Yogi Cabinet Expansion: क्या कैबिनेट में शामिल होने के बाद बढ़ जाती है विधायक की सैलरी, क्या है नियम?
Yogi Cabinet Expansion: योगी कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं के बीच जानिए विधायक और कैबिनेट मंत्री की सैलरी में कितना फर्क होता है और मंत्री बनने के बाद कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं.

Yogi Cabinet Expansion: उत्तर प्रदेश में इन दिनों योगी कैबिनेट विस्तार को लेकर काफी चर्चा हो रही है. आसान भाषा में समझें तो जब मुख्यमंत्री Yogi Adityanath अपनी सरकार में नए मंत्रियों को शामिल करते हैं या पुराने मंत्रियों के विभाग बदलते हैं, तो उसे कैबिनेट विस्तार कहा जाता है. अक्सर कई लोग सोचते हैं कि विधायक बनने और मंत्री बनने की सैलरी एक जैसी ही होती होगी, लेकिन ऐसा नहीं है, कैबिनेट में जगह मिलने के बाद विधायक की सैलरी बढ़ जाती है. दरअसल मंत्री बनने के बाद नेताओं को ज्यादा जिम्मेदारियां मिलती हैं और इसके साथ कई उनको अतिरिक्त सुविधाएं भी दी जाती हैं. यही कारण है कि कैबिनेट विस्तार सिर्फ राजनीति ही नहीं बल्कि सुविधाओं और ताकत के नजरिए से भी काफी अहम माना जाता है.
विधायक और मंत्री की सैलरी में कितना फर्क होता है
उत्तर प्रदेश में विधायकों (MLA) या कैबिनेट मंत्री की सैलरी राज्य सरकार के तहत ही मिलती है. जिसमें एक विधायक को हर महीने करीब 1.87 लाख रुपये तक सैलरी और दूसरी सरकारी सुविधाएं मिलती हैं. इसमें मूल वेतन, यात्रा खर्च और रोजमर्रा के कामों के लिए मिलने वाली रकम शामिल होती है. लेकिन जब कोई विधायक मंत्री या कैबिनेट मंत्री बनता है, तो उसकी कमाई और सुविधाएं दोनों ही बढ़ जाती हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर प्रदेश में कैबिनेट मंत्री को हर महीने करीब 2.5 लाख रुपये तक वेतन और दूसरी सुविधाएं मिलती हैं. इसके अलावा सरकारी बंगला, गाड़ी, सुरक्षा कर्मचारी और स्टाफ जैसी कई सुविधाएं भी दी जाती हैं. यानी मंत्री बनने के बाद पहले के मुकाबले काफी ज्यादा सुविधाएं मिलने लगती हैं.
यह भी पढ़ेंः मुकेश अंबानी के पास कितनी दौलत, जानें उससे कितने टन खरीद सकते हैं सोना?
मंत्री बनने के बाद क्यों बढ़ती हैं सुविधाएं?
हाल ही में योगी सरकार के संभावित कैबिनेट विस्तार को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है. माना जा रहा है कि कुछ नए चेहरों को मंत्री पद मिल सकता है. ऐसे में लोगों के बीच यह जानने की उत्सुकता भी बढ़ गई है कि मंत्री बनने के बाद नेताओं को क्या-क्या फायदे मिलते हैं. साथ ही सरकार में मंत्री बनने के बाद किसी नेता की जिम्मेदारी पहले से ज्यादा हो जाती है. जिसमें उन्हें बड़े विभाग संभालने पड़ते हैं और सरकारी फैसलों में अहम भूमिका निभानी होती है. इसी वजह से सरकार उन्हें ज्यादा सुविधाएं देती है ताकि वे अपना काम सही तरीके से कर सकें. यही कारण है कि विधायक और मंत्री की सैलरी और सुविधाओं में अंतर देखने को मिलता है. हालांकि यह रकम हर राज्य में अलग-अलग हो सकती है क्योंकि हर राज्य अपनी तरफ से वेतन और सुविधाएं तय करता है.
क्या कहता है नियम और कैसे तय होती है सैलरी?
भारत में विधायकों और मंत्रियों की सैलरी राज्य विधानमंडल के बनाए कानूनों के अनुसार तय होती है. हर राज्य अपने हिसाब से वेतन और सुविधाओं में बदलाव कर सकता है. मंत्री बनने के बाद किसी विधायक की मूल पहचान विधायक की ही रहती है, लेकिन उसे मंत्री पद की अतिरिक्त सुविधाएं मिलने लगती हैं. यही कारण है कि कैबिनेट में शामिल होने के बाद उनकी कुल आय पहले के मुकाबले बढ़ जाती है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मंत्री पद सिर्फ सत्ता और जिम्मेदारी ही नहीं बल्कि आर्थिक और प्रशासनिक सुविधाओं के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है.
यह भी पढ़ेंः अगर 2000 लोगों के ऑफिस में हो जाए टोटली वर्क फ्रॉम होम, एक महीने में कितना बच जाएगा पैसा? जानें हिसाब-किताब






















