रूस में अपने सैनिक भेज रहा उत्तर कोरिया, उसके पास कितनी बड़ी सेना?
Russia Ukraine War North Korean Soldiers: रूस-यूक्रेन युद्ध में सहायता के लिए उत्तर कोरिया अपनी 13 लाख वाली विशाल सेना और बैलिस्टिक मिसाइलों का जखीरा रूस भेज रहा है. चलिए जानें यह सेना कितनी ताकतवर.

Russia Ukraine War North Korean Soldiers: यूक्रेन और रूस के बीच बीते साढ़े चार सालों से जारी जंग में अब एक नया और खतरनाक मोड़ आ गया है. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के हालिया दावों के अनुसार, रूसी सेना का साथ देने के लिए प्योंगयांग अपनी जमीन से करीब 30,000 से 50,000 उत्तर कोरियाई सैनिकों को रूसी मोर्चे पर तैनात करने की तैयारी में है. किम जोंग उन की सरकार इस युद्ध के बहाने आधुनिक हथियारों का अनुभव पाने और रूस से उन्नत सैन्य तकनीक हासिल करने की फिराक में है. इस बड़े संकट से निपटने के लिए यूक्रेन ने अब दक्षिण कोरिया से तत्काल एयर डिफेंस सहायता मांगी है, ताकि रूसी मिसाइलों का मुकाबला किया जा सके. चलिए इसकी ताकत जानें.
दुनिया की चौथी सबसे विशाल सेना
उत्तर कोरिया की सेना को कोरियन पीपुल्स आर्मी कहा जाता है, जो दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे सख्त सेनाओं में गिनी जाती है. आंकड़ों पर नजर डालें तो प्योंगयांग के पास इस वक्त 12.80 लाख सक्रिय सैनिक मौजूद हैं. एक्टिव सैनिकों की संख्या के मामले में उत्तर कोरिया, चीन, भारत और अमेरिका के बाद पूरी दुनिया में चौथे स्थान पर आता है. इसके अलावा देश के पास 6 लाख रिजर्व सैनिक और वर्कर-पीजेंट रेड गार्ड्स जैसे अर्धसैनिक बलों का मजबूत बैकअप भी मौजूद है, जो युद्ध के समय किसी भी मोर्चे पर उतारे जा सकते हैं.
चार सैन्य अंगों में बंटी प्योंगयांग की सुरक्षा व्यवस्था
उत्तर कोरिया का पूरा समाज अत्यधिक सैन्यीकृत है, जहां सख्त कानून लागू हैं. यहां 17 से 30 वर्ष की आयु वाले हर युवा पुरुष को 3 से लेकर 12 वर्षों तक सेना में सेवा देना अनिवार्य किया गया है. देश की मुख्य सेना को चार बड़े हिस्सों में विभाजित किया गया है- थल सेना, वायु सेना, नौसेना और स्ट्रैटेजिक फोर्स. स्ट्रैटेजिक फोर्स के तहत सभी प्रकार की बैलिस्टिक मिसाइल यूनिट्स आती हैं, जिन्हें किसी भी देश पर घातक हमला करने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है.
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परमाणु हथियार और मिसाइलों का खौफ
प्योंगयांग उन चुनिंदा नौ देशों के क्लब में शामिल है, जिनके पास घोषित परमाणु हथियार मौजूद हैं. उत्तर कोरिया ने छोटे सामरिक हथियारों से लेकर विशाल अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBM) विकसित कर ली हैं. विशेषज्ञों और खुद उत्तर कोरिया का दावा है कि उसकी मिसाइलों की मारक क्षमता इतनी अधिक है कि वे सीधे अमेरिका के किसी भी कोने को अपना निशाना बना सकती हैं. वर्ष 1950-53 के कोरियाई युद्ध के समय से ही उत्तर कोरिया अमेरिका को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता आया है और उसी सुरक्षा तंत्र के तहत उसने अपना यह विशाल परमाणु जखीरा खड़ा किया है.
रूस के वोरोनेज में तैनात होगी पूरी मिसाइल यूनिट
ताजा घटनाक्रम के मुताबिक तानाशाह किम जोंग उन ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मदद के लिए एक खास मिसाइल टुकड़ी भेजने की योजना बनाई है. लगभग 90 कुशल सैनिकों वाली इस विशेष यूनिट के पास 120 बैलिस्टिक मिसाइलें और 6 मिसाइल लॉन्चर शामिल हैं. इस पूरी घातक यूनिट की तैनाती पश्चिमी रूस के वोरोनेज क्षेत्र में की जाएगी. यह पहला मौका होगा जब उत्तर कोरिया केवल हथियार या सामान्य सैनिक भेजने के बजाय एक पूरी ट्रेंड मिसाइल यूनिट को रूसी धरती पर तैनात करने जा रहा है.
इस्कंदर से भी ज्यादा मारक क्षमता वाली मिसाइलें
रूस भेजे जा रहे इस नए हथियारों के जखीरे में KN-23 और KN-24 बैलिस्टिक मिसाइलें मुख्य रूप से शामिल हैं. KN-23 एक सॉलिड फ्यूल आधारित मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 450 से 690 किलोमीटर तक है और यह अपने साथ 500 किलोग्राम तक का भारी वॉरहेड ले जा सकती है. इसे परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हमलों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. वहीं KN-24 बैलिस्टिक मिसाइल की रेंज रूस की अपनी मशहूर इस्कंदर मिसाइल से भी अधिक बताई जाती है, जो यूक्रेन के भीतर गहराई तक तबाही मचा सकती है.
कुर्स्क मोर्चे पर उत्तर कोरियाई लड़ाकों की मौजूदगी
वर्ष 2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद से ही किम जोंग उन और व्लादिमीर पुतिन के रिश्ते बेहद मजबूत हुए हैं. जून 2024 में दोनों देशों के बीच हुए ऐतिहासिक आपसी रक्षा समझौते के बाद, उत्तर कोरिया ने यूक्रेनी सेना की घुसपैठ रोकने के लिए शुरुआत में 14,000 सैनिक रूस भेजे थे. यूक्रेनी खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस समय रूस के कुर्स्क इलाके में करीब 9,500 उत्तर कोरियाई सैनिक तैनात हैं. रूस के घटते मिसाइल भंडार और हथियारों की कमी को पूरा करने के लिए पुतिन ने किम से 30,000 अतिरिक्त सैनिक उपलब्ध कराने का आग्रह भी किया है.

अमेरिकी खामोशी और जेलेंस्की के लिए बढ़ती चुनौती
लंबी खींचती जंग के कारण रूस का अपना बैलिस्टिक मिसाइल स्टॉक काफी कम हो गया है, जिसे प्योंगयांग से मिसाइलें आयात करके पूरा किया जा रहा है. जब उत्तर कोरिया की मिसाइलें यूक्रेन पर गिरेंगी, तो उन्हें हवा में तबाह करने के लिए जेलेंस्की को अमेरिकी पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत होगी, जिसकी पहले से ही भारी कमी है. उधर अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप इस पूरे घटनाक्रम पर फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं. उत्तर कोरिया और रूस का यह बढ़ता सैन्य गठजोड़ भले ही संयुक्त राष्ट्र के कड़े प्रतिबंधों का खुला उल्लंघन हो, लेकिन किम जोंग उन पुतिन से किया अपना वादा पूरा कर जंग का नक्शा बदलने में जुटे हैं.
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