकता है.

क्या जोड़ों के दर्द की दवा कोविड-19 के इलाज में है प्रभावी?

रिसर्च से पता चला है कि कोल्चिसीन दवा कोविड-19 के मरीजों का अस्पताल में ठहरने की अवधि और अतिरिक्त ऑक्सीजन की जरूरत कम कर सकती है. दवा के बारे में शोधकर्ताओं का कहना है कि कोविड-19 के इलाज के लिए कोल्चिसीन मुंह से खाई जानेवाली पहली दवा साबित हो सकती है. रिसर्च के लिए फंड कई संस्थाओं और ब्राजील की सरकार ने मुहैया कराए थे.

रिसर्च के दौरान दवा शरीर में सूजन से होनेवाले रिस्पॉन्स को कम करनेवाली पाई गई और रक्त वाहिकाओं में मौजूद कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मददगार साबित हुई. रिसर्च के नतीजों को ऑनलाइन आरएमडी ओपेन जर्नल में प्रकाशित किया गया है. उसमें बताया गया है कि दवा किसी भी तरह काम करती हो, मगर ऐसा लगता है कि कोविड-19 की वजह से अस्पताल में भर्ती मरीजों के इलाज में कोल्चिसीन मुफीद साबित हो सकती है.

इस्तेमाल से ऑक्सीजन की जरूरत और इलाज के समय में कमी 

शोधकर्ताओं का कहना है कि दवा के गंभीर साइड-इफेक्ट्स में दिल या लीवर को नुकसान जैसे लक्षण नहीं पाए गए. ये ऐसे फैक्टर हैं जिनका संबंध कभी-कभी कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल की जानेवाली अन्य दवाइयों से जुड़े होते हैं. उन्होंने बताया कि ऑक्सीजन थेरेपी की जरूरत में कमी और अस्पताल में ठहरने के समय का कम होना न सिर्फ मरीजों के लिए फायदेमंद है बल्कि उससे इलाज का खर्च और अस्पताल के बेड की किल्लत को भी घटाना संभव हो सकेगा. लेकिन, उन्होंने ये भी सावधानी जाहिर की कि मानव परीक्षण में कम मरीजों को शामिल किया गया था.

फिलहाल, ये तय करना मुश्किल है कि क्या कोल्चिसीन इंटेसिव केयर यूनिट की जरूरत या मौत के खतरे को कम कर सकती है. आपको बता दें कि कोल्चिसीन का इस्तेमाल सूजन वाली स्थितियों की रोकथाम और इलाज में किया जाता है, जिसका सामना कोविड-19 के कुछ मरीजों को होता है. इसलिए, शोधकर्ता पता लगाना चाहते थे कि उसके इस्तेमाल से क्या कोविड-19 के मरीजों को फायदा पहुंच सकता है. उन्होंने अप्रैल से अगस्त 2020 के दौरान 75 मरीजों को मानव परीक्षण में शामिल किया.

मरीजों में कोविड-19 के मध्यम से गंभीर लक्षणों की पहचान हुई थी. उन लोगों को कोल्चिसीन का इस्तेमाल अलग-अलग लेवल पर कराया गया. मानव परीक्षण के नतीजे 72 मरीजों पर आधारित थे. पाया गया कि दवा लेनेवाले लोगों का ऑक्सीजन थेरेपी का औसत समय 4 दिन रहा जबकि इलाज के आम तरीका से समय साढ़े छह दिन का रहा. उसी तरह कोल्चिसीन वाले ग्रुप का अस्पताल में ठहरने का औसत अंतराल 7 दिन पाया गया जबकि अन्य ग्रुप के लोगों को 9 दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ा.

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